Exit Poll 2025: सीवान की सियासत में ‘साहब परिवार’ की वापसी!, रघुनाथपुर में ओसामा शहाब की लहर, राजद को बढ़त
Exit Poll 2025, Raghunathpur Siwan: सीवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट पर इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प और प्रतीकात्मक माना जा रहा है। पूर्व सांसद स्वर्गीय शहाबुद्दीन के पुत्र ओसामा शहाब मैदान में हैं, और एग्जिट पोल के शुरुआती रुझान बता रहे हैं कि जनता इस बार विरासत और बदलाव-दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है। AI Politics और बिहार तक के एग्जिट पोल के अनुसार रघुनाथपुर से राजद प्रत्याशी ओसामा शहाब को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और पुराने नतीजे
रघुनाथपुर सीट पर पिछले तीन चुनावों में सत्ता का समीकरण कई बार बदला है। 2010 के चुनावों में भाजपा उम्मीदवार विक्रम कुंवर ने जीत दर्ज की, 2015 में महागठबंधन (राजद) उम्मीदवार हरिशंकर यादव ने जीत दर्ज की, 2020 में भी राजद की चिकट पर उन्होंने पार्टी का परचम लहराया। इस बार चुनावी मैदान में राजद की टिकट पर ओसामा सहाब ने दांव आज़माया है।

यह सीट सीवान जिले की उन कुछ सीटों में से है जहां मुस्लिम-यादव समीकरण और सवर्ण वोट बैंक दोनों का प्रभाव बराबरी से पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव पुराने जातीय समीकरणों से कहीं आगे जाकर भावनात्मक और स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे पर केंद्रित हो गया है।
एग्जिट पोल में ओसामा शहाब की बढ़त
AI Politics और बिहार तक के एग्जिट पोल के मुताबिक ओसामा शहाब यहां से जीत दर्ज कर सकते हैं। ओसामा के पक्ष में मुस्लिम और यादव मतदाताओं का लगभग पूरा समर्थन एकजुट होता दिख रहा है। साथ ही, दलित और अति पिछड़े वर्ग के बीच भी राजद के पक्ष में झुकाव दर्ज किया गया है। भाजपा का पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक कुछ हद तक उनके साथ बना है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में विकास, बेरोजगारी और स्थानीय असंतोष का असर इस बार दिखाई दे रहा है।
जातीय समीकरण और सामाजिक आधार
रघुनाथपुर विधानसभा में करीब 2.9 लाख मतदाता हैं। इनमें मुस्लिम मतदाता लगभग 17 प्रतिशत, यादव 15 प्रतिशत, राजपूत 13 प्रतिशत, भूमिहार 9 प्रतिशत, कुशवाहा-कोइरी 11 प्रतिशत और दलित व अति पिछड़ा वर्ग लगभग 30 प्रतिशत हैं। इस जातीय मिश्रण में मुस्लिम-यादव एकता राजद के लिए निर्णायक बन सकती है। भाजपा प्रत्याशी को सवर्ण और कुछ पिछड़े वर्गों का समर्थन जरूर है, लेकिन मतदान के दौरान इन वर्गों में एकरूपता की कमी दिखी।
स्थानीय मुद्दे और जनता की भावना
इस चुनाव में विकास से अधिक स्थानीयता और भावनात्मक जुड़ाव बड़ा मुद्दा बन गया है। ओसामा शहाब को उनके पिता शहाबुद्दीन की राजनीतिक विरासत का लाभ तो मिल ही रहा है, परंतु युवा और शिक्षित चेहरा होने की वजह से उन्हें "नई शुरुआत" का प्रतीक भी माना जा रहा है। इलाके में लंबे समय से सड़क, शिक्षा और रोजगार की अनदेखी को लेकर नाराजगी है। जनता का एक बड़ा हिस्सा यह महसूस कर रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में सीवान की राजनीतिक पहचान कमजोर पड़ी है और उसे फिर से मजबूत करने की जरूरत है।
संगठन और रणनीति
राजद की ओर से इस बार बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त किया गया है। ओसामा के पुराने समर्थकों के साथ युवा टीम ने भी सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर असरदार प्रचार किया। भाजपा के पास भी एक सुदृढ़ संगठन है, लेकिन कार्यकर्ताओं में जोश की कमी देखी गई। कई जगह स्थानीय असंतोष और उम्मीदवार चयन को लेकर अंदरूनी मतभेदों की खबरें भी सामने आईं।
क्या है एक्सपर्ट की राय
चुनावी विशेषज्ञों का कहना है कि रघुनाथपुर की लड़ाई "भावना बनाम प्रबंधन" की हो चुकी है। ओसामा शहाब जनता के दिलों में शहाबुद्दीन की यादों और अपनी नई पहचान दोनों के सहारे जगह बना रहे हैं, जबकि भाजपा ने कानून-व्यवस्था और विकास की उपलब्धियों को उभारने की कोशिश की है। एग्जिट पोल के रुझान बताते हैं कि फिलहाल हवा ओसामा के पक्ष में है और अगर यही रुझान परिणाम में बदलते हैं, तो सीवान जिले में राजद की वापसी की मजबूत शुरुआत मानी जाएगी।
सीवान की सियासत में शहाबुद्दीन परिवार की पुनः वापसी
रघुनाथपुर का यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि सीवान की सियासत में शहाबुद्दीन परिवार की पुनः वापसी का प्रतीक बन चुका है। जनता ओसामा शहाब को एक ऐसे नेता के रूप में देख रही है जो अतीत की विरासत के साथ भविष्य की दिशा भी तय कर सकता है। एग्जिट पोल का संदेश साफ है - रघुनाथपुर की हवा बदल चुकी है, और इस बार यह हवा "विरासत और बदलाव" दोनों के संग चल रही है।












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