EWS के 'सुप्रीम' फैसले को नीतीश कुमार ने बताया सही, जनगणना को लेकर की ये मांग
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने EWS पर ऐतिहासिक फैसला दिया, जिसके तहत 10 फीसदी आरक्षण को बरकरार रखा गया है। इसको लेकर देश में सियासत जारी है। जिस पर सभी पार्टियों की राय अलग-अलग है। अब इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान सामने आया है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। साथ ही केंद्र सरकार के सामने एक नई मांग रख दी।
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पटना में पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला किया है वो बिल्कुल ठीक है, लेकिन हम जाति आधारित जनसंख्या जनगणना की मांग करते हैं। हमने जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी है, इससे लोगों की आर्थिक स्थिति भी साफ हो जाएगी और हम उनके लिए बेहतर योजनाएं प्रदान कर सकेंगे।
नीतीश कुमार ने आगे कहा कि अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा को 27% से बढ़ाने की जरूरत है। उनके मुताबिक SC के लिए 15 प्रतिशत और ST के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उनकी जनसंख्या के आधार पर है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए ऐसा नहीं है। वैसे अब नीतीश ने EWS पर केंद्र का समर्थन कर दिया है, लेकिन देखने वाली बात ये होगी क्या उनकी इस मांग पर मोदी सरकार विचार करती है या नहीं?
2019 से लागू है EWS आरक्षण
आपको बता दें कि 2019 में मोदी सरकार ने संविधान में संशोधन किया था, जिसके तहत आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला हुआ। ये आरक्षण अन्य श्रेणियों की तरह नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में था। बाद में सुप्रीम कोर्ट में इस संशोधन को चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 3-2 के मत से इस पर फैसला पास किया। जिसमें कहा गया कि ये आरक्षण सही है और ये पूरी तरह से बरकरार रहेगा।












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