विपक्ष को मज़बूत करने में जुटे CM नीतीश, तेजस्वी क्यों रह रहे दूर, क्या आगामी चुनाव से पहले बदलेगी तस्वीर?
Bihar Political Gossip: बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात की, इस दौरान राहुल गांधी मौजूद रहे लेकिन डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ग़ैर हाज़िर थे। इसके बाद से ही तेजस्वी की द

Bihar CM Nitish Kumar आगामी चुनाव के मद्देनज़र विपक्ष को एकजुट करने की कवायद तेज़ कर चुके हैं। इसी क्रम में विभिन्न प्रदेशों का दौरा भी कर रहे हैं। बीते सोमवार को सीएम नीतीश कुमार ने कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात की थी।
नीतीश कुमार के साथ हुई मुलाक़ात में राहुल गांधी तो मौजूद रहे, लेकिन तेजस्वी यादव गैर हाज़िर थे। सीएम नीतीश कुमार के साथ हुई बैठक से तेजस्वी यादव के नदारद रहने पर सियासी समीकरण बदलने के आसार पर चर्चा शुरू हो गई है।
सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी एकता को मज़बूत करने की मुहिम चला रहे हैं। वहीं उनकी बैठक से उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव दूरी बनाने लगे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी की कांग्रेस से नाराज़गी ख़त्म नहीं हुई है।
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रविवार को दिल्ली के सीएम केजरीवाल से हुई मुलाक़ात के दौरान नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी भी मौजूद थे। सोमवार को कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठक में तेजस्वी यादव तबीयत का हवाला देते हुए गैर हाज़िर रहे। इस मामले में यह चर्चा हो रही है कि स्वास्थ्य कारण था, या कुछ और ही वजह है।
कांग्रेस नेताओं से तेजस्वी यादव की दूरी को लेकर चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने 70 सीटें दबाव बनाकर ले लिया और सिर्फ 19 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई। इस वजह से ही प्रदेश में तेजस्वी की सरकार नहीं बन पाई थी।
बिहार में हुए उपचुनाव के दौरान कांग्रेस से तेजस्वी की नाराज़गी देखने को मिली थी। कुढ़नी, मोकामा, गोपालगंज और तारापुर, कुशेश्वर स्थान में राजद ने बिना कांग्रेस से मशवरा किए ही उम्मीदवार उतार दिए थे। महागठबंधन के नियमों को ताक पर रख कर ये फैसला लिया गया था। वहीं नई सरकार में (राजद-जदयु) में कांग्रेस ने जितने मंत्री पद मांगे उतने नहीं मिले। इस मामले में भी कांग्रेस और राजद के बीच तलखी देखने को मिली थी।
तेजस्वी की कांग्रेस से दूरी मामले में सियासी जानकारों की मानें तो अगर तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया तो आगामी चुनाव में नीतीश कुमार की मुहिम पर पानी फिर सकता है। विपक्षी एकता को झटका तो लगेगा ही, इसके साथ चुनाव से पहले ही सियासी समीकरण भी बदल जाएंगे।












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