HRMN-99 Apple की गर्म प्रदेशों में भी कर सकते हैं खेती, लाखों का मुनाफा, जानिए किसने किया इजाद?
Apple Farming In Bihar: बिहार के विभिन्न जिलों मे सेब की खेती कर किसान लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।

Apple Farming News: बिहार के नालंदा जिले से ताल्लुक रखने वाले किसान अनिल कुमार ने सेब की खेती शुरू की है। सोहडीह के रहने वाले अनिल ने हरिमन-99 प्रजाति के 400 सेब के पौधे लगाए हैं। कृषि विभाग भी बिहार में सेब की खेती को बढ़ावा देने पर विचार कर रहा है।
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नालंदा जिले में सेब की खेती कामयाब होती हुई नज़र आ रही है, करीब 200 पेड़ में फल आने शुरू हो गए है। जिले में अगर यह प्रोजेक्ट सौ फिसद कामयाब रहा तो हिमाचल और कश्मीर की क्वालिटी वाला सेब बिहार में भी कम दामों में मिल सकेगा।
जैविक फसल के तौर पर सेब उत्पादन की तैयारी की जा रही है। इसके मद्देनज़र किसान जैविक खाद पर्याप्त मात्रा में तैयार कर रहे हैं। किसान अनिल कुमार 06 एकड़ ज़मीन पर ऑर्गेनिक खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। 1 एकड़ ज़मीन में ट्रायल के तौर करीब दो सौ पौधे लगाए गए हैं।
अनिल कुमार ने कहा कि अगर उनका यह प्रयोग कामयाब रहा तो विस्तार से सेब की खेती करेंगे। उद्यानिक फसल की खेती के साथ ही वह अपनी ज़मीन को फार्म हाउस की तरह डेवलप भी कर रहे हैं। उद्यान विभाग की मदद से सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम भी लगाया गया है। वहीं मल्चर लगाकर खर-पतवार की समस्या से निजात पाने की तैयारी चल रही है।
किसान अनिल कुमार ने दो लाख़ रुपए खर्च कर हरिमन-99 सेब के पौधे को हिमाचल प्रदेश से मंगाया है। उन्होंने कहा कि वह काफी वक्त से खेती से जुड़े हुए हैं, ज्यादातर जगहों पर किसान सब्ज़ी की खेती करते आ रहे हैं। कुछ नया करने की सोच के साथ उन्होंने सेब की खेती की तरफ़ रुख किया।
अनिल कुमार ने सोशल मीडिया से हरिमन 99 सेब की जानकारी हासिल की, उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के किसान हरिमन प्रसाद ने ही हरिमन-99 सेब की प्रजाति का इजाद किया। उन्होंने इस खेती का प्रयोग कर कामयाबी हासिल की, उसके बाद उन्होंने गर्म प्रदेशों में भी इसके उपज की जानकारी दी।
हरिमन 99 प्रजाति के सेब का पौध गर्म प्रदेशों में खेती के लिए ही तैयार किया गया है। 45-48 डिग्री तापमान पर भी इस सेब की खेती मुमकिन है। ढाई साल में इस पौधे में फल लगने लग जाते हैं, ग़ौरतलब है कि जून-जुलाई के महीने हरिमन-99 सेब का फल तैयार हो जाता है।
किसान अनिल कुमार ने कहा कि किसी भी फल के उत्पादन के लिए सबसे पहले उसकी खेती से जुड़ी सही जानकारी इकट्ठा करें। जानकारी की कमी होने की वजह से किसान नुकसान होने के डर से नई खेती का रुख नहीं कर पाते हैं। अनिल सेब के साथ-साथ ताइवान व्हाइट और पिंकी प्रजाति के अमरूद, एप्पल बेर और अनार की भी खेती कर रहे हैं।












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