Saharsa: ‘परिवार से मिलने नहीं, पैतृक ज़मीन के लिए आया’, दिल्ली से लौटे 'झा' की गांव के बरामदे में थमी सांसें!
Saharsa News: सहरसा ज़िले का नवहट्टा इलाका मंगलवार की रात अचानक गोलियों की गूंज से कांप उठा। नगर पंचायत नवहट्टा के गोड़पारा गांव में जमीन सर्वेक्षण को लेकर उठे विवाद ने ऐसा खूनी रूप लिया कि छोटे भाई ने बड़े भाई को सरेआम गोली मार दी। देर शाम नवहट्टा बस स्टैंड क्लोजर बांध रोड किनारे हुई इस वारदात ने पूरे इलाके में सन्नाटा फैला दिया।
दिल्ली से लौटा और मौत से टकराया
मृतक महेश्वर झा, जो परिवार के साथ दिल्ली में रहता था, अपने पुश्तैनी जमीन के सर्वेक्षण के लिए तीन दिन पहले गांव आया था। चश्मदीदों के मुताबिक, मंगलवार शाम वह बाजार और बस स्टैंड घूमने के बाद घर लौटा। इसी बीच छोटे भाई मणि झा से किसी बात पर तेज बहस हुई और पल भर में गोलियों की आवाज़ गूंज गई। महेश्वर झा ज़मीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही दम तोड़ दिया।

पुलिस के सामने खामोश गांव
हत्या की सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ आलोक कुमार अपनी टीम के साथ पहुंचे। घर के बरामदे और बेड के पास से दो खोखा बरामद हुए, लेकिन स्थानीय लोग किसी ने कुछ नहीं देखा-या फिर डर के कारण बोलने को तैयार नहीं। हत्या के बाद आरोपी मणि झा और उसके परिवार के लोग रातों-रात फरार हो गए। मृतक का परिवार दिल्ली में रहता है, महेश्वर अकेले ही गांव आया था।
पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है, लेकिन ग्रामीणों की चुप्पी और पारिवारिक रंजिश ने जांच को रहस्यमयी बना दिया है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा कौन-सा राज़ था जिसने छोटे भाई को खून करने पर मजबूर कर दिया?
न्याय की पुकार: सिहौल चौक पर मां-बाप का आमरण अनशन
इसी जिले से दूसरी दर्दनाक खबर सामने आई है। सिहौल चौक पर मंगलवार को एक मां-बाप ने अपने बेटे की हत्या के विरोध में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया। संजय कुमार सिंह और उनकी पत्नी नीतू कुमारी का आरोप है कि 12 जून 2025 को हटिया गाछी में उनके पुत्र की हत्या कर दी गई, लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
उनका कहना है कि एसआईटी का गठन हुआ, मगर अब तक न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई, न ही पूछताछ। बार-बार सिर्फ आश्वासन मिलने से उनका भरोसा टूट गया है। नीतू कुमारी की आंखों में आंसू थे, उन्होंने कहा-"हमारा घर वीरान हो गया है, अब जीवन का कोई अर्थ नहीं बचा। जब तक दोषियों को पकड़कर सख्त सजा नहीं दी जाती, हम भूख की आग में जलते रहेंगे।"
खामोश सहरसा में गूंजते सवाल
सहरसा के ये दो मामले-एक ताज़ा और एक पुराना-जिले में कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
क्या महेश्वर झा की हत्या सिर्फ जमीन विवाद का नतीजा है, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है?
आखिर तीन महीने पुराने हटिया गाछी हत्या कांड में पुलिस अब तक क्यों नाकाम है?
कब तक ग्रामीण डर के साए में चुप रहेंगे और अपराधी खुलेआम घूमते रहेंगे?
रात के सन्नाटे में गोलियों की गूंज और दिन के उजाले में न्याय की पुकार-सहरसा आज इन दोनों के बीच झूल रहा है। लोग सिर्फ यही पूछ रहे हैं: "आखिर इंसाफ कब मिलेगा?"












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