SC-ST के लिए रिजर्व बिहार की 40 सीटों पर कैसा रहा भाजपा का प्रदर्शन? जानिए

पटना-बिहार में बीजेपी का प्रदर्शन इस बार अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए रजर्व सीटों पर भी बेहतरीन रहा है। 2015 में वह जितनी रिजर्व सीटों पर जीती थी इस बार उसकी दोगुनी सीट जीत गई है। बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 40 सीटें इस श्रेणी की हैं। इनमें से 38 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं। अलबत्ता, पार्टी का वोट शेयर इन सीटों पर पिछली बार के मुकाबले कम हुआ है। इसकी वजह ये है कि इस बार भाजपा 2015 की तुलना में काफी कम सीटों पर चुनाव लड़ी है। यही नहीं बीजेपी का रिजर्व सीटों पर ये प्रदर्शन तब हुआ है, जब कुछ सीटों पर इस बार लोजपा ने उसके खिलाफ भी उम्मीदवार उतारे थे। जबकि, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और एलजेपी दोनों ने पिछले चुनाव भी एनडीए में रहकर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। 'हम' इस बार भी एनडीए के साथ है।

How was BJPs performance in 40 reserve seats of Bihar for SC-ST? know

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार की 40 आरक्षित सीटों में से मौजूदा विधानसभा चुनाव में 10 पर कब्जा कर लिया है। 2015 में उसे सिर्फ 5 सीटें मिली थीं। वहीं एनडीए के सहयोगी जदयू को इस बार तीन सीटों का नुकसान हुआ है। उसे 2015 में 11 रिजर्व सीटें मिला था, जबकि मौजूदा चुनाव में वह सिर्फ 8 सीट ही जीत सका है। राजद को इन सीटों पर जोरदार झटका लगा है और पिछली बार के 14 के मुकाबले सिर्फ 9 सीट जीत पाया है। कांग्रेस को भी 2015 में 6 सीटें मिली थीं और इस बार 5 मिली हैं। जबकि, लेफ्ट पार्टियां ने अपना ग्राफ चार गुना बढ़ा लिया है। वह 1 सीट से बढ़कर 4 सीटों तक पहुंच गई है।

बात मुस्लिम बहुल 52 सीटों की करें तो यहां भी भाजपा का प्रदर्शन 2015 के मुकाबले काफी बढ़िया हुआ है। वह 2015 में 11 सीटें यहां जीती थी, जबकि इसबार उसे 15 सीटों पर जीत मिली है। लेकिन, जेडीयू को मुस्लिम बहुल सीटों पर जोर का झटका लगा है, जिससे एनडीए की टैली को काफी नुकसान हुआ है। जदयू ने पिछले चुनाव में राजद और कांग्रेस के साथ तालमेल करके यहां 13 सीटें जीत लिया था, लेकिन इस बार उसे सिर्फ 3 पर सफलता मिली है। आरजेडी को एक सीट का फायदा ही मिला है और वह 17 की जगह 18 सीटें जीता है। कांग्रेस का बदतर प्रदर्शन यहां भी बरकार रहा और वह 3 सीटें गंवा कर सिर्फ 6 पर जीत दर्ज कर सकी है। 2 पर लेफ्ट और 5 पर एआईएमआईएम को कामयाबी मिली है।

इनके अलावा बीजेपी को मिथिलांचल के बड़े हिस्से में भी भारी कामयाबी मिली है। अगर दरभंगा-कोसी-पूर्णिया इलाकों की 67 सीटों की बात करें तो यहां की 44 सीट एनडीए के खाते में गई है। यहां भी भाजपा की सीट दोगुनी से ज्यादा हुई है। पिछले चुनाव में वह सिर्फ 10 जीती थी और इस बार 21 पर कब्जा किया है। जहां तक जदयू की बात है तो उसे नुकसान तो यहां भी हुआ है, लेकिन दूसरे इलाकों की तुलना में कम हुआ है। पार्टी इस बार 21 सीटें जीती है, जबकि 2015 में 27 जीती थी। इनके अलावा एनडीए के बाकी सहयोगियों को जीत मिली है। माना जा रहा है कि दरभंगा में हवाई सेवा की शुरुआत और एम्स के ऐलान के साथ-साथ कोसी पर दशकों पहले टूटे पुल के निर्माण ने इस इलाके में भाजपा और एनडीए की स्थिति काफी मजबूत कर दी है। जबकि, राजद और कांग्रेस को यहां बड़ा झटका लगा है। आरजेडी 18 से 11 और कांग्रेस 10 से 5 पर आ गई है।

इसी तरह तिरहुत-सारण क्षेत्र की 73 सीटों पर भी बीजेपी ने काफी ऊंची छलांग लगाई है। वह 23 से 32 सीटों पर पहुंच गई है। अलबत्ता जदयू की सीटें 13 से घटकर 8 ही रह गई हैं। इस इलाके में महागठबंधन को महज 1 सीट का नुकसान हुआ है।

बिहार विधानसभा चुनाव का एक और आंकड़ा काफी चौंकाने वाला है। 28 अक्टूबर को पहले चरण में जिन 71 सीटों पर चुनाव हुए थे, वहां महागठबंधन राजग से काफी आगे निकल चुका था। लेकिन, दूसरे दौर में बाजी पलटने के साथ ही तीसरे चरण में वह महागठबंधन पर काफी हावी हो गया। पहले दौर में बीजेपी को 12, जदयू को 6, राजद को 31, कांग्रेस को 9 और लेफ्ट को 7 सीटें मिलीं। लेकिन, दूसरे दौर की 94 में से 32 पर बीजेपी, 16 पर जेडीयू और 31 पर आरजेडी जीती। तीसरे चरण की 78 में 30 पर भाजपा, 21 पर जदयू, 13 पर राजद और 6 पर कांग्रेस को जीत मिली।

बीते 10 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे और 29 नवंबर तक नई विधानसभा का गठन किया जाना है। 243 सीटों में 125 सीटे जीतकर एनडीए सरकार बनाने जा रहा है। जबकि महागठबंधन को 110 और अन्य को 8 सीटों पर जीत मिली है।

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