Bihar News: CM नीतीश कुमार साध रहे थे तेजस्वी यादव पर निशाना, खुद को ही लग गया ‘तीर’
Bihar CM Nitish Kumar News: बिहार में सत्ता परिवर्तन के साथ ही आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। एक तरफ़ राजद नेता तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार पर ज़ोरदार हमला बोला, तो वहीं दूसरी तरफ़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी राजद नेताओं के ख़िलाफ़ जमकर बयानबाज़ी की। सरकार में रहने के दौरान भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए।
राजद नेताओं पर निशाना साधते-साधते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह भी भूल गए कि जिस कार्यकाल की वह बात कर रहे हैं, उसमें राजद-जदयू गठबंधन में सरकार चला रही थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा तेजस्वी पर लगाए आरोप का नतीजा यह हुआ कि वह खुद भी सवालों के घेरे में आ गए।

सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि सीएम नीतीश कुमार तो राजद नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साध रहे थे। लेकिन खुद तीर उन्हें ही लग गया। चलिए जानते हैं कैसे यह चर्चा तेज़ हुई और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्यों सवालों के घेरे में आ गए हैं।
सीएम नीतीश कुमार ने सदन में राजद नेताओं को आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव समेत तमाम राजद नेताओं की वह इज़्ज़त करते थे। बाद में पता चला कि यह लोग सरकार में रहते हुए कमाई कर रहे हैं। ग़ौरतलब है कि सीएम नीतीश कुमार ने 17 महीने बाद जब सरकार गिरी तो यह आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो आरोप लगा दिए, अब सवाल यह उठ रहे हैं कि वह खुद प्रदेश के मुखिया थे तो उनके सामने भ्रष्टाचार हो रहा था, उस पर लगाम क्यों नहीं लगाई। जबकि भ्रष्टाचार पर नकेल कसने वाला कमान आपेक पास था। गृह विभाग की ज़िम्मेदारी आप संभाल रहे थे।
राजद के साथ ऐसा कौन सा समझौता हुआ था कि वह भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे थे। सरकार गिर जाने का डर था, जो नई सरकार में आने के बाद यह खुलासा किया। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि कांग्रेस के साथ मतभेद की वजह से इंडिया गठबंधन को छोड़ा। क्या वहां बात बन जाती तो फिर बिहार में राजद के साथ मिलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते रहते।
सीएम नीतीश कुमार ने आरोप लगाया कि राजद उनके विधायकों की खरीद बिक्री की जुगाड़ में थी। रुपयों का लालच दिया गया, लेकिन फ्लोर टेस्ट में तो एक अलग ही तस्वीर सामने आई राजद खेमे के 3 विधायक वोटिंग से पहले ही जदयू खेमे में बैठे थे।
अब सवाल उठता है कि राजद ने जदयू विधायकों को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाये। वहीं दूसरी तरफ़ जदयू ने तो राजद के 3 विधायक तोड़ लिए, उन्हें किस चीज (पैसा, पद या अन्य) का लालच देकर अपने पाले में किया गया। इस बात की जांच कैसे होगी कि राजद विधायकों की ख़रीद का क्या पैमाना रहा?












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