बिहार के लाल ने किया कनाडा में कमाल, इस अविष्कार के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुआ सम्मानित
डॉक्टर सुदीप के आविष्कार से मरीजों और उनके परिजनों को पैथोलॉजी के खर्च में काफी निजात मिलेगी। बायोमेडिकल सेंसर फोटोनिक चिप की तरह है और एटीएम कार्ड की तरह छोटे आकार में उपलब्ध हो पाएगा।
पटना, 30 जुलाई 2022। बिहार की धरती प्रतिभाओं की धनी है. यहां पर जन्में लाल अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश से लेकर देश तक का नाम रोशन कर रहे हैं। पटना के कंकड़बाग इलाके में से ताल्लुक रखने वाले डॉक्टर सुदीप शेखर ने अपने अविष्कार से पूरे विश्व में देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने बायोमेडिकल सेंसर का आविष्कार किया है जिसके लिए उन्हें कनाडा में वैश्विक शिमेट साइंस पॉलीमैथ्स अवार्ड 2022 से नवाज़ा गया है। आपको बता दें कि उनके इस अविष्कार से मरीजों को पैथोलॉजी जांच में मोटी रकम खर्च करने से राहत मिलेगी।

स्मार्ट फोन से चिप को जोड़कर देख सकेंगे रिपोर्ट
डॉक्टर सुदीप के आविष्कार से मरीजों और उनके परिजनों को पैथोलॉजी के खर्च में काफी निजात मिलेगी। बायोमेडिकल सेंसर फोटोनिक चिप की तरह है और एटीएम कार्ड की तरह छोटे आकार में उपलब्ध हो पाएगा। इसके ज़रिए खून, मूत्र और लार की मदद से शुगर, हृदय रोग, वायरल इन्फेक्शन सहित कई बीमारियों की जांच कुछ ही मिनटों में हो पाएगी। ग़ौरतलब है कि स्मार्ट फोन से चिप को जोड़कर जांच रिपोर्ट भी देखा जा सकेगा। डॉ. शेखर बायोसेंसर को बहुत ही छोटा और डिस्पोजेबल बनाने की योजना बना रहे हैं। ताकि इसको आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

गांव में ही मिलेगी चिकित्सीय जांच की सुविधा
डॉक्टर सुदीप शेखर की मानें तो यह सस्ती होने के साथ ट्रस्टेड बायोमेडिकल टेस्टिंग में कामयाब रहेगी। उत्तम क्वालिटी की चिकित्सा व्यवस्था को इस आविष्कार सस्ता बनाया जा सकेगा। इसके अलावा दूर दराज़ इलाकों में जहां चिकित्सा व्यवस्था की कमी है, वहां भी इसे पहुंचाने में काफी आसानी होगी। सस्ता होने की वजह से बायोसेंसर हर मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल सकेगी। ग़रीब मरीज़ों और उनके परिजनों को पैथोलॉजी जांच सहित कई अन्य जांचों के लिए अपने इलाके से दूर जाने की ज़रूरत नहीं होगी। वह अपने गांव ग्राम में ही कम पैसे में जांच करवा सकेंगे।

कंकड़बाग में रहता है डॉक्टर सुदीप का परिवार
डॉक्टर सुदीप शेखर इस अवॉर्ड को पाने वाले भारतीय मूल के पहले कनाडाई नागरिक हैं। उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले रखी है और कनाडा में ही रहते हैं। डॉक्टर सुदीप सेखर के पिता प्रो. सुनील कुमार सिन्हा और परिवार अभी भी कंकड़बाग स्थित मकान में रहते हैं। ब्रिटिश कोलंबिया यूनिविर्सिटी में इलेक्ट्रिकल एवं कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर सुदीप काम कर रहे हैं।

पटना से ही हुई है डॉक्टर सुदीप की शुरुआती पढ़ाई
डॉक्टर सुदीप शेखर की शुरुआती पढ़ाई पटना से ही हुई है। 12वीं के बाद उन्होंने आईआईटी परीक्षा काफी अच्छे नंबरों से क्रैक किया था। 2003 में आईआईटी खड़गपुर से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अमेरिका में आगे की पढ़ाई की। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से 2005 से 2008 के बीच पीएचडी मुकम्मल किया। रिसर्च साइंटिस्ट के तौर हिल्सबोरो ओरेगन इंटेल कॉर्पोरेशन में सर्किट अनुसंधान प्रयोगशाला में 2008 से 2013 तक काम किया। ईसीई डिपार्टमेंट 2013 में ज्वाइन किया।

हर साल रिसर्च के लिए मिलेंगे करीब 20 करोड़ रुपये
डॉक्टर सुदीप शेखर को वैश्विक शिमेट साइंस पॉलीमैथ्स अवार्ड 2022 मिलने के बाद पांच साल तक हर साल लगभग 20 करोड़ रुपये रिसर्च कार्य के लिए मिलते रहेंगे। आपको बता दें कि डॉक्टर सुदीप शेखर को यंग एलुमनी एचीवर अवार्ड समेत कई और अवार्डों से नवाज़ा जा चुका है।
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