कोमल सिंह को ही चिराग पासवान ने गायघाट से क्यों बनाया प्रत्याशी? पिता हैं जदयू से एमएलसी, मां वैशाली से सांसद

मुजफ्फरपुर। बिहार में मुजफ्फरपुर के गायघाट विधानसभा क्षेत्र की लोजपा प्रत्याशी कोमल सिंह चर्चा में हैं। 27 साल की कोमल सिंह की मां वीणा देवी राजद के कद्दावर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को मात देकर 2019 में वैशाली से सांसद बनीं। वीणा देवी 2010 के विधानसभा चुनाव में गायघाट से विधायक बनी थीं। दिलचस्प बात यह है कि मां वीणा देवी और बेटी कोमल सिंह लोजपा में हैं जबकि पिता दिनेश सिंह राजपूत जदयू से विधान पार्षद हैं। गायघाट में बेटी कोमल सिंह के लिए सांसद वीणा देवी चुनाव प्रचार करती नजर आ रही हैं। वो गायघाट की जनता को 2010 से 2015 के बीच किए अपने कामों को गिना रही हैं और कह रही हैं कि अब उनकी विरासत को बेटी कोमल सिंह संभालने आई है। राम विलास पासवान ने वीणा देवी से कोमल सिंह को गायघाट से चुनाव लड़ाने की सलाह दी थी। चिराग पासवान ने कोमल सिंह के टिकट पर मुहर लगा दी।

कम उम्र की पढ़ी-लिखी और धनी उम्मीदवार

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सांसद वीणा देवी और विधान पार्षद दिनेश सिंह की बेटी कोमल सिंह 27 साल की हैं और उनके पास एमबीए की डिग्री है। उनकी सालाना आय करीब 8 करोड़ रुपए है। कोमल सिंह की मां वीणा देवी गायघाट की पूर्व विधायक रही हैं। लिहाजा मां की विरासत को देखते हुए चिराग पासवान ने कोमल सिंह को टिकट दिया है। कोमल सिंह के परिवार के राजनीतिक कद का पता इसी से चलता है कि पिता और मां दोनों अलग-अलग पार्टी में हैं। विधानसभा चुनाव में जदयू और लोजपा के बीच छत्तीस का आंकड़ा दिख रहा है। चिराग पासवान नीतीश कुमार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। इस नजरिए से कोमल सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखना दिलचस्प हो जाता है। गायघाट में सांसद वीणा देवी बेटी कोमल सिंह के घूम-घूमकर वोट मांग रही है और 2015 में जिससे वह चुनाव हारी थीं, उन्हीं से इस बार बेटी का मुकाबला है।

मां जिससे हारीं उसी से कोमल का मुकाबला

मां जिससे हारीं उसी से कोमल का मुकाबला

गायघाट क्षेत्र से कई बार विधायक रहे महेश्वर यादव से इस बार कोमल सिंह का मुकाबला है। महेश्वर यादव राजद छोड़कर जदयू में शामिल हुए तो नीतीश कुमार ने उनको टिकट दे दिया। ये वही महेश्वर यादव हैं जिन्होंने 2015 में कोमल सिंह की मां वीणा देवी को हराया था। ये वही महेश्वर यादव हैं जो 2010 में वीणा देवी से चुनाव हार गए थे। इस बार उसी महेश्वर यादव से बेटी कोमल सिंह का मुकाबला है। महेश्वर यादव 1990, 1995, 2005 और 2010 में गायघाट क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं इसलिए कोमल सिंह के लिए यह मुकाबला कठिन है, जो है वो उनकी मां की विरासत ही है। इसलिए वीणा देवी बेटी के लिए चुनाव प्रचार करते हुए गायघाट की जनता से महेश्वर यादव को फूट डालकर राज करने वाला कह रही हैं और क्षेत्र के पिछड़ेपन के लिए उनको जिम्मेदार बता रही हैं। चिराग पासवान ने पार्टी सांसद वीणा देवी को चुनाव प्रचार के लिए गायघाट में उतार दिया है ताकि उनकी विरासत के वोट बेटी कोमल सिंह को मिले। सांसद वीणा देवी क्षेत्र में घूम-घूमकर अपने विधायकी काल में हुए कामों को गिनाते हुए बेटी के लिए वोट मांग रही हैं।

गायघाट बन गया है हॉटसीट

गायघाट बन गया है हॉटसीट

अगर कोमल सिंह गायघाट से कद्दावर महेश्वर यादव को हरा पाती हैं तो उनके परिवार में एक विधायक, एक सांसद और एक विधान पार्षद हो जाएंगे। वैशाली सांसद वीणा देवी राजद के कद्दावर रघुवंश प्रसाद सिंह को हराकर चर्चा में आई थीं। वीणा देवी जब वैशाली से लोकसभा चुनाव लड़ रही थीं, उस समय भी कोमल सिंह उनके साथ चुनावी मैदान में एक्टिव थीं। इस बार लोजपा ने उनको मां के कब्जे वाली सीट गायघाट से लॉन्च कर दिया है। पिता जदयू पार्षद दिनेश सिंह की पकड़ कई पार्टियों में मानी जाती है। गायघाट सीट पर यादव और राजपूत वोट बैंक का समीकरण है। जदयू ने राजद छोड़कर आए महेश्वर यादव को टिकट दिया। राजद ने इस सीट पर निरंजन राय को टिकट दिया है। इस सीट पर जातीय गोलबंदी का हाल यह है कि 2015 में राजपूत वीणा देवी इसलिए हार गईं क्योंकि इस सीट से निर्दलीय लड़े राजपूत प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह को 7826 मत मिले थे। वीणा देवी वह चुनाव करीब 3500 वोटों से महेश्वर यादव से हार गई थीं। इस बार चुनाव क्षेत्र में निकले महेश्वर यादव का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें लोग उनका विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पांच साल में बस एक बार आए हैं। एंटी इनकंबेंसी फैक्टर अगर हो भी तो युवा प्रत्याशी कोमल सिंह के लिए यह मुकाबला आसान नहीं होगा।

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