Bihar Politics: ‘तांती-ततवा खड़े हो गए हैं,जिन्हें अब तक दबाया’, RCP,PK, Lande के बाद अब एक और राजनीतिक पार्टी
Political Party Of Bihar News: बिहार में चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं राजनीतिक परिदृश्य में नई पार्टियों का उदय हो रहा है। ई. आई.पी. गुप्ता ने शुक्रवार को पटना के गांधी मैदान, पान महारैली में भारतीय इंकलाब पार्टी के गठन की घोषणा की। बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए गुप्ता ने चुनाव लड़ने और बिहार में इतिहास रचने की अपनी मंशा जाहिर की।
बिहार में कई नई राजनीतिक पार्टियां: ग़ौरतलब है कि हाल के महीनों में बिहार में कई नई राजनीतिक पार्टियां उभरी हैं। इनमें प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी शामिल है, जिसकी स्थापना पिछले साल 2 अक्टूबर को हुई थी। इसके अलावा, नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी रहे आरसीपी सिंह ने 'आप सबकी आवाज' नाम से पार्टी शुरू की। पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे ने भी हिंदू सेना नाम से पार्टी शुरू की।

नई राजनीतिक ताकतों का उदय: ई.आई.पी गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समूह अब अपने अधिकारों के लिए उठ खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, "बिहार के लोग उठ खड़े हुए हैं, जिन्हें अब तक दबाया गया था, तांती-ततवा खड़े हो गए हैं।" उन्होंने जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार जैसे नेताओं की पिछली सरकारों की आलोचना की कि उन्होंने इन समुदायों का पूरा समर्थन नहीं किया।
भारतीय इंकलाब पार्टी की घोषणा बिहार में राजनीतिक गतिविधियों की हलचल के बीच हुई है। पिछले आठ महीनों में राज्य में कई पार्टियों का गठन हुआ है। यह प्रवृत्ति राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने के लिए विभिन्न समूहों के बीच बढ़ती इच्छा को दर्शाती है।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की आकांक्षाएं: गुप्ता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछली सरकारें वंचित समुदायों के लिए आरक्षण की रक्षा करने में विफल रही हैं। उन्होंने वचन दिया कि उनकी पार्टी इन अधिकारों को बहाल करने और बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव लाने के लिए लड़ेगी।
चुनाव नजदीक आते ही बिहार की राजनीतिक गतिशीलता में बदलाव के संकेत नई पार्टियों के गठन से मिलते हैं। ये घटनाक्रम समाज के विभिन्न वर्गों से प्रतिनिधित्व की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं, जो राजनीति में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से अपने भविष्य को आकार देने के लिए उत्सुक हैं।
भारतीय इंकलाब पार्टी का उद्देश्य स्थापित राजनीतिक मानदंडों को चुनौती देना और उन लोगों के लिए एक मंच प्रदान करना है जो अनसुना महसूस करते हैं। जैसे-जैसे और भी पार्टियाँ उभर रही हैं, आगामी चुनाव में बिहार के में एक दिलचस्प नज़ारा देखने को मिलेगा।












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