Kanhaiya Kumar: किस जाति से हैं कन्हैया कुमार? कितने पढ़े-लिखे, बेगूसराय का लड़का कैसे बना देश का युवा नेता
Bihar Election 2025 (Kanhaiya Kumar): राजनीति का खेल हमेशा से जाति और धर्म के इर्द-गिर्द ही घूमता आया है। चाहे सत्ता की गिनती हो या चुनावी रणनीति, हर बार यही सवाल उठता है कि किस जाति का झुकाव किस ओर रहेगा और कौन-सा समाज किस पार्टी को फायदा पहुंचाएगा। खासकर बिहार जैसे राज्यों में यह समीकरण और भी पेचीदा हो जाते हैं, जहां हर विधानसभा सीट पर जातीय संतुलन ही तय करता है कि किसका पलड़ा भारी रहेगा।
इसी पृष्ठभूमि को समझने के लिए वनइंडिया हिंदी लेकर आया है एक खास सीरिज - "जाति की पाति"। इसमें हम उन नेताओं की कहानी खोलेंगे, जिनकी जाति, सामाजिक पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उनके राजनीतिक सफर की दिशा तय की। इस कड़ी में आज बात करेंगे कांग्रेस के युवा चेहरे और बेगूसराय से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) की, जिनकी कहानी उतनी ही रोचक है जितनी बहसें वे छेड़ते हैं।

किस जाति से आते हैं कन्हैया कुमार? (Kanhaiya Kumar caste)
बिहार की ऊंची जातियों में गिनी जाने वाली भूमिहार जाति से कन्हैया कुमार आते हैं। भूमिहारों को 'भूमिहार ब्राह्मण' भी कहा जाता है। यह जाति बिहार की कुल आबादी में करीब 2.87% है। बेगूसराय, मुंगेर, नवादा, आरा, बक्सर और पटना के आसपास के इलाकों में भूमिहारों की अच्छी-खासी मौजूदगी है। राजनीतिक तौर पर भूमिहार वोट अक्सर एनडीए की ओर झुके रहते हैं, लेकिन कन्हैया कुमार जैसे नेता ने इस जाति को वामपंथ और कांग्रेस से भी जोड़ने की कोशिश की है।
बिहार चुनाव 2025 में भूमिहार वोट किस ओर झुकेगा, इस पर सियासत गरमा गई है। 2005 के बाद से यह जाति ज्यादातर एनडीए के साथ दिखी है, खासकर बीजेपी और जेडीयू को मजबूत आधार देती रही है। हालांकि हाल के वर्षों में भूमिहार वोटों का बंटवारा अलग-अलग दलों में भी होने लगा है। राज्यभर में फैली इस जाति की राजनीतिक दुश्मनी भी इलाकों के हिसाब से बदलती रही है-मुंगेर, बेगूसराय और नावादा में यादव-कोइरी से, जबकि आरा-बक्सर में राजपूतों से। मिथिलांचल में कुछ सीटों पर ब्राह्मणों से भी टकराव रहा है।

बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि (Kanhaiya Kumar Biography)
कन्हैया कुमार का जन्म जनवरी 1987 में बेगूसराय जिले के बिहट गांव में हुआ। उनका गांव 'तेघरा' विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो लंबे समय तक CPI का गढ़ रहा है।
उनके पिता जयशंकर सिंह बीमार और लकवाग्रस्त रहे, जबकि मां मीना देवी एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। परिवार आमदनी के मामले में बहुत साधारण रहा, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक सोच से हमेशा प्रभावित रहा। यही वजह है कि कन्हैया बचपन से ही वामपंथी विचारधारा से जुड़े माहौल में पले-बढ़े।
कन्हैया कुमार पढ़ाई-लिखाई और शुरुआती दौर
कन्हैया की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्कूल में हुई। 2002 में उन्होंने हाई स्कूल की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की। इसके बाद पटना के राम रतन सिंह कॉलेज, मोकामा से इंटरमीडिएट किया।
2007 में उन्होंने कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस, पटना से भूगोल (Geography) में ग्रेजुएशन किया और फर्स्ट क्लास हासिल की।
इसके बाद उन्होंने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र (Sociology) में मास्टर्स किया। यहां भी उन्होंने फर्स्ट क्लास पाई।
2011 में उन्होंने जेएनयू (JNU) की एंट्रेंस परीक्षा में टॉप किया और अफ्रीकी अध्ययन (African Studies) में पीएचडी शुरू की। उनका शोध विषय था - "द प्रोसेस ऑफ डीकोलोनाइजेशन एंड सोशल ट्रांसफॉर्मेशन इन साउथ अफ्रीका (1994-2015)"।

JNU से मिली राष्ट्रीय पहचान
कन्हैया कुमार की असली पहचान बनी JNU कैंपस में। 2015 में वे JNU छात्र संघ (JNUSU) के अध्यक्ष बने। यही वह दौर था जब कन्हैया देशभर की सुर्खियों में आ गए।
2016 में उन्हें देशद्रोह के एक मामले में गिरफ्तार किया गया। JNU कैंपस में हुई नारेबाजी को लेकर उस वक्त काफी विवाद हुआ और कन्हैया का नाम हर घर में चर्चा का हिस्सा बन गया। इसके बाद उन्हें बेल मिली और उनकी राजनीतिक पहचान एक "विद्रोही छात्र नेता" के रूप में बन गई।

वामपंथ से कांग्रेस तक का सफर
कन्हैया ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत अखिल भारतीय छात्र महासंघ (AISF) से की, जो CPI का छात्र संगठन है। बाद में वह CPI की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में भी शामिल हुए।
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बेगूसराय से CPI के टिकट पर चुनाव लड़ा। उनके सामने बीजेपी के दिग्गज नेता गिरीराज सिंह थे। चुनावी जंग काफी हाईलाइट हुई, लेकिन कन्हैया को हार का सामना करना पड़ा।
28 सितंबर 2021 को कन्हैया कुमार ने CPI छोड़कर कांग्रेस जॉइन कर ली। कांग्रेस ने उन्हें NSUI का AICC प्रभारी बनाया। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले ही कांग्रेस ने उन्हें बिहार प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपकर एक बड़ा दांव खेला है।
पढ़ाई-लिखाई ने बनाया 'इंटेलेक्चुअल' नेता
कन्हैया सिर्फ जाति की वजह से नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई और विचारधारा की वजह से भी चर्चित हैं। JNU में उनके भाषणों ने उन्हें एक "इंटेलेक्चुअल पॉलिटिकल आइकन" बना दिया। वे अक्सर भगत सिंह, अंबेडकर और गांधी जैसे नेताओं को अपना प्रेरणा स्रोत बताते हैं।
उनकी किताब "Bihar to Tihar: My Political Journey" भी खूब चर्चा में रही, जिसमें उन्होंने अपने बचपन से लेकर JNU विवाद तक की पूरी कहानी बताई है।
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