Bihar: क्या ओवैसी सीमांचल में अब भी मजबूत हैं या खिसक गया है वोट बैंक, जानें वर्तमान स्थिति?
Owaisi Bihar Visit: ओवैसी सीमांचल के कई इलाकों में पदयात्रा करेंगे और पूर्णिया के बैसी, अमौर और किशनगंज के कुछ हिस्सों का दौरा करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य सीमांचल में अन्याय से संबंधित मुद्दों को उठाना है।

Owaisi In Kishanganj: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) बिहार के मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर शुक्रवार को किशनगंज पहुंचे। वह यहां 18 और 19 मार्च को 'सीमांचल अधिकार पदयात्रा' में भाग लेंगे। इसके अलावा वह बलरामपुर, बैसी, अमौर, कोचधामन, किशनगंज और बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। यहां वह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के खिलाफ भी जमकर गरजेंगे। यानी कहा जाए तो वह अपने क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों की वर्तमान स्थिति का जायजा लेंगे। वह जानने की कोशिश करेंगे की क्षेत्र के मुस्लिम वोटरों का मूड 2020 जैसा ही है या पूरी तरह से बदल गया है?
चलिए जानते हैं राजद की सरकार में वापसी के बाद क्या ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पकड़ 2020 जैसी ही मजबूत है या उनके वोट बैंक में सेंधमारी हो गई है? चलिए विस्तार से समझते हैं वर्तमान स्थिति को...
आरजेडी-जेडीयू के गठबंधन के बाद वोट बैंक पर क्या हुआ असर
आरजेडी-जेडीयू के गठबंधन के बाद नीतीश और लालू के मुस्लिम समर्थक मतदाता एकजुट हो गए हैं। जिससे ये मतदाता अब तेजस्वी और नीतीश के पक्ष में होकर मतदान करेंगे। दूसरी बात आरजेडी अब राज्य में मजबूत सरकार होने की दुहाई देकर मुस्लिम वोटरों के लिए कई योजनाओं का ऐलान करेगी जिससे वोटर्स पर जरूर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
तेजस्वी को 2025 का चेहरा बताकर ओवैसी के मुस्लिम वोटरों में सेंधमारी
दरअसल, तेजस्वी को अभी से ही 2025 में मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है जिससे आरजेडी के एम-वाई समीकरण को और बल मिलने की संभावना है। इतना ही नहीं महागठबंधन ने पिछले 25 फरवरी को पूर्णिया में एक रैली कर मुस्लिम वोटरों के बीच बड़ा संदेश देने की कोशिश की थी। महागठबंधन की रणनीति को भेदना इस बार ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।
ओवैसी के चार विधायकों के टूटने से घटा वोटरों का भरोसा
बता दें कि पिछले साल जून में ओवैसी के चार मुस्लिम विधायक शाहनवाज, इजहार, अंजार नाइयनी और सैयद रुकनुद्दीन ने राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया था। इसके बाद कई कार्यकर्ता भी राजद में शामिल हो गए थे। इससे ओवैसी के वोटरों में भरोसा भी कम हुआ।












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