Bihar chunav: महागठबंधन में भूचाल, 10 सीटों पर RJD-कांग्रेस-VIP ने एक दूसरे के खिलाफ उतारा उम्मीदवार
Bihar chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रणभेरी बज चुकी है, और जहाँ एक ओर एनडीए ने अपना सीट बंटवारा लगभग सुलझा लिया है, वहीं विपक्षी महागठबंधन (Mahagathbandhan) के अंदर सीट तालमेल (Seat Sharing) का पेंच अभी भी फंसा हुआ है। समय कम है और गतिरोध गहराता जा रहा है, जिसका सीधा प्रमाण यह है कि गठबंधन के सहयोगी दलों (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल, वीआईपी) ने ही 10 सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक दी है।
इस आंतरिक टकराव को भले ही 'फ्रेंडली फाइट' (Friendly Fight) का नाम दिया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि यह स्थिति महागठबंधन की एकजुटता (Unity) के लिए एक गंभीर चुनौती है। औपचारिक घोषणा का इंतजार किए बिना प्रत्याशियों का मैदान में उतरना स्पष्ट संकेत देता है कि गठबंधन के भीतर विश्वास और समन्वय की भारी कमी है, जिसका सीधा फायदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिल सकता है।

कुटुंबा (Kutumba)
यह सीट महागठबंधन के आंतरिक संघर्ष का सबसे बड़ा उदाहरण है। यहाँ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम मैदान में हैं, लेकिन आरजेडी ने भी अपने वरिष्ठ नेता सुरेश पासवान को उतारकर सीधे अपने सहयोगी को चुनौती दे दी है। इस हाई-प्रोफाइल टकराव से वोटों के बँटवारे की आशंका है, जिससे गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लालगंज (Lalganj)
लालगंज में आरजेडी की शिवानी शुक्ला (मुन्ना शुक्ला की बेटी) के सामने कांग्रेस के आदित्य कुमार राजा खड़े हैं। दोनों दलों के प्रमुख उम्मीदवारों का आमने-सामने होना यह दर्शाता है कि सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई। यह मुकाबला एनडीए के लिए जीत का रास्ता खोल सकता है।
वैशाली (Vaishali)
वैशाली सीट पर आरजेडी के अजय कुशवाहा को कांग्रेस के संजीव कुमार से सीधी चुनौती मिल रही है। यह सीधा टकराव आरजेडी और कांग्रेस के बीच जमीनी वर्चस्व की लड़ाई को दिखाता है। तालमेल की कमी से महागठबंधन का वोट बैंक विभाजित होने का खतरा है।
बछवाड़ा (Bachhwara)
बेगूसराय की इस सीट पर वाम दल (सीपीआई) और कांग्रेस के बीच कड़ा संघर्ष है। सीपीआई के अवधेश राय के खिलाफ कांग्रेस के गरीब दास ताल ठोक रहे हैं। वाम दलों को दी गई सीटों पर कांग्रेस का दावा जताना दर्शाता है कि गठबंधन में आंतरिक सम्मान और समझौता अभी दूर की कौड़ी है।
गौरा बौराम (Gaura Bauram)
इस सीट पर आरजेडी के अफजल अली के सामने वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के भाई संतोष सहनी (वीआईपी) मैदान में हैं। मुकेश सहनी के भाई को उतारना यह संकेत देता है कि वीआईपी को आवंटित सीटों पर आरजेडी अपनी दावेदारी छोड़ने को तैयार नहीं है, जिससे गठबंधन में तनाव बढ़ गया है।
तारापुर (Tarapur)
तारापुर में आरजेडी से अरुण शाह और वीआईपी से सकलदेव बिंद दोनों उम्मीदवार हैं। उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (एनडीए) के सामने महागठबंधन के दो दावेदारों का होना विपक्ष की जीत की संभावनाओं को कम करता है। यह वीआईपी और आरजेडी के बीच सीट को लेकर चल रही खींचतान का परिणाम है।
कहलगांव (Kahalgaon)
कहलगांव, जो कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ रहा है, वहाँ इस बार आरजेडी के रजनीश यादव और कांग्रेस के प्रवीण कुशवाहा आमने-सामने हैं। इस सीट पर कांग्रेस का दावा मजबूत होने के बावजूद आरजेडी द्वारा प्रत्याशी उतारना, दोनों बड़े सहयोगियों के बीच विश्वास की कमी को उजागर करता है।
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राजापाकड़ (Rajapakar)
इस सुरक्षित सीट पर सीपीआई के मोहित पासवान के सामने कांग्रेस की प्रतिमा दास खड़ी हैं। सीपीआई द्वारा पहले उम्मीदवार घोषित करने के बावजूद कांग्रेस का प्रत्याशी उतारना वाम दलों और कांग्रेस के बीच के क्षेत्रीय दावों पर सहमति न बन पाने का स्पष्ट संकेत है।
रोसड़ा (Rosera)
रोसड़ा सुरक्षित सीट पर भी सीपीआई के लक्ष्मण पासवान और कांग्रेस के बीके रवि के बीच मुकाबला है। सीपीआई की आवंटित सीटों पर कांग्रेस की लगातार दावेदारी फ्रेंडली फाइट की संख्या बढ़ा रही है, जो अंततः एनडीए के पक्ष में जा सकती है।
बिहार शरीफ (Bihar Sharif)
नालंदा जिले की इस सीट पर सीपीआई के दीप प्रकाश के विरुद्ध कांग्रेस के उमर खान ने नामांकन किया है। मुख्यमंत्री के गृह जिले में गठबंधन के सहयोगियों का आपस में लड़ना दिखाता है कि शीर्ष नेतृत्व स्थानीय स्तर पर तालमेल बिठाने में विफल रहा है।
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