शहीद के परिवार ने लौटाया 5 लाख का चेक, कहा इससे होगा अपमान

पटना। छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए बिहार के लाल का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव जमालपुर पहुंचा जहां उसके अंतिम दर्शन करने के लिए हजारों लोग मौजूद थे। शहीद जवान अजय यादव का शव जैसे ही सिकंदरपुर नए गांव पहुंचा वहां मौजूद लोगों ने फूलों से सजे वाहन पर तिरंगा में लिपटे शहीद अजय यादव की लाश को देखने के बाद गगनभेदी नारे लगाने लगे।'जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा'। शहीद की पत्नी सुप्रिया पति की लाश देखते ही बेहोश हो गई और परिवार के लोग जोर-जोर से रोने लगे। वहां उपस्थित सभी लोग शहीद के परिवार वालों को चुप कराने का काम कर रहे थे।

जिला अधिकारी को लौटाया चेक

जिला अधिकारी को लौटाया चेक

शहीद को अंतिम संस्कार के लिए लाल दरवाजा स्थित श्मशान घाट ले जाया गया जहां राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार हुआ। अंतिम संस्कार के वक्त भी लोगों की आंखों में आंसू नहीं रुक रहे थे। 5 वर्षीय मासूम अपने पिता को मुखाग्नि दे रहा था? दूसरी तरफ जिला अधिकारी के द्वारा दिए गए 5 लाख का चेक शहीद के परिवार वालों ने लौटा दिया और कहा कि ऐसा पैसा लेने से शहीद का अपमान होगा।

गांव में मायूसी का माहौल

गांव में मायूसी का माहौल

आपको बताते चलें कि छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में शहीद होने वाले जमालपुर के नया गांव सिकंदरपुर के लाल अजय कुमार यादव पूरे गांव में काफी लोकप्रिय थे और गांव के लोगों को उनसे काफी उम्मीदें थी। जैसे ही नक्सली हमले में उनकी शहादत की खबर मिली, पूरे गांव में मायूसी का माहौल कायम हो गया। एक तरफ जहां परिवार में चीख-पुकार मच गई तो दूसरी तरफ गांव वाले गमहीन हो गए।

गांव में लगे गगनभेदी नारे

गांव में लगे गगनभेदी नारे

सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोगों ने आंसू बहाते हुए शहीद को विदा किया तथा भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा, अजय तेरा नाम रहेगा के नारे गूंजते रहे। आपको बताते चलें कि जमालपुर वासियों में देशभक्ति का जज्बा काफी देखने को मिलता है क्योंकि यहां पर सैकड़ों युवा देश की सेवा के लिए सेना में कार्यरत हैं।

पिता ने बिलखते हुए बताया

पिता ने बिलखते हुए बताया

बिलखते हुए शहीद के पिता सूरज यादव ने कहा कि होली के बाद 10 मार्च को ही वह जमालपुर हावड़ा सुपर एक्सप्रेस से ड्यूटी ज्वाइन करने गया था और ड्यूटी ज्वाइन करने जाने वक्त पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए कहा था कि बहुत जल्द फिर आएंगे। हमें यह पता नहीं था कि यह हमारी उसकी आखिरी मुलाकात है। हमें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है कि वह मातृभूमि की रक्षा के लिए शहीद हुआ है।

जिलाधिकारी के समझाने पर भी नहीं लिया चेक

जिलाधिकारी के समझाने पर भी नहीं लिया चेक

जब जिला अधिकारी उदय कुमार सिंह ने सरकार की ओर से बतौर सहायता राशि के रूप में 5 लाख का चेक दिया तो शहीद अजय के बड़े भाई सदानंद यादव अचानक भड़क उठे। भाई ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं या किसी प्राकृतिक आपदा में मृतकों के परिजनों को सरकार यह राशि सौंपती है। देश के लिए शहीद होने वालों के शहादत को राशि में तौलना अपमान है हम यह चेक नहीं लेंगे। जिलाधिकारी ने समझाते हुए कहा कि फिलहाल इसे स्वीकार कर लें और अन्य मदद के लिए सरकार को पत्र लिखा जाएगा पर परिवार वाले चेक लेने के लिए तैयार नहीं हुए।

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