Chaitra Navratri 2023: बिहार में आस्था का केंद्र हैं देवी दुर्गा के पांच शक्तिपीठ, जानिए इनके बारे में

Chaitra Navratri 2023 के बाद भगवान राम का जन्म या प्राकट्य होता है। इस खास मौके पर जानिए बिहार में क्यों लोकप्रिय हैं देवी दुर्गा के पांच शक्तिपीठ।

Chaitra Navratri 2023

Chaitra Navratri 2023 सनातन धर्मावलंबियों के लिए बेहद पवित्र समय होता है। नवरात्र की अवधि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। Godess Durga Shaktipeeth श्रद्धालुओं की आस्था के बड़े केंद्र होते हैं। सूर्य नारायण की उपासना के लिए प्रसिद्ध बिहार की धरती चैत्र नवरात्र में भी खास आयोजनों के कारण सुर्खियों में रहता है। बिहार में यूं तो कई ऐसे मंदिर और आस्था के केंद्र हैं, जहां भगवती दुर्गा की पूजा-उपासना करने वाले साधक पूरे साल आदिशक्ति दुर्गा की पूजा करते हैं, लेकिन चैत्र नवरात्र में पांच प्रसिद्ध शक्तिपीठ के बारे में जानना रोचक है।

Chaitra Navratri 2023 बेहद खास

दरअसल, 22 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है। 29 मार्च तक देवी दुर्गा की उपासना के बाद 30 मार्च को Lord Ram Birth का सेलिब्रेशन होगा। यानी 30 मार्च को Ram Navami के दिन अवध समेत पूरी दुनिया में रहने वाले सनातनी राम जन्म का उत्सव धूमधाम से मनाएंगे। धर्म-आध्यात्म के नजरिए से अगले नौ दिन की अवधि खास है। इस मौके पर बिहार के पांच प्रमुख केंद्रों के बारे में जानिए।

इन शक्तिपीठों में उमड़ते हैं श्रद्धालु

पौराणिक कथाओं के अनुसार देशभर में मां दुर्गा के शक्तिपीठ हैं। माता सती ने जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में खुद को हवन कर दिया तो भगवान शिव के तांडव में उनके अंग धरती पर कई जगहों पर गिरे। देश के अलग-अलग राज्यों में आज इन स्थानों को शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। बिहार में पांच शक्तिपीठों में चैत्र नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है।

राजधानी पटना में पटनदेवी मंदिर

बिहार की राजधानी पटना के महाराजगंज में बड़ी पटनदेवी नाम की शक्तिपीठ है। मान्यता है कि देवी सती के शरीर का दाहिना जंघा महाराजगंज में गिरा था। इसके अलावा एक छोटी पटनदेवी मंदिर भी है। हाजीगंज इलाके के इस शक्तिपीठ के संबंध में श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का पट और वस्त्र गिरा था।

गया में मां मंगला गौरी मंदिर

भस्मकूट पर्वत पर मां मंगला गौरी के प्रसिद्ध मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मान्यता के मुताबिक आज के बिहार में गया-बोधगया रोड पर माता सती का स्तन गिरा था। नवरात्र में इस मंदिर में श्रद्धालुओं और साधकों की विशेष आस्था है।

नवादा में चामुंडा देवी मंदिर

मान्यताओं के अनुसार देवी सती का सिर आज के नवादा के आसपास गिरा था। चामुंडा मंदिर रुपौ गांव में है। नवादा-कौआकोल मार्ग पर देवी दुर्गा का मंदिर आदिशक्ति भगवती के उपासकों की आस्था का केंद्र है।

मुंगेर जिले का मां चंडिका देवी मंदिर

आदिशक्ति भगवती माता सती के जलते शरीर की दाहिनी आंख मुंगेर जिले में गंगा किनारे गिरने की मान्यता है। पौराणिक कथाओं के आधार पर इस स्थान को आज शक्तिपीठ के रूप में मां चंडिका देवी मंदिर के रूप में जाना जाता है।

पांचवां शक्तिपीठ मां उग्रतारा

सहरसा जिले के करीब इस शक्तिपीठ के प्रति भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। सहरसा से लगभग 17 किलोमीटर दूर माता सती के इस मंदिर में आने वाले भगवती के भक्तों की मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की बायीं आंख गिरी थी। यूं तो पूरे साल इस मंदिर में भक्त अपनी मुराद पूरी करने की प्रार्थना करते रहते हैं, लेकिन मां उग्रतारा शक्तिपीठ में चैत्र नवरात्र के साथ शारदीय नवरात्र में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

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