सीएम नीतीश कुमार ने कहा- उन्होंने PM मोदी को पत्र भेज दिया है, उनसे मिलने एक प्रतिनिधिमंडल जाएगा
पटना। जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सियासी हलचल जारी है। एक तरफ जदयू, राजद और कांग्रेस पार्टी के नेता जातीय जनगणना के पक्ष में हैं तो वहीं बिहार भाजपा के नेता मुखर नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में सीएम नीतीश कुमार ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है कि देश में जातीय जनगणना करवाई जाए। इसके लिए उनसे मिलने सियासी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल भी जाएगा। सीएम नीतीश ने कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं।

वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने ऐलान किया है कि आगामी सात अगस्त को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल जातीय जनगणना कराए जाने की मांग को लेकर सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करेगी। बता दें कि इसी मुद्दे पर नीतीश कैबिनेट में भाजपा कोटे से खान और भूतत्व मंत्री विधायक जनक राम ने जातीय जनगणना के सवाल पर पूर्व सीएम जीतन राम मांझी पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि मैं खुलकर बात करना चाहता हूं कि क्या कभी उनलोगों ने अपनी गिरेबा में झांककर देखा है? जब देश-प्रदेश के नेता और जनता मौका देती है तो अपने परिवार से बाहर निकलने का काम कोई करता है? छोटे-छोटे दल बनाकर जब ये जाति की बात करते हैं तो जब खुद मौका मिलता है तो छोटी-छोटी जातियों के लोगों को टिकट देने के बजाय परिवारवाद से बाहर नहीं निकलते हैं।
भाजपा कोटे से मंत्री सुभाष सिंह ने कहा कि जातीय जनगणना देश के लिए ठीक नहीं है। इससे समाज में तनाव भी हो सकता है। गरीबी के आधार पर जनगणना होनी चाहिए। इसके अलावा मंत्री सुभाष सिंह ने कहा कि देश में गरीबों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। वह कैसे समाज की मुख्य धारा में आए, उन्हें कैसे आर्थिक रूप से मजबूत करना है। इस पर विचार होना चाहिए। जातीय जनगणना से किसी खास एक वर्ग को लाभ मिलेगा। अगर उससे लाभ होता है तो 1931 के बाद से जातीय जनगणना क्यों नहीं की गई। इसे बंद कर दिया गया, क्योंकि उसका बुरा असर देखने को मिला।












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