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Heritage Of Bihar: नरगौना महल में पहली बार इस्तेमाल हुआ था प्लास्टर ऑफ पेरिस, जनिए रोचक बातें

Nargauna Place History: बिहार में घूमने के लिए कई ऐसे जगहें जहां का दीदार करने के बाद अब आपको लगेगा की यात्रा कामयाब रही है। आज हम आपको दरभंगा के नरगौना महल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे देश के सबसे अमीर जमीनदार का आखिरी महल भी कहा जाता है। नारगौना पैलेस के निर्माण कई ऐसी चीज़ों को किया गया था, जो कि देश में पहली बार हुआ था। आइए नारगौना महल से जुड़ी रोचक बातें विस्तार से जानते हैं।

महाराज कामेश्वर सिंह ने नारगौना महल का निर्माण करवाया था, साल 1934 में आए भूंकप के बाद छात्र निवास पैलेस की जगह इस महल का निर्माण हुआ था। नारगौना पैलेस को लेकर दावा किया जाता है कि यह देश की पहली भूकंपरोधी इमारत है।

darbhanga nargauna mahal history

मशहूर वास्तुकार सह अभियंता फेलचर, हेय और रिड की देखरेख में डच वास्तुशैली में महल का निर्माण किया गया था। बुजुर्गों की मानें तो हिंदुस्तान में पहली बार कंक्रीट की नींव का इस्तेमाल इस महल के निर्माण में हुआ था। इस महल की दीवार और खंभे मज़बूत सीमेंट से बनाए गए हैं।

महल का निर्माण इस तरह से किया गया था कि इसमें एसी की ज़रूरत ही नहीं पड़े। महल की बनावट ऐसी है कि कुदरती तौर पर पूरा पैलेस वातानुकूलित था। ग़ौरतलब है कि यह देश का पहला महल है, जिसके परिसर में रेलवे स्टेशन भी है। मौजूदा वक्त में इस इमारत में ललित नारायाण मिथिला विश्वविद्यालय के कई पीजी विभाग संचालित हो रहे हैं।

1941 में तैयार हुए नारगौना महल का डिजाइन तितली के आकार के जैसा है, इसे दो दिशाओं से देखेंगे तो एक ही तरह का नज़ारा होगा। इस महल के हर कमरे सामने की तरफ ही खुलते हैं। 89 कमरे वाले दो मंजिला पैलेस में कुल 14 महाराजा सूट है। विभिन्न प्रदेशों के स्थापत्य शैली से यह सजा हुआ है।

बुज़ुर्गों की मानें तो इस महल में एक सूट नेपाल के राजा का भी मौजूद है। इसमें नेपाल के राजा नरेश त्रिभुवन ठहर चुके हैं। उनके बारे में यह कहा जाता था कि नरेश त्रिभुवन देश के बॉर्डर के बाहर रात नहीं गुज़ारते थे। नेपाल के वह पहले राजा थे, जिन्होंने देश के बाहर महल में रात गुजारी थी।

1939 में दरभंगा प्रवास के दौरान बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने भी इस महल में रात गुज़ारी थी। नारगौना महल में रात गुज़ारने वाले वह राज मेहमान थे। दावा किया जाता है कि देश में पहली बार इस महल में ही प्लास्टर ऑफ पेरिस का इस्तेमाल हुआ था।

चीनी मोहगनी (टीक), इटालियन मार्बल और बेल्जियम ग्लास से बने नारगौना महल को लोग व्हाइट हाउस बिहार की भी संज्ञा देते हैं। बताया जाता है कि इस महल में उत्तर भारत का इकलौता डांस हॉल है, जहां राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल से भी कम आवाज़ की गूंज होती है।

नरगौना पैलेस में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भी वक्त गुज़ार चुके हैं। बुज़ुर्गों की मानें तो यह पहली बार हुआ था जब देश के राष्ट्रपति कही के निजी मेहमान बने थे। उन्होंने महल के हैदराबाद सूट में वक्त बिताया था। बिहार सरकार ने साल 1975 में इस महल के अपने क़ब्ज़े में ले लिया था, जो कि अब ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के क़ब्ज़े में हैं।

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