क्या उपराष्ट्रपति नहीं बनाए जाने पर नीतीश कुमार एनडीए से हुए अलग? अब खुद दिया जवाब
पटना, 11 अगस्त: बिहार में नीतीश कुमार ने पाला बदलते हुए महागठबंधन के साथ सरकार बना ली है। जिस वजह से बीजेपी लगातार जेडीयू और नीतीश पर हमलावर है। हाल ही में मीडिया से बात करते हुए बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने आरोप लगाया था कि नीतीश उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे, लेकिन जब एनडीए ने उनको उम्मीदवार नहीं बनाया तो वो नाराज हो गए। अब इस पर खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पलटवार किया है।
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मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि आपने एक आदमी (सुशील मोदी) को ये कहते सुना कि मैं उपराष्ट्रपति बनना चाहता हूं। क्या मजाक है, ये बात फर्जी है। मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी। क्या वे भूल गए कि हमारी पार्टी ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में उनको कितना समर्थन किया? वो मेरे खिलाफ बात करना चाहते हैं तो उन्हें करने दीजिए, ताकि उन्हें फिर से पद मिले।
वहीं काफी वक्त से बिहार में PFI की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। जब जेडीयू ने एनडीए से गठबंधन तोड़ा तो सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि नीतीश पीएफआई के खिलाफ जांच से खुश नहीं थे, इस वजह से उन्होंने बीजेपी से दूरी बना ली। इस पर नीतीश कुमार ने कहा कि ये सब बकवास है, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
सुशील मोदी ने कही थी ये बात
सुशील मोदी के मुताबिक जेडीयू के कुछ नेता चाहते थे कि नीतीश कुमार उपराष्ट्रपति बन जाएं, जिस वजह से वो बिहार की कुर्सी हथिया सकें। इसके लिए जेडीयू के कई नेताओं ने उनसे संपर्क भी किया था। सुशील कुमार मोदी ने ये भी कहा कि नीतीश कुमार ने अपनी सहयोगी बीजेपी के साथ असंतोष के बारे में कोई संकेत नहीं दिया था। ये उनकी पार्टी थी जिसने नीतीश कुमार को सिर्फ 43 सीटें मिलने के बावजूद बिहार का मुख्यमंत्री बनाया, जो बीजेपी की संख्या से काफी कम है।












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