Bihar Chunav 2025:पार्टी बदलने की परंपरा का बनेगा नया रिकॉर्ड!, लंबे समय से मेहनत करने वाले कार्यकर्ता हताश
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन प्रारंभ होते ही राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस, राज्यस्तरीय दल जदयू, राजद, लोजपा (आर) तथा क्षेत्रीय निबंधित दल हम और रालोमो में दल-बदल और टिकट की दौड़ चरम पर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार 35 से अधिक पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री और विधायक समेत कई वरिष्ठ नेता अपनी चुनावी संभावनाओं के आधार पर पार्टी बदलने में सक्रिय हैं। इन नेताओं में बाहुबल और धनबल वाले शामिल हैं, जो न केवल जीत की संभावना बढ़ाते हैं, बल्कि अपने प्रभाव क्षेत्र में समर्थन भी सुनिश्चित करते हैं।

वीरचंद पटेल पथ के आसपास डेरा डाले विनोद कुमार जैसे कार्यकर्ता बताते हैं कि उनके अपने नेताओं के समर्थन में आने पर पता चलता है कि टिकट प्रतिद्वंदी दल के उम्मीदवार के परिवार को मिल चुका है। ऐसे में विकल्प सीमित हो जाते हैं और कई कार्यकर्ता मजबूरी में पार्टी बदलने को मजबूर हो रहे हैं।
पार्टी के प्रति दीर्घकालीन निष्ठा खो चुकी कार्यकर्ता भी अब अलग रुख अपना रहे हैं। जहानाबाद के निरंजन कुमार ने दो दशक तक पार्टी को समय और मेहनत दी, लेकिन टिकट नहीं मिलने के कारण अब अपने व्यवसाय पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे कार्यकर्ता पार्टी कार्यालयों के आसपास बहुमत में दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक सेवा की, लेकिन चुनावी अवसर पर उनका मनोबल टूट गया।
एडीआर के राज्य समन्वयक राजीव कुमार का कहना है कि चुनाव में यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। दल-बदल से नैतिकता और विचारधारा का महत्व कम हो गया है। इसका प्रतिकूल प्रभाव पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ता है।
विश्लेषक मानते हैं कि इस प्रवृत्ति को मतदाता ही बदल सकते हैं। अगर चुनाव में केवल धनबल और बाहुबल को महत्व दिया जाएगा और नैतिकता, समाजसेवा और विचारधारा को नजरअंदाज किया जाएगा, तो राजनीतिक दलों में यह प्रवृत्ति और तेज़ होगी। बिहार चुनाव 2025 में यह सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक दलों में निष्ठा और विचारधारा की कमी का खामियाजा कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को भुगतना पड़ेगा।












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