Skill India Mission: ‘स्किल इंडिया’ ज़मीन पर कितना कारगार, युवाओं को फ़ायदा या सिर्फ हो रही खानापूर्ति
Skill India Mission Bihar News: 15 जुलाई 2015 को केंद्र की मोदी सरकार ने विश्व युवा कौशल दिवस के अनुसार स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की गई थी। इस मिशन का मकसद युवाओं को प्रशिक्षित कर रोज़गार देना है। ताकि हिंदुस्तान के बेरोज़गार युवाओं आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
स्किल इंडिया मिशन के तहत समाज के सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को एक साथ लाते हुए हुनरबाज़ बनाना मकसद है। यह भारत की पहली एकीकृत राष्ट्रीय योजना है, जिसके तहत कौशल विकसित कर, बड़े पैमाने पर उद्यमिता को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

स्किल इंडिया मिशन के तहत युवा के प्रतिभाओं को निखार कर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए देश भर में शहर की सड़कों से लेकर गांव की गलियों तक ट्रेनिंग दी जा रही है। विभिन्न क्षेत्रों(जैसे (रियल एस्टेट, निर्माण, कपड़ा, परिवहन, रत्न, बैंकिंग, उद्योग और पर्यटन आदि) में प्रशिक्षित कर युवाओं को रोज़गार दिलाने की पहल हो रही है।
स्किल इंडिया का आपने मक़सद तो समझ लिया, लेकिन यह ज़मीन पर कितना असरदार है। मिशन के तहत शहर से लेकर गांव तक जो ट्रेनिंग दी जा रही है, यह कितनी कामयाब है। वन इंडिया हिंदी की टीम यह जानने के लिए ग्राउंड पर पहुंची।
बेगूसराय के लोगों द्वारा जानकारी मिली कि बरौनी रिफाइनरी के पास महना गेट पर एक बस लगाई गई है, जहां गांव के बच्चों को स्किल इंडिया के तहत ट्रेनिंग दी जा रही है। वन इंडिया की टीम उस बस में गई, जहां बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही थी। ट्रेनिंग देने आए संबंधित कर्मी ने बच्चों को स्किल इंडिया के बारे में समझाया।
बस में बताया गया कि करीब 5 दिनों तक ट्रेनिंग दी जाएगी, इसके बाद बच्चों को सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसके बाद सभी बच्चों से सबसे आधार कार्ड लेकर रजिस्ट्रेशन करवा लिया गया। वन इंडिया की टीम ने फिर अपनी पड़ताल शुरू की, तो उन्होंने बताया कि स्किल इंडिया के तहत वीज़न इंडिया बच्चों को ट्रेनिंग दे रही है।












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