बिहार: दिहाड़ी मज़दूर को आयकर विभाग ने थमाया क़रीब 38 लाख का नोटिस, सदमे में पूरा परिवार
मघौना गांव के निवासी गिरिश यादव पेशे से एक मज़दूर हैं। मजदूरी के ज़रिए ही वह खुदके परिवार का जीवनयापन कर रहे हैं। इनकम टैक्स विभाग का नोटिस मिलने के बाद गिरिश यादव और उनक परिवार सदमे मे है।
खगड़िया, 22 अगस्त 2022। बिहार के खगड़िया जिला से आयकर विभाग के नोटिस का अजीबो गरीब मामला सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग की तरफ़ से मघौना गांव (अलौली प्रखंड) के रहने वाले एक मज़दूर को 37.50 लाख रुपये भुगतान का नोटिस मिला है। मज़दूर और उसका पूरा परिवार आयकर विभाग की लाखों रुपये के भुगतान का नोटिस देखने के बाद से सदमे मे है। मज़दूर का कहना है कि वह किसी तरह मज़दूरी कर 500 रुपये कमाता है। इतने लाख रुपये भुगतान करने का नोटिस आया है मैं कैसे भुगतान कर पाऊंगा। आयकर विभाग ने पूरी तरह से गलत नोटिस भेजा है। इस पूरे मामले में मज़दूर ने प्रसाशन से मदद की गुहार लगाई है।

IT विभाग ने दिया 37.50 लाख के भुगतान का नोटिस
मघौना गांव के निवासी गिरिश यादव पेशे से एक मज़दूर हैं। मजदूरी के ज़रिए ही वह खुदके परिवार का जीवनयापन कर रहे हैं। इनकम टैक्स विभाग का नोटिस मिलने के बाद गिरिश यादव और उनक परिवार सदमे मे है। मिली जानकारी के मुताबिक नोटिस में गिरिश यादव 37.50 लाख रुपये का टैक्स भुगतान करना है। ग़ौरतलब है कि नोटिस के मुताबिक गिरिश यादव के नाम पर पाली (राजस्थान) में एक कंपनी भी रजिस्टर्ड है। ग़ौरतलब है कि गिरिश यादव को उसके नाम से जारी पैन कार्ड के खिलाफ नोटिस मिला है।

पीड़ित ने लगाई प्रशासन से मदद की गुहार
गिरीश यादव का इस मामले में कहना है कि वह कभी राजस्थान ही नहीं गए हैं तो उनके नाम से कंपनी रजिस्टर्ड है कैसे हो गई। इस बाबत स्थानीय थाने में गिरिश यादव की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। वहीं अलौली थानाध्यक्ष पुरेंद्र कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि गिरिश यादव की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। गिरीश यादव की तरफ़ से दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह मामला धोखाधड़ी का लग रहा है।

मामले की जांच में जुटी पुलिस
पुरेंद्र कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता को उसके नाम से जारी पैन नंबर के खिलाफ ही आयकर विभाग की तरफ़ से नोटिस मिला है। उन्होंने कहा कि पीड़ित गिरिश ने बताया कि वह दिल्ली में मज़दूरी का काम करता है। कई लोगों के घरों में भी काम करता था। दिल्ली में काम करने के दौरान ही उसने एक दलाल को पैन कार्ड बनाने दिया था। लेकिन उसके बाद वह दलाल कभी मिला ही नहीं। वहीं थानाध्यक्ष ने कहा कि पुलिस सारे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। इस पूरे मामले का जल्द ही खुलासा कर दिया जाएगा।
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