Bihar Politics: बिहार में कभी थे कांग्रेस के 44 सांसद, मौजूदा समय में लाज बचाने जैसी है हालत
Bihar Politics: बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राजनीतिक पार्टियां विभिन्न रणनीतियों के तहत सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटी हुई है। इसी क्रम में कांग्रेस नेता पहले के मुकाबले पार्टी के मज़बूत होने का दावा कर रहे हैं।
बिहार में कांग्रेस का लोकसभा में कैसा प्रदर्शन रहा है, इतिहास कैसा रहा है, चलिए उनके आंकड़ों पर नज़र डालते हैं। आजादी के बाद अविभाजित बिहार की सियासत में एट्री करने के बाद कांग्रेस के सबसे ज़्यादा सांसद थे। 75 सालों के सियासी सफ़र में अब कांग्रेस की हलात साख बचाने जैसी हो गई है।

40 सांसदों के साथ बिहार में राजनीतिक सफर तय करने वाली कांग्रेस सिमट कर अब 1 सीट पर आ गई है। 1951 में हुई पहली लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अविभाजित बिहार की 44 सीटों में 36 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 1957 में 45 सीटें (अविभाजित बिहार) में 34 सीटों पर दर्ज की थी।
1962 में अविभाजित बिहार की 53 लोकसभा सीटों में 41 सीटों पर क़ब्ज़ा जमाया। वहीं 1967 की लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में सीट कम हुई, 53 सीटों में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद 1971 में हुई लोकसभा चुनाव में अविभाजित बिहार की 53 सीटों में 40 सीटों पर जीत का परचम लहराया।
1977 की लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को ज़ोरदार झटका लगा, 54 लोकसभा सीटों में से एक भी सीट पर कांग्रेस जीत का परचम नहीं लहरा सकी। यहीं से कांग्रेस में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता रहा। 1980 में हुई लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कमबैक करते हुए 54 सीटों में 32 सीटों पर जीत का परचम लहराया।
इंदिरा गांधी की 31 अक्तूबर 1984 को हत्या कर दी गई, इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में 54 सीटों में से 48 सीटों कांग्रेस ने जीत दर्ज की। वहीं 1989 में हुई लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में 54 में से सिर्फ 4 सीटें ही आईं।
1991 में हुई 10वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की शाख बेगूसराय सीट से कृष्णा शाही ने जीत दर्ज कर बचाई। 1996 में हुई 11वीं लोकसभा चुनाव में कटिहार की सीट से जीत दर्ज कर तारिक अनवर ने कांग्रेस की नाक बचाई। 12वीं लोकसभा चुनाव 1998 में कांग्रेस ने बिहार की 5 सीटों (बेगूसराय, कटिहार, मधुबनी, सिंहभूमि और लहोरदगा) पर जीत दर्ज की।
1999 में 13 वीं लोकसभा चुनाव कराई गई, जिसमें कांग्रेस ने 4 सीटों (बेगूसराय,औरंगाबाद, राजमहल और कोडरमा) पर जीत दर्ज की। बिहार बंटवारे के बाद 2004 में हुई 14वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की, जिसमें औरंगाबाद, सासाराम और मधुबनी का नाम शामिल था।
2009 में हुई 15वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दो सीटों पर जीत दर्ज की, मोहम्मद असरारुल हक ने किशनगंज से जीत दर्ज की थी। वहीं मीरा कुमार ने सासाराम परचम बुलंद किया था। 2014 में हुई 16वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में 2 लोकसभा सीटें आईँ, जिसमें मोहम्मद असरारुल हक ने किशनगंज से पार्टी का परचम बुलंद किया था।
रंजीत रंजन ने सुपौल लोकसभा सीट से कांग्रेस के खाते में जीत दर्ज की थी। 2019 में हुए 17वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की शाख किशनगंज सीट से डॉ. मोहम्मद जावेद ने बचाई। आगामी चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहता है, यह देखने वाली बात होगी।












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