बिहार में भ्रष्टाचार के लिए इस्तेमाल किया गया 'डस्टबिन', फिर करोड़ों का घोटाला सामने
हाल-फिलहाल बिहार में सामने आया सृजन घोटाला, शौचालय घोटाला का मामला अभी तक पूरी तरह सुलझा नहीं कि बिहार में एक और घोटाला 'डस्टबिन घोटाला' सामने आ गया है।
पटना। घोटालेबाजों का अखाड़ा बन चुके बिहार में ऐसे-ऐसे घोटाले सामने आए हैं जिसने मौजूदा सरकार की नींद उड़ा कर रख दी है। एक के बाद एक घोटाले को लेकर एक तरफ जहां विपक्ष निशाना साधने में लगा हुआ है तो दूसरी तरफ राज्य सरकार मामले की जांच करा रही है। फिर भी घोटालें रुकने के नाम नहीं ले रहे हैं। हाल-फिलहाल बिहार में सामने आया सृजन घोटाला, शौचालय घोटाला का मामला अभी तक पूरी तरह सुलझा नहीं कि बिहार में एक और घोटाला 'डस्टबिन घोटाला' सामने आ गया है। इस घोटाले में जिला अधिकारी महेंद्र कुमार ने पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को मामले की जांच का आदेश दिया है और इस घोटाले को करीब 6 करोड़ 90 लाख रुपए का बताया है। जानकारी के मुताबिक बिहार के सिवान जिले में डस्टबिन की खरीद में करीब 6 करोड़ 90 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। इस मामले की जांच जिला अधिकारी महेंद्र कुमार ने पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर को सौंपी है।

प्रशासन ने मांगी हैं फाइलें
इस घोटाले के साथ-साथ राजेंद्र उद्यान के सुंदरीकरण में भी कुछ घोटाला सामने आया है। इसकी भी जांच शुरू हुई है। जांच को लेकर पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को लेटर लिखते हुए संबंधित फाइलों को उपलब्ध कराने के लिए कहा है। वहीं नगर परिषद के पूर्व पार्षद इंतेखाब अहमद ने इस घोटाले की जांच के लिए निगरानी विभाग के सचिव को भी पत्र भेजा है।

जानिए क्या है पूरा मामला?
अधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक 240 लीटर के टू-व्हीलर सिंटेक्स डस्टबिन की खरीद के लिए गत वर्ष 13 फरवरी को अखबारों में निविदा का प्रकाशन कराया गया। नियम विरुद्ध 10 दिन की बजाए सात दिन में ही निविदा डलवा दी गई। इसी दिन आनन-फानन में साधारण बैठक के दौरान किसी दूसरे प्रस्ताव के साथ इसे भी घुसा दिया गया। जबकि इसके लिए अलग एजेंडा होना चाहिए था। खरीदी से पहले ना तो संख्या तय की गई और ना ही डस्टबिन लगाना तय किया गया। फिर 22 फरवरी को ठेकेदार के द्वारा निविदा खोला गया और रुक-रुककर 9 करोड़ 35 लाख रुपए के डस्टबिन की खरीद कर ली गई। जबकि इस निविदा को जिला क्रय समिति के समक्ष खोलना चाहिए था।

ये हुआ है घोटाला
सिंटेक्स की वेबसाइट पर जीबीआरडब्ल्यू 240 ग्रीन ब्ल्यू का अधिकतम बिक्री मूल्य 7415 रुपए था। थोक में खरीदने पर 25 से 30 फीसद कम पर मिलना चाहिए था। इस हिसाब से खरीदने पर प्रति पीस 11 हजार 285 रुपए की बचत होती। प्रति पीस 18 हजार रुपे में खरीद की गई। पांच हजार डस्टबिन खरीदने में इस लिहाज से पांच लाख 64 लाख 25 हजार रुपए की क्षति पहुंचाई गई। इसी क्रम में वाराणसी के एक थोक विक्रेता से कोटेशन लिया गया तो उसने इसी का रेट 4900 रुपए बताया। यदि यहां से खरीद की गई होती तो 6 करोड़ 90 लाख रुपए की बचत होती है। ये सब खरीदने की बात तो ठीक लेकिन जब नगर परिषद के अधिकारी से डस्टबिन कहां-कहां स्थापित किए गए हैं, इसकी सूची मांगी गई तो उन्होंने देने से इनकार करते हुए कहा कि दो हजार से ज्यादा पीस की खरीदी नहीं हुई है जबकी भुगतान 5 हजार का किया गया है।
वहीं जब नगर परिषद सिवान के कार्यपालक पदाधिकारी बसंत कुमार से इस मामले पर बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि ये मामला मेरे पदभार ग्रहण करने से पहले का है पथ प्रमंडल के कार्यपालक पदाधिकारी का पत्र मिला है, उन्होंने घोटाले से संबंधित कागजात की मांग की है। मैंने उनसे कहा है कि वो स्वयं नगर परिषद के कार्यालय में आकर सारी फाइल देख लें।












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