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Samrat Choudhary: बिहार के नए गृह मंत्री कितने पढ़े-लिखे? सम्राट चौधरी की किस डिग्री को लेकर हुआ था विवाद?

Samrat Choudhary Education: बिहार की बदलती राजनीति में एक नाम लगातार सुर्खियों में है। यह नाम है बिहार के नए डिप्टी सीएम का, जिसने अपनी तेज रणनीति, आक्रामक अंदाज़ और दल बदलने के बाद भी लगातार बढ़ते कद की वजह से नए राजनीतिक समीकरण खड़े कर दिए हैं। कभी आरजेडी के युवा चेहरे के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले और आज बिहार के उपमुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले सम्राट चौधरी का सफर किसी साधारण नेता जैसा नहीं रहा।

परबत्ता की जीत से लेकर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के सबसे भरोसेमंद ओबीसी चेहरे बनने तक, उन्होंने हर मोड़ पर अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है। उनकी तेज़ बयानबाजी, चुनावी रणनीति और संगठन में पकड़ ने उन्हें उन नेताओं में शामिल कर दिया है। जिनके बिना बिहार की राजनीति अधूरी मानी जा रही है। यही वजह है कि आज उनका हर कदम राजनीतिक हलकों में चर्चा और भविष्य की राजनीति के संकेत पैदा कर देता है।

Samrat Choudhary Education

NDA की नई सरकार का गठन हो चुका है और एक बार फिर सम्राट चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। इस बार उपमुख्यमंत्री के पद के साथ साथ उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। अब सम्राट चौधरी बिहार के नए गृह मंत्री बन गए हैं।

कितने पढ़े-लिखे हैं सम्राट चौधरी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सम्राट चौधरी ने स्नातक तक की पढ़ाई बिहार में ही पूरी की। चुनावी हलफनामे के अनुसार बाद में उन्हें एक मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी दी गई। ये उनके सार्वजनिक जीवन और सामाजिक कार्यों को देखते हुए प्रदान की गई थी। अपने हलफनामे में उन्होंने अपनी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता Doctor of Litt (मानद), PFC कामराज विश्वविद्यालय से प्राप्त बताई है।

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राजनीतिक परिवार से आने के कारण उनका ध्यान जल्दी राजनीति की ओर चला गया, लेकिन शिक्षा ने उनके प्रशासनिक और संगठनात्मक काम को समझने में मजबूती दी। उनकी पत्नी भी पेशे से वकील हैं, जिससे पारिवारिक माहौल में भी अध्ययन और विधिक समझ का प्रभाव देखा जा सकता है।

कम उम्र में सम्राट चौधरी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1990 के दशक में की। पिता शकुनी चौधरी खुद भी एक जाने-माने नेता रहे हैं। इसी कारण उन्हें शुरुआती दौर में बड़ा अवसर मिला और वर्ष 1999 में मात्र 27 साल की उम्र में वे राबड़ी देवी सरकार में कृषि राज्य मंत्री बन गए। उस समय उनकी कम उम्र को लेकर पूरे देश में चर्चा हुई थी।

2000 में पहली बड़ी जीत

साल 2000 में वह परबत्ता सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। यह जीत उनके राजनीतिक करियर का मजबूत आधार साबित हुई। 2010 में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की और विपक्ष के मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी मिली। यह पद उनकी कार्यशैली और संगठनात्मक क्षमता को दिखाता है।

2014 में करियर ने लिया बड़ा मोड़

आरजेडी छोड़कर 2014 में सम्राट चौधरी ने बीजेपी जॉइन की। पार्टी में आते ही उन्हें शहरी विकास और आवास विभाग का मंत्री बनाया गया। 2021 में वह पंचायती राज मंत्री बने और गांवों में शासन व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया।

बीजेपी का ओबीसी चेहरा बने

मार्च 2023 में बीजेपी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया। पार्टी चाहती थी कि सम्राट चौधरी को कुशवाहा/कोइरी समुदाय के सबसे बड़े नेता के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यह पद मिलने के बाद वह सीधे बिहार बीजेपी की शीर्ष टीम में शामिल हो गए। जनवरी 2024 में उन्हें बीजेपी विधायक दल का नेता भी घोषित किया गया, जिससे साफ था कि पार्टी उन्हें भविष्य की राजनीति में बड़े रोल के लिए तैयार कर रही है।

उपमुख्यमंत्री बनकर सत्ता के केंद्र में

2024-25 के विधानसभा चुनावों में एनडीए की जोरदार जीत के बाद सम्राट चौधरी को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। यह फैसला सिर्फ राजनीतिक संतुलन नहीं था, बल्कि बीजेपी की ओबीसी राजनीति की बड़ी रणनीति भी थी। अब 2025 में एक बार फिर NDA की सरकार बनने के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

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