बिहार की धरती में कई जगह दफ़न है सोना, निकलते ही बदल जाएगी प्रदेश की तस्वीर

बिहार में पर्यटन और उद्योग जगत को बढ़ावा देने के साथ ही अब राज्य सरकार सोना, क्रोमियम और पोटैशियम खनिज ब्लॉकों के खनन पर ज़ोर दे रही है। प्रदेश की धरती में सोना के साथ-साथ कई ऐसे खनिज पदार्थ दफ़न हैं।

पटना, 9 जुलाई 2022। बिहार में पर्यटन और उद्योग जगत को बढ़ावा देने के साथ ही अब राज्य सरकार सोना, क्रोमियम और पोटैशियम खनिज ब्लॉकों के खनन पर ज़ोर दे रही है। प्रदेश की धरती में सोना के साथ-साथ कई ऐसे खनिज पदार्थ दफ़न हैं, जिसके निकलते ही बिहार की तस्वीर बदल जाएगी। इसके मद्देनज़र प्रदेश सरकार ब्लू प्रिंट तैयार कर रही है। खनिज ब्लॉकों के खनन की टेंडर के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जल्द ही बिहार सरकार टेंडर ओपेन करने वाली है।

बदल जाएगी बिहार की तस्वीर

बदल जाएगी बिहार की तस्वीर

खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि औरंगाबाद, जमुई, नवादा के अलावा बिहार के कई जिलों में सोना, निकल, क्रोमियम और पोटाश के बड़े पैमाने पर भंडार मिले हैं। भंडार के खनन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। इन जगहों पर पोटाश (3 ब्लॉक) और क्रोमियम निकल (एक ब्लॉक) पाया गया है। जनक राम ने कहा कि इन सबके अलावा जमुई (सोनो प्रखंड) में सोना और क्रोमियम के भंडार औरंगाबाद में मिले हैं।

बिहार को सौंपा गया चार खनिज ब्लॉक

बिहार को सौंपा गया चार खनिज ब्लॉक

केंद्रीय खान मंत्रालय ने हाल ही में बिहार को चार खनिज ब्लॉक सौंपा है। ग़ौरतलब है कि इन ब्लॉकों में क्रोमियम और पोटैशियम है जो कि रोहतास, सासाराम, गया और औरंगाबाद में मौजूद है। आपको बता दें कि पिछले दिनों प्रह्लाद जोशी (केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री) ने जनक राम (खान एवं भूतत्व मंत्री, बिहार) को खनिज सर्वे के दस्तावेज सौंपे थे। केन्द्र ने उस दौरान 14 राज्यों को विभिन्न खनिजों के 100 ब्लॉक सौंपे थे। इसके साथ ही ब्लॉकों की नीलामी जल्द से जल्द कराने का आग्रह भी किया था।

तीन पोटैशियम और एक क्रोमियम के ब्लॉक

तीन पोटैशियम और एक क्रोमियम के ब्लॉक

बिहार के खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश को तीन पोटैशियम और एक क्रोमियम का ब्लॉक दिया गया है। इन ब्लॉकों में 10 वर्ग किलोमीटर का नड़वाडीह ब्लॉक (सासाराम-रोहतास), 8 वर्ग किलोमीटर में टीपा खनिज ब्लॉक और सात वर्ग किलोमीटर का शाहपुर ब्लॉक का नाम शामिल है। पोटौशियम के ये तीनों ब्लॉक हैं। इन ब्लॉकों के अलावा गया और औरंगाबाद में क्रोमियम का आठ वर्ग किलोमीटर का ब्लॉक हैं। बिहार को इसका पूरा फ़ायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि क्रोमियम का इस्तेमाल एविएशन और मोबाइल में होता है।

मार्च में हुआ माइन्स एंड मिनरल एक्ट में संशोधन

मार्च में हुआ माइन्स एंड मिनरल एक्ट में संशोधन

मंत्री जनक राम ने कहा कि प्रदेश सरकार ब्लॉक से जुड़े सभी पहलुओं पर पूरी जानकारी लेने के बाद जल्द से जल्द इनकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू करेगी। माइन्स एंड मिनरल (डेवलेपमेंट एंड रेग्युलेशन) एक्ट में मार्च में संशोधन किया गया। अभी तक खनन सर्वेक्षण के चार स्तरों में से जी-4 स्तर का सर्वेक्षण सरकारी एजेंसियों के ज़रिए होता था, या फिर पीएसयू ही सर्वेक्षण कर सकते थे। संशोधन के बाद पहली बार शुरुआती सर्वेक्षण स्तर (जी-4 स्तर) पर खनिज ब्लॉक की नीलामी की इजाज़त मिली है। बिहार को निश्चित रूप से इसका फ़ायदा होगा।

निकल और क्रोमियम की ख़ासियत

निकल और क्रोमियम की ख़ासियत

क्रोमियम क्या है इसके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते हैं, लेकिन आपको इसकी जानकारी होनी चाहिए कु आखिर इन खनिज ब्लॉकों से क्या फ़ायदा है। क्रोमियम सिल्वर सफेद रंग की धातु जिसमें आसमानी नीले रंग की हल्की झलक होती है। यह धातु बहुत ही सख्त और ज़ंग रोधी है, जानकारों की मानें तो इसका इस्तेमाल स्टील को कठोर करने, स्टेनलेस स्टील बनाने, कवच, बॉल-बेयरिंग, तिजोरी, कटिंग टूल्स में किया जाता है। वहीं एविएश और मोबाइल बनाने में भी होता है। निकल भी एक एक श्वेत-चांदी रंग की धातु है और यह भी ज़ंगरोधी होता है। लोहे और दूसरे धातु को ज़ंग से बचाने के लिए निकल की परत चढ़ाई जाती है। इसके आलावा चुम्बक उद्योग और स्टील को जंगरोधी बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

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