'बिहार के सरकारी स्कूलों में सिर्फ 20 प्रतिशत छात्र जाते हैं', अर्थशास्त्री का बड़ा दावा
विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा है कि बिहार में स्कूली शिक्षा आपातकाल जैसी स्थिति में है। ज्यां द्रेज ने एक सर्वेक्षण के आधार पर दावा किया कि बिहार के सरकारी प्राथमिक (मिडिल) स्कूल और हाई स्कूलों में सिर्फ 20 प्रतिशत छात्र ही कक्षाओं में हिस्सा लेते हैं।
अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने दावा किया, ''शिक्षक नहीं हैं, शिक्षा की गुणवत्ता खराब है, बुनियादी ढांचा निराशाजनक है। मिड डे मील में मिलने वाला भोजन की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म और किताबें सही से नहीं मिल पा रही है।''

अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने पटना में एक सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि बच्चे कहां हैं स्कूलों में। जन जागरण शक्ति संगठन (जेजेएसएस) द्वारा आयोजित एक सर्वेक्षण के दौरान अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने बिहार के कई स्कूलों का दौरा किया है।
टेलीग्राफ के मुताबिक अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और जेजेएसएस सचिव आशीष रंजन ने स्कूली शिक्षा प्रणाली की स्थिति और कोरोना के बाद की स्थिति का आकलन के लिए इस साल की शुरुआत में बिहार के अररिया और कटिहार जिलों में 81 मिडिल और हाई स्कूलों में आयोजित सर्वेक्षण का मार्गदर्शन किया है।
ज्यां द्रेज ने कहा, ''सर्वेक्षण के दिन स्कूलों में नामांकित छात्रों में से लगभग 20 प्रतिशत ही उपस्थित थे। यह शायद दुनिया में सबसे कम है। यह बहुत बड़ा संकट है। यह सिर्फ अररिया और कटिहार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार का ये सच है।''
ज्यां द्रेज ने अफसोस जताया कि राज्य सरकार की ओर से स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए कोई चर्चा, जांच या कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को शिक्षा में सुधार करने की जरूरत है क्योंकि शिक्षा विकास, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, सामाजिक उत्थान और लोकतंत्र की कुंजी है।












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