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काउंटिंग में धांधली के तेजस्वी यादव के दावों को EC ने खारिज किया, एक सीट पर दोबारा हुई पोस्टल बैलेट की गिनती

पटना- बिहार चुनाव में वोटों की गिनती के दौरान धांधली के तेजस्वी यादव के आरोपों को चुनावों आयोग ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि एक सीट पर दोबारा गिनती की मांग राजद उम्मीदवार ने की थी, जिसे पूरा किया गया और सभी प्रक्रिया सही पाई गई। गौरतलब है कि चुनाव नतीजे आने के दो दिन बाद गुरुवार को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि वोटों की गिनती के दौरान आयोग ने जिन पोस्टल बैलेट को अमान्य घोषित कर दिया था, उसी में महागठबंधन की जीत और हार का अंतर छिपा है। लेकन, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से साफ होता है कि सिर्फ नालंदा जिले की हिलसा विधानसभा सीट पर जीतने वाले उम्मीदवार और पराजित उम्मीदवार के बीच हार का अंतर ही अमान्य ठहराए गए पोस्टल बैलेट की संख्या से कम था। लेकिन, चुनाव आयोग को उनके दोबारा गिनती के बाद भी वही नतीजे मिले जो पहले मिले थे।

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    बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एचआर श्रीनिवास ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि सिर्फ हिलसा विधानसभा क्षेत्र में अमान्य पोस्टल बैलेटों की संख्या जीत और हार के अंतर से ज्यादा था। वहां पर राजद प्रत्याशी के अनुरोध पर सभी पोस्टल बैलेटों की दोबारा गिनती की गई (अमान्य पोस्टल बैलेट समेत) और सबकुछ सही पाया गया। इस सीट पर आरजेडी के अतरी मुनी उर्फ शक्ति सिंह यादव जेडीयू के कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया से 12 वोटों से चुनाव हार गए थे। यहां कुल 551 पोस्टल आए थे, जिनमें से 182 को अमान्य पाया गया था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि, 'पिछड़ने वाले उम्मीदवार ने ईवीएम वोटों के साथ-साथ पोस्टल बैलेट की भी दोबारा गिनती को कहा। रिटर्निंग ऑफिसर ने पहली मांग को इसलिए खारिज कर दिया, क्योंकि ईवीएम रिजल्ट के दौरान काउंटिंग एजेंट मौजूद थे और वह प्रक्रिया से संतुष्ट लगे। उम्मीदवार की संतुष्टि के लिए रिटर्निंग ऑफिसर ने अमान्य पोस्टर बैलेट समेत सभी 551 पोस्टर बैलेट की दोबारा गिनती की इजाजत दी। नतीजा नहीं बदला।'

    तेजस्वी यादव ने गुरुवार को सवाल उठाया था कि चुनाव आयोग ने बहुत सारे पोस्टल बैलेट को अमान्य क्यों घोषित किया। उन्होंने दावा किया कि यह बिना किसी अधिकार के किया गया है, खासकर जहां महागठबंधन के उम्मीदवार बहुत कम अंतर से हारे हैं। चुनाव आयोग ने 243 सीटों के जो आंकड़े साझा किए हैं, उसमें सिर्फ 11 सीटों पर जीत-हार का अंतर 1,000 से कम वोटों का रहा है। ये सीटें हैं- हिलसा (12 वोट), बरबीघा (113 वोट), रामगढ़ (189 वोट), मटिहानी (333 वोट), भोरे (462 वोट), डेहरी (464 वोट), बछवाड़ा (484 वोट), चकाई (581 वोट), कुढ़नी (712 वोट), बखरी (777 वोट) और परबत्ता (951 वोट)। इनमें चार सीटें जेडीयू, तीन आरजेडी और एक-एक सीटें भाजपा, सीपीआई, लोजपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई है। यही नहीं सिर्फ 2 सीटें ही ऐसी हैं, जहां राजद के उम्मीदवार 1,000 से कम वोटों से हारे हैं।

    सीईओ के मुताबिक कम मार्जिन वाली बाकी 10 सीटों के उम्मीदवारों ने भी दोबारा काउंटिंग की मांग की थी, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसरों ने इसलिए उनकी मांग खारिज कर दी, क्योंकि जीत का अंतर अमान्य ठहराए गए पोस्टल बैलेट से ज्यादा था। उन्होंने कहा कि हर मामले में रिटर्निंग ऑफिसर ने बहुत ही सोच-समझकर आदेश दिए हैं। जीतने वाले उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट देने में देरी के तेजस्वी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा है कि 'जब ईवीएम की गिनती खत्म हो जाती है, पांच पोलिंग स्टेशनों को रैंडमली चुनकर उनके वीवीपैट स्लिप से ईवीएम के वोटों का मिलान किया जाता है। वीवीपैट स्लिप की गिनती बड़ा कठिन काम है और इसमें समय लगता है। ....कुछ मामलों में जब कंट्रोल यूनिट परिणाम नहीं दिखाता या जब पोलिंग ऑफिसर मॉक पोल मिटाना भूल जाता है तो भी वीवीपैट स्लिप मिलाई जाती है। इसलिए उम्मीदवारों को लगता है कि ईवीएम की गिनती पूरी हो चुकी है, लेकिन असल परिणाम तब तक घोषित नहीं किया जा सकता जबतक की वीवीपैट स्लिप का मिलान ना कर लिया जाए और सभी पोलिंग स्टेशनों के आंकड़ों को चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में न डाल दिया जाए। जीतने वाले उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट देने में देरी के यही कारण हैं।'

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