Bihar News: ठनका से बचाएगा लॉकेट, सेटेलाइट की मदद से डिवाइस करेगा काम, जानिए क्या है पूरा मामला?
Bihar News: मौत तो हर इंसान को आनी है, इसे कोई झुठला नहीं सकता है, लेकिन वक्त से पहले किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो यह बहुत तकलीफ़देह हो जाता है। इंसान मौत से जीत तो नहीं सकता लेकिन किसी अनहोनी से मौत हो, उससे बचा ज़रूर जा सकता है।
ठनका से भी हर साल लोगों के मौत की ख़बर पढ़ने को मिलते रहती है। इसी से बचाव के लिए कई IIT पटना और बिहार आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर काम कर रहा है। बिहार आपदा प्रबंधन विभाग और IIT पटना साथ मिलकर एक प्रोजेक्ट पर काम करते हुए लॉकेट का निर्माण कर रहे हैं।

इस लॉकेट के पहनने से वज्रपात से प्रभाव से निजात मिल सकेगा। इसके साथ ही अन्य प्राकृतिक आपदाओं से भी हिफ़ाज़त हो सकेगी। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (लॉकेट) के निर्माण के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पटना के साथ बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हाथ मिलाया है।
सेटेलाइट के ज़रिए चलने वाले इस डिवाइस सरकार की तरफ़ से मंज़ूरी मिल गई है। डॉ उदय कांत मिश्र (उपाध्यक्ष, बिहार राज्य प्राधिकरण) के साथ अन्य अधिकारियों ने डिवाइस का टेस्ट देखा, जिसे आईआईटी पटना के प्रोफेसर राजीव कुमार (आईटी विभाग) और उनकी टीम ने रिप्रेजेंट किया।
IIT पटना और बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के साथ एक एमओयू साइन किया गया। IIT पटना ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अभी 10 हजार पीस बनाने जा रही है। यह डिवाइस सेटेलाइट से जुड़े होने के साथ आपदा प्रबंधन के सर्वर से भी कनेक्ट रहेगा।
आपको बता दें कि इस डिवाइस को पहने हुए इंसान को आपादा के संकेत मिलेंगे। सकेंत मिलने के साथ वह व्यक्ति अपने आप को महफूज़ जगह पर जाकर सुरक्षित कर सकेगा। पायलट प्रोजेक्ट में कायाबी मिलने के बाद बड़े स्तर पर डिवाइस निर्माण कार्य शुरू किया जाएग।
IIT पटना के एक्सपर्ट BSDMA की पहल इंसान के पहनने लायक थर्मो इलेक्ट्रिक डिवाइस का निर्माण करेंगे, जिसे पहनने के साथ आपदाओं के प्रभाव पर लगाम लगाया जा सकेगा। लॉकेट (पेंडेंट) के आकार का डिवाइस आने वाले वक्त में वज्रपात की घटनाओं से लोगों की जान बचाने में मील का पत्शर साबित हो सकता है।












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