Lok Sabha Chunav: लवली आनंद के खिलाफ़ कृष्णैया की पत्नी को चुनाव लड़ाएंगे अमिताभ दास
Lok Sabha Election: बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद ये चर्चा तेज़ हो गई है कि आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद एनडीए की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ सकती है। इसी क्रम में पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने लवली आनंद के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है।
वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत करते हुए पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने कहा कि चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान कर देगा तो, मैं खुद पटना से हैदराबाद जाऊंगा। हम लोगों ने यह प्लान बनाया है कि लवली आनंद जहां से चुनाव लड़ेंगी, उनके खिलाफ़ उम्मीदवार उतारेंगे।

वैशाली या औरंगाबाद से लवली आनंद के चुनाव लड़ने की चर्चा तेज़ है। उनके ख़िलाफ़ हम लोग शहीद कृष्णैया की पत्नी उमा देवी को बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। आपको बता दें कि 1994 में कृष्णैया की हत्या हुई थी।
कृष्णैया उस वक्त गोपालगंज के डीएम हुआ करते थे। मुजफ्फरपुर में छुट्टन शुक्ला की शव यात्रा निकली थी। शव यात्रा का नेतृत्व आनंद मोहन कर रहा था, आनंद मोहन के कहने पर ही कृष्णैया की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
पटना हाईकोर्ट ने आनंद मोहन को फांसी की सज़ा सुनाई, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रक़ैद में बदल दिया। आनंद मोहन कई साल जेल में रहा, इसके बाद नीतीश कुमार को लगा कि अगर आनंद मोहन को वक्त से पहले जेल से छुड़ा दिया जाए तो राजपूत वोटबैंक में सेंधमारी हो सकती है।
बिहार के जेल मैन्युअल में पिछले साल अप्रैल में बदलाव कर दिया गया और आनंद मोहन का जेल से बाहर निकाल दिया गया। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में कृष्णैया की पत्नी ने चुनौती दी है। आगामी 27 तारीख को इस पर आखिरी सुनवाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने आनंद मोहन के पासपोर्ट ज़ब्त करने के साथ ही पुलिस स्टेशन में हाज़िर लगाने के भी आदेश आदेश दे दिए हैं। यह पूरी संभावना है कि होली से पहले आनंद मोहन को तिहाड़ जेल जाना पड़ेगा। इधर के समीकरण की बात करें तो 12 तारीख को नीतीश कुमार का फ्लोर टेस्ट था।
विश्वास मत के दिन राजद विधायाक चेतन आनंद (लवली आनंद और आनंद मोहन के बेटे) और नीतीश कुमार के बीच यह सौदा पक्का हो गया कि समर्थन के बदले जदयू लवली आनंद को लोकसभा टिकट देगी। वैशाली या फिर औरंगाबाद से लवली आनंद चुनाव लड़ सकती हैं।
इन दोनों लोकसभा सीटों पर राजपूत मतदाताओं की तादाद ज्यादा है, इसलिए वह इन्हीं में से किसी एक सीट से चुनावी ताल ठोकेंगी। इसलिए बतौर निर्दलीय प्रत्याशी शहीद कृष्णैया की पत्नी को उनके खिलाफ चुनाव लड़वाने का फ़ैसला लिया है।
एक तरह से सिविल सोसाइटी की तरफ़ से उन्हें चुनावी मैदान में उतारा जाएगा। इसके पीछे मकसद यह है कि शहीद कृष्णैया की पत्नी के ज़रिए पीएम मोदी और नीतीश कुमार को बेनकाब करना। एक तरफ पीएम मोदी राम राज की बात करते हैं, दूसरी तरफ़ एनडीए की तरफ़ से खूनी की पत्नी चुनाव लड़ती है।
क्या यही राम राज है? नीतीश कुमार को बेनक़ाब किया जाएगा कि एक तरफ़ सुशासन की ढोल बजाते हैं, दूसरी तरफ़ अपराधी की पत्नी को चुनाव ल़ड़वाते हैं। देशवासियों को यह संदेश जाएगा कि बिहार के सारे लोग गुंडे मवाली नहीं है। यहां भी अच्छे और ईमानदार लोग रहते हैं। बिहार में भी शहीद कृष्णैया का सम्मान है।












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