60 गाड़ियों का काफिला, 300 समर्थकों की भीड़, तेजप्रताप के तेवरों से परेशान सोरेन सरकार

लालू यादव को 'फेवर’ करने के आरोपों में घिरी हेमंत सरकार अब तेज प्रताप के तेवर से टेंशन में है। लालू यादव ने तेजप्रताप को समझाने के लिए तलब किया था। तेजप्रताप रांची तो गये लेकिन अपने साथ विवादों का बवंडर भी लेते गये। 'एक लोटा पानी’ पर नसीहत लेने गये तेजप्रताप ने अपने काफिले से झारखंड सरकार को पानी-पानी कर दिया। आरोप है कि तेजप्रताप ने खुलेआम महामारी कानून की धज्जियां उड़ायीं। उनके समर्थकों ने मरीज के परिजनों से धक्कामुक्की की। पुलिस ने सख्ती के बजाय मामले को सलटाने की कोशिश की। क्या हेमंत सरकार ने लालू यादव और तेज प्रताप यादव के सामने घुटने टेक दिये हैं ? क्या सरकार में राजद के साझीदार होने से हेमंत सोरेन लालू यादव और तेजप्रताप के आगे मजबूर हैं ? चूंकि तेजप्रताप के समर्थकों ने अस्पताल आ-जा रहे आमलोगों से बदसलूकी की इसलिए ये मामला तूल पकड़ रहा है। इस घटना से हेमंत सरकार की किरकिरी हो रही है।

समय रहते तेज के काफिले पर क्यों नहीं लिया एक्शन?
तेजप्रताप यादव प्रकरण ने झारखंड भाजपा को एक नया मुद्दा दे दिया है। भाजपा का कहना है कि उसने तेज प्रताप के काफिले का वीडियो पहले ही सार्वजनिक कर सरकार को अगाह कर दिया था। लेकिन हेमंत सरकार कान में तेल डाल कर सोयी रही। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव के मुताबिक, बुधवार की रात करीब ढाई बजे तेज प्रताप के साथ 60 गाड़ियों का काफिला रांची में दाखिल हुआ था। जब रांची में महामारी अधिनयम लागू है तो किसकी इजाजत से इतनी गाड़ियां शहर में दाखिल हो गयीं ? कोरोना गाइडलाइंस तोड़ने पर तेजप्रताप के खिलाफ क्यों नहीं कार्रवाई की गयी ? अगर काफिले की गाड़ियां जब्त कर ली जाती तो रिम्स परिसर के पास अप्रिय घटना नहीं होती। अस्पताल परसिर के पास न इतनी गाड़ियां आती और न जाम लगता। ऐसा लगता है झारखंड सरकार ने अराजकता के सामने सरेंडर कर दिया। भाजपा का दावा है कि तेजप्रताप के साथ करीब 300 लोग रांची आये थे। कोरोना संकट के बीच इतने लोगों का आना क्या सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं है ?

क्या तेजप्रताप शक्ति प्रदर्शन के लिए रांची आये?
अभी तक लालू यादव से मिलने के लिए बिहार से कई नेता रांची आ चुके हैं। लेकिन कोई इतने लाव-लश्कर के साथ मिलने नहीं आता। खुद तेजस्वी आते हैं तो इतनी गाड़ियों का काफिला नहीं होता। लेकिन तेजप्रताप 60 गाड़ियों और 300 लोगों के साथ रांची क्यों पहुंचे ? क्या तेज रघुवंश बाबू के मसले पर तलब किये जाने से खुश नहीं थे ? क्या वे पटना में बैठे राजद के बड़े नेताओं को अपनी ताकत का संदेशा देना चाहते थे ? क्या वे अपने तेवर से यह दिखाना चाहते थे कि उनकी हैसियत किसी बड़े नेता से कम नहीं ? लॉकडाउन में रांची के सभी होटलों को बंद रखने का सख्त आदेश था। जब तेज प्रताप बुधवार की रात करीब ढाई बजे रांची पहुंचे तो स्टेशन रोड के एक होटल को खुलवाया गया। इस होटल को जबरन खुलवाया गया या किसी कहने पर खोला गया, यह तो साफ नहीं है लेकिन तेज प्रताप कानून को तोड़ कर इस होटल में ठहरे। स्थानीय प्रशासन ने जो किया उसमें भी झोल का आरोप है। सीओ के कहने पर होटल मालिक और मैनेजर के खिलाफ तो मामला दर्ज किया गया लेकिन तेजप्रताप पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लालू पर मेहरबान हेमंत !
जिस दिन से झारखंड में हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने हैं उसी दिन से उन पर सजायाफ्ता लालू यादव को सुविधा देने का आरोप लग रहा है। सबसे ताजा मामला 5 अगस्त का है। चारा घोटला मामले सजा काट रहे लालू यादव इलाज के लिए रांची के रिम्स (राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज) में भर्ती हैं। पहले उनका इलाज रिम्स के पेइंग वार्ड में चल रहा था। संक्रमण सुरक्षा के नाम पर झारखंड सरकार ने लालू यादव को रिम्स निदेशक के आलीशान बंगले में शिफ्ट कर दिया। भाजपा का आरोप है कि हेमंत सरकार एक सजायाफ्ता कैदी की खातिरदारी के लिए कुछ भी करने को तैयार है। लालू यादव लिए रसोइय़ा और नौकर-चाकर का भी प्रबंध किया गया है। ऐसा कर के हेमंत सरकार जेल कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है। भाजपा के मुताबिक, अस्पताल के सबसे बड़े अधिकारी के बंगले में एक सजा पाये कैदी को राजकीय मेहमान की तरह रखा गया है। हेमंत सोरेन लालू यादव को खुश करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। लालू यादव के सेवादार के संक्रिमित पाये जाने के बाद सरकार ने पेइंग वार्ड के पूरे फ्लोर को खाली करा दिया था। भाजपा का सवाल है कि क्या सरकार का इतने से मन नहीं भरा कि अब बंगला मुहैया कराया गया है ? कुछ दिनों पहले ही एहतियात के तौर पर लालू यादव के फ्लोर के सभी 19 कमरे खाली कराये गये थे। वहां के रोगियों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। इस पर बहुत बवाल हुआ था। कोरोना का डर सभी रोगियों के लिए है। क्या सभी रोगियों को सरकार लालू यादव की तरह सेफ स्पेश देगी ? भाजपा ने हेमंत सरकार के इस फैसले को पक्षपात बताया था। पहले जेल मैन्युअल के मुताबिक लालू से हफ्ते में एक दिन, सिर्फ तीन लोग ही मिल सकते थे। लेकिन अब ऐसी कोई बंदिश नहीं है।












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