Women Reservation Bill: अति पिछड़ा महासंघ ने बढ़ा सकता है BJP की मुश्किलें, दी ये चेतावनी
BJP Government, Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल को लेकर पूरे देश में सियासत तेज़ है। वहीं बिहार में भी सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इसी क्रम अति पिछड़ा महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश पाल ने कहा कि आगामी चुनाव के मद्देनज़र मोदी सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन बिल' का महिलाओं को तोहफ़ा दिया है। इस बिल से अत्यंत पिछड़ा समुदाय ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
कैलाश पाल ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि गत दिनों विशेष सत्र के दौरान लोक सभा और राज्य सभा से पास हुये महिला आरक्षण बिल को किसी राजनेता ने सामाजिक न्याय का ऐतिहासिक फैसला बताया, तो किसी ने पिछड़ा विरोधी होने की संज्ञा दी।

यह दुर्भाग्य की बात है किसी राजनीतिक पार्टी के किसी राजनेता ने भी उस समाज की हिस्सेदारी की बात नहीं की, जो वास्तव में में आरक्षण के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि अतिपिछड़ा महासंघ इस मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों को ध्यान आकृष्ट करने के लिए 2 अक्टूबर से जिलेवार धरना प्रदर्शन एवं समाजिक सभाऐं आयोजित करेगा ।
अत्यंत पिछड़ा समाज, जिसकी आबादी देश में लगभग 35% प्रतिशत है। लोक सभा और विधान सभा में इनकी भागीदारी महिलाओं से भी कम है। आगे उन्होंने कहा कि अत्यंत पिछड़ा समाज को भागीदारी दिये बिना महिला आरक्षण से अत्यंत पिछड़ा समाज आहात हुआ है और अपने को ठगा महसुस कर रहा है।
इस फैसला से अतिपिछड़ा समाज में राजनीतिक पार्टीयों के प्रति भारी गुस्सा है। इससे पिछड़े समाज की महिलाओं का मोदी सरकार हक छीनने का काम कर रही है, जो हमारे समाज को नामंजूर है। कैलाश पाल ने कहा कि अत्यंत पिछड़ा सामाज को दरकिनार कर लिया गया महिला आरक्षण का फैसला देश की सत्ता में झूठा सामाजिक न्याय होगा।
सच्चा सामाजिक न्याय के लिये समुचे देश में जातीय गणना के माध्यम से अति पिछड़ा वर्ग को चिन्हित करना होगा। "तत्पश्चात् जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी" की तर्ज पर विधान सभा व लोक सभा में आरक्षण देना होगा।












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