Bihar Chunav: दिन में प्रशांत किशोर के साथ, शाम में थामा AIMIM का दामन, पूर्व सांसद ने अचानक क्यों बदला पाला?
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है। पूर्व मंत्री और चार बार मुंगेर विधायक रहे डॉ. मोनाजिर हसन ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) छोड़कर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) जॉइन कर लिया है। अब वे मुंगेर सीट से AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
JSP से AIMIM की ओर पलायन: असंतोष की वजह
मोनाजिर हसन शुरू से ही मुंगेर से JSP का टिकट पाने की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। यही असंतोष उनके AIMIM में जाने का मुख्य कारण माना जा रहा है। यह घटनाक्रम इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि सोमवार को ही वे पटना में JSP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर के साथ मौजूद थे। शाम में ओवैसी की पार्टी का दामन थाम लिया।

JSP के टिकट वितरण को लेकर नाराजगी
JSP ने हाल ही में 65 प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की है, जबकि पहली सूची में 51 उम्मीदवारों के नाम शामिल थे। पटना स्थित शेखपुरा हाउस परिसर में टिकट वितरण को लेकर कई दावेदारों ने नाराजगी जताई और विरोध प्रदर्शन किया। विशेषकर चंपारण से आए नेताओं ने नारेबाजी की। पार्टी महासचिव किशोर मुन्ना ने इसे स्वाभाविक बताते हुए कहा कि पार्टी उनसे बात कर उनकी नाराजगी दूर करेगी।
AIMIM में शामिल होने पर क्या बोले जानकार?
मोनाजिर हसन का AIMIM में शामिल होने की ख़ास वजह भी चर्चा तेज़ है। सियासी जानकारों की मानें तो मुस्लिम नेतृत्व और खुद की सियासी ज़मीन मज़बूत करने के लिए मोनाज़िर हसन ने एक सुरक्षित क़दम उठाया है। मुस्लिम समुदाय के लिए प्रभावी नेतृत्व की तलाश में हैं। AIMIM विशेषकर असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई में समुदाय के अधिकारों की रक्षा और उत्थान के लिए काम कर रही है।
राजनीतिक असंतोष और नई दिशा की तलाश
जेडीयू और JSP से जुड़ने के बावजूद संतोषजनक परिणाम न मिलने पर हसन ने AIMIM को एक नई दिशा के रूप में देखा। AIMIM की सीमांचल में मजबूत उपस्थिति के साथ, हसन पार्टी की स्थिति और मजबूत कर सकते हैं। मुस्लिम राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने का समीकरण बन सकता है।
मुंगेर और सीमांचल में संभावित असर
डॉ. हसन की यह राजनीतिक दिशा परिवर्तन मुंगेर और आसपास के क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकता है। जन सुराज को इससे नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि AIMIM मुस्लिम वोट बैंक में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है। डॉ. मोनाजिर हसन का JSP छोड़कर AIMIM में जाना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो मुस्लिम वोट और सीमांचल क्षेत्र की राजनीतिक गहनता को प्रभावित करेगा।












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