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बिहार: यहां बना देश का सबसे बड़ा रबड़ डैम,पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा, जानिए क्या है धार्मिक मान्यता ?

बरिश के मौसम में फल्गु नदी की सतह में पानी होता है, इसके अलावा अन्य दिनों में सूखा ही रहता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि माता सीता से गया में बहने वाली फल्गु नदी श्रापित है। ग़ौरतलब है कि मान्यताओं के मुताबिक...

गया, 6 सितंबर 2022। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद से सियासी समीकरण तो बदले ही, इसके बाद तेज़ी से विकास कार्यों को भी अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया गया है। देश का सबसे बड़ा रबड़ डैम गया के फल्गु नदी बनकर तैयार हो गया है। विष्णुपद मंदिर के पास 411 मीटर लंबे इस डैम का निर्माण किया गया है। बिहार के मुख्यमंत्री धार्मिक नगरी गया में पितृपक्ष मेले की शुरुआत से एक दिन पहले ही डैम का उद्घाटन करेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 8 सितंबर को डैम का उद्घाटन करेंगे।

फल्गु नदी पर हुआ डैम का निर्माण

फल्गु नदी पर हुआ डैम का निर्माण

बरिश के मौसम में फल्गु नदी की सतह में पानी होता है, इसके अलावा अन्य दिनों में सूखा ही रहता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि माता सीता से गया में बहने वाली फल्गु नदी श्रापित है। ग़ौरतलब है कि मान्यताओं के मुताबिक पिंडदान के बाद तर्पण के लिए इसी नदी का पानी ही जरूरी होता है। पानी नहीं होने की वजह से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसी के मद्देनज़र फल्गु नदी पर रबर डैम का निर्माण हुआ है। रबड़ डैम के निर्माण के बाद पूरे साल नदी की सतह पर पानी रहेगा। पिंडदान के लिए आए लोगों को पानी नहीं होने की समस्या से निजात मिलेगी।

धार्मिक महत्व के मद्देनज़र डैम का निर्माण

धार्मिक महत्व के मद्देनज़र डैम का निर्माण

अजय सिंह ( कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग) की मानें तो फल्गु नदी में दूसरी बरसाती नदियों के मुकाबले पानी जल्दी सूख जाता है। दूसरी नदियों में पानी का ठहराव काफी वक़्त तक होता है, वहीं फल्गु नदी में तेजी से सीपेज होता है। नदी के भीतर पानी रोकने की तकनीक पारंपरिक तरीक़े से बने डैम में नहीं होती है। रबड डैम में पानी रोकने की तकनीक को एक सीमित दूरी तक उपयोग किया जाता है। विष्णुपद के पास धार्मिक महत्व के मद्देनजर पानी की ज़रूरत थी इसलिए यहां रबर डैम का निर्माण किया गया है।

इस भूमि की है धार्मिक मान्यता

इस भूमि की है धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इंसान की मौत के बाद मोक्ष की प्राप्ति के लिए काम श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाता है। यहां की ज़मीन को पिंडदान और तर्पण के लिए पुराणों में सबसे पाक ज़मीन बताया गया है। बुजुर्ग बताते हैं कि पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान श्री राम अपने परिवार के साथ पिता दशरथ के पिंडदान के लिए गया जी तीर्थ में खुद आए थे। राम और लक्ष्मण श्राद्ध का सामान जुटा रहे थे। तभी राजा दशरथ का श्राद्ध कर माता सीता ने दिया था। वहीं यह भी मान्यता है कि दशरथ की चिता की राख उड़ते हुए नदी के पास पहुंच गई थी। इस वक्त सिर्फ माता सीता ही वहां मौजूद थी। तभी श्राद्ध का समय निकल रहा है कि आकाशवाणी हुई थी। आकाशवाणी सुनते है माता सीता ने फल्गु नदी की रेत से पिंड बनाकर पिंडदान कर दिया था।

‘सीता माता द्वारा श्रापित है नदी’

‘सीता माता द्वारा श्रापित है नदी’

सीता माता ने मौजूद फल्गु नदी, तुलसी, अक्षय वट, गाय और एक ब्राह्मण को पिंडदान का साक्षी बनाते हुए पिंडदान कर दिया था। भगवान राम और लक्ष्मण वापस पहुंचे तो माता सीता ने श्राद्ध के बारे में जानकारी देते हुए पिंडदान की बता बताई। पिंडदान के साक्षी को गवाह से जब राम ने पूछा कि पिंडदान हुआ या नहीं। इस दौरान फल्गु नदी ने झूठ बोल दिया कि माता सीता ने कोई पिंडदान नहीं किया। इसी झूठ की वजह से माता सीता ने फल्गु नदी को श्राप दिया था। उसी वक़्त से फल्गु नदी ज़मीन के अंदर से ही बहती आ रही है। गर्मी के दिनों में यहां करीब 4 फीट की खुदाई करने पर पानी निकल जाता है। इसलिए लोगों की मान्यता है कि फल्गु सीता माता द्वारा श्रापित नदी है।

सीपेज रोकने के लिए रबर डैम का इस्तेमाल

सीपेज रोकने के लिए रबर डैम का इस्तेमाल

रबड के डैम की खासियत की बात की जाए तो आईआईटी रुड़की के एक्सपर्ट ने मौक़े का जायजा लेने के बाद डैम का निर्माण किया गया है। अजय सिंह (कार्यपालक अभियंता) की मानें तो योजना के तहत 300 मीटर निम्न प्रवाह में विष्णुपद मंदिर के पास फल्गु नदी के बाएं तट पर 411 मीटर लंबा, 95.5 मीटर चौड़ा और 3 मीटर ऊंचा रबर डैम का बनाया गया है। डैम में नदी के जल प्रवाह को रोककर पानी को जमा किया जाएगा। सीपेज को रोकने के लिए रबर डैम कारगर साबित होगा।

नदी के अंदर 1031 मीटर तक रबर शीट पाइल

नदी के अंदर 1031 मीटर तक रबर शीट पाइल

नदी के अंदर 1031 मीटर की लंबाई में रॉक लेबल तक रबर शीट पाइल किया गया है। इसके साथ ही डायफ्रॉम वाल 300 मीटर में बनाया गया है। बरसात का पानी भी डैम में स्टोर किया जा सकेगा। चूंकि रबर डैम की ऊचाई तीन मीटर रखी गई है, इसलिए तीन मीटर तक ही पानी स्टोर किया जा सकेगा। रबड़ डैम एक बैलून की तरह है, कुछ विशेष परिस्थिति में रबर डैम से पानी छोड़ने का भी इंतज़ाम है। बैलून की हवा निकाल देने से पानी को आसानी से छोड़ा जा सकेगा।

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