Bihar Chunav: 'INDIA' की नाव में 'VIP' का बोझ!, 2020 से 2025 तक सहनी की पलटी पॉलिटिक्स, क्या है चुनावी प्लान?

Bihar Chunav 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। इस सियासी गर्मी के बीच विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी ने एक बार फिर चर्चाओं का केंद्र बनने की कोशिश की है।

60 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर सहनी ने जहां खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की रणनीति अपनाई, वहीं इसने INDIA गठबंधन के भीतर खलबली जरूर मचा दी है। सवाल उठता है कि मुकेश सहनी की ये चाल गठबंधन के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह?

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सहनी की 'पलटीबाज़ी' की राजनीतिक विरासत
मुकेश सहनी के राजनीतिक सफर पर नज़र डालें तो 'स्थिरता' शायद सबसे अनुपस्थित गुण है। 2020 में तेजस्वी यादव के साथ मंच साझा करने वाले सहनी ने चुनाव के दौरान ही गठबंधन पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगा प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में छोड़ दी।

महागठबंधन से किनारा करते ही मुकेश सहनी NDA में शामिल हुए और मंत्री पद भी पाया, लेकिन वहां भी रिश्ते लंबे नहीं टिके। फिर उन्होंने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला और महागठबंधन की गोद में लौट आए। अब जब चुनाव सिर पर हैं, सहनी फिर बयानबाज़ी के ज़रिए अपने लिए सीटों की सौदेबाज़ी करना चाह रहे हैं। लेकिन राजद का साफ रुख बताता है कि अब उन्हें पहले जैसी तरजीह नहीं मिलने वाली।

रणनीति या हताशा का संकेत?
60 सीटों पर लड़ने का ऐलान VIP की राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन से ज़्यादा दबाव की रणनीति है। इस ऐलान के पीछे तीन संभावित उद्देश्य दिखते हैं:

गठबंधन पर सीट शेयरिंग का दबाव बनाना
अपनी राजनीतिक उपस्थिति को प्रासंगिक बनाए रखना है। इसके साथ ही NDA के लिए बैकअप विकल्प बनने का संकेत देना, ताकि कोई विकल्प खुला रहे। लेकिन इस रणनीति की विश्वसनीयता पर सवाल इसलिए उठते हैं क्योंकि सहनी की पुरानी गतिविधियाँ उन्हें भरोसेमंद साझेदार नहीं बनातीं।

INDIA गठबंधन को नफ़ा या नुकसान?
नफ़ा: VIP का मल्लाह, निषाद, कुम्हार और अन्य EBC वर्गों में कुछ प्रभाव है, खासकर उत्तर बिहार और सीमांचल के इलाकों में है। यदि सही सीटों पर और सटीक तालमेल में VIP को शामिल किया जाए, तो जातिगत समीकरण मजबूत हो सकते हैं।

नुकसान: सहनी की राजनीतिक अस्थिरता और पलटी मारने वाली छवि गठबंधन की साख पर असर डाल सकती है। सीटों को लेकर ज़्यादा ज़ोर देने से अन्य दलों (राजद, कांग्रेस, वाम) के भीतर असंतोष पनप सकता है। चुनाव के ऐन समय पर VIP का NDA या तीसरे विकल्प की ओर झुकाव गठबंधन को सीधा नुकसान पहंचा सकता है।

क्या सहनी को सीरियसली लेना चाहिए?
राजनीतिक तौर पर सहनी को पूरी तरह नज़रअंदाज करना भी समझदारी नहीं होगी। लेकिन उन्हें लेकर गठबंधन की रणनीति स्पष्ट, सीमित और शर्तों पर आधारित होनी चाहिए। वरना VIP के बहाने विपक्ष में ही अविश्वास और असमंजस की स्थिति बन सकती है। मुकेश सहनी के 60 सीटों वाले बयान को महज़ मीडिया स्टंट कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।

इसे गंभीरता से स्वीकार करना भी आत्मघाती होगा। INDIA गठबंधन के लिए यह समय है कि वो साफ और संतुलित संकेत दे कि गठबंधन अवसरवादिता पर नहीं, विचारधारा और विश्वास पर चलेगा। सहनी जैसे सहयोगियों से निपटने के लिए राजनीतिक दूरदर्शिता और सख़्ती, दोनों की ज़रूरत है।

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