Noorpur News: मुखिया और सरपंच के बीच फंसा CCTV संचालन का पेंच, ग्रामीणों ने भी लगाए गंभीर आरोप
Noorpur News: बेगूसराय ज़िला के नूरपुर पंचायत में अपराध पर लगाम लगाने की मकसद से हाल ही में CCTV लगवाए गए हैं। लेकिन अभी तक CCTV लाइव फुटेज देखने के लिए कहीं भी डिसप्ले नहीं दिखाई दे रहा है। वहीं इसका संचालन कौन कर रहा है, अगर पंचायत में कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो, फुटेज देखने के लिए किससे संपर्क साधना होगा? ग्रामीणों के इस प्रकार के कई सवाल हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन जगहों पर और जितनी दूरी पर CCTV कैमरे लगाने चाहिए थे, वह नहीं लगाए गए हैं। कैमरा लगाने के नाम पर सिर्फ़ खानापूर्ति की गई है। ग्रामीण स्तर पर योजनायें तो बहुत आती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जाता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि कैमरा लगाने में भी भ्रष्टाचार हुआ है। शराब और तारी की बिक्री होने वाली जगहों पर अपराध होने का डर बना रहता है। उन जगहों पर कैमरा नहीं लगाया गया है। दिखाने के लिए कुछ जगहों पर कैमरे लगाए गए हैं, वह काम कर रहे या नहीं इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर कैमरे काम कर रहे हैं तो इसका डिसप्ले का भी तो पता होना चाहिए। कहां लाइव फुटेज चल रहा है, वह किसी को पता नहीं। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी पंचायत में मुखिया और सरपंच का अधिकार क्षेत्र अलग-अलग होता है। पंचायत के विकास कार्यों में मुखिया का हस्तक्षेप होता है, वहीं पंचायत में अपराध से जुड़े मामले में संज्ञान लेने का अधिकार सरपंच का होता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कैमरा सही नहीं लगाया गया है। जहां 360 डिग्री (डोम कैमरा) की ज़रूररत थी वहां, बुलेट कैमरा लगा दिया। क्वालिटि के हिसाब से बुलेट कैमरा अच्छा है लेकिन, वह सभी तरफ कैप्चर नहीं कर सकता है।क्योंकि उस कैमरे को कवर करने के लिए दूसरा कैमरा नहीं लगा है। कैमरा जब भी लगता है तो एक दूसरे कैमरे को कवर किया जाता है ताकि फुटेज कैप्चर हो सके।
ग्राम पंचायत नूरपुर में मुखिया ने अपराध पर लगाम लगाने की मकसद से कैमरे लगवाए गए। अपराधी चाहे तो जिस ओर कैमरा का मुंह है उसे पीछे से खोल सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस खानापूर्ति से अच्छा है कि ऐसी कोई योजना पर काम ही नहीं किया जाए जिसका मकसद ही पूरा नहीं हो, क्योंकि योजना के पर काम खानापूर्ति कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। कर पैसे उठा लिए जाते ह आधिकारिक तौर पर देखा जाए तो CCTV संचालन की ज़िम्मेदारी सरपंच की होनी चाहिए थी। लेकिन अभी तक यह साफ़ ही नहीं हो पाया है कि कैमरे का संचालन कौन कर रहा है?
वन इंडिया हिंदी ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर सरपंच संघ की उपाध्यक्ष और नूरपुर पंचायत की सरपंच सरीता कुमारी से बातचीत की, जब उनसे सवाल पूछा गया की ग्राम कचहरी के मुद्दे पर कार्रवाई आपके अधीन है, आपराधिक वारदातों पर लगाम लगाने की ज़िम्मेदारी आप पर है, पंचायत में कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हो, इसके लिए आप ज़िम्मेदार हैं, तो फिर पंचायत में लगे CCTV का संचालन किसके हाथ में है?
वन इंडिया हिंदी के सवालों पर जवाब देते हुए सरपंच संघ की उपाध्यक्ष और नूरपुर पंचायत की सरपंच सरीता कुमारी ने कहा कि बिलकुल सरपंच को कोई फंड नहीं है, लेकिन क्राइम से जुड़े मामले की जवाबदेही मेरी है। क्राइम पर लगाम के मद्देनजर पंचायत में कैमरे लगवाए गए, लेकिन हमारे हाथ में उसका संचालन नहीं है, पंचायत की मुखिया ख़ुद ही उसका संचालन कर रही हैं। कैमरे काम कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं, किन जगहों पर लगे हैं, इन सबकी कोई जानकारी नहीं है।
ग्रामीणों ने कहा कि सरपंच को पंचायत प्रधान का दर्जा तो मिला है, लेकिन यह बहुत ही शर्म की बात है कि, उन्हें स्वतंत्र होकर फैसला लेने का अधिकार नहीं है। ग्राम कचहरी के सर्वे सर्वा सरपंच को मुखिया के निगरानी में ही रहना पड़ता है। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामीण स्तर पर योजनाओं में पारदर्शिता आए इस बाबत BDO को भी ज्ञापन सौंपेंगे, ताकि लोगों को हर चीज़ों की साफ़-साफ़ जानकारी मिल सके।












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