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Srijan Scam की मुख्य आरोपी रजनी प्रिया को CBI ने गाजियाबाद से पकड़ा, छह साल से थी फरार

Srijan Scam News: 2017 में हुए बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले मामले में सीबीआई ने गुरुवार 10 अगस्त को बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने सृजन घोटाले की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी की बहू रजनी प्रिया को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी गाजियाबाद के साहिबाबाद से हुई है।

रजनी प्रिया को गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर पटना लाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के एनजीओ सृजन महिला विकास सहयोग समिति (एसएमवीएसएस) की सचिव रजनी प्रिया एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले में छह साल से फरार थी।

Srijan Scam News

सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, गिरफ्तार आरोपी एनजीओ संस्थापक मनोरमा देवी की बहू और एनजीओ की सचिव है। बताया कि जांच की शुरुआत से ही फरार थी, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया था। साथ ही, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया था।

सीबीआई की एक टीम इंस्पेक्टर रवि शंकर कुमार के नेतृत्व में गुरुवार को साहिबाबाद पहुंची। टीम के पास ऐसी सूचना थी कि रजनी प्रिया, साहिबाबाद पहचान बदलकर रह रही थी। सीबीआई की टीम ने छापा मारकर राजेंद्र नगर के वेद एनक्लेव से रजनी प्रिया को गिरफ्तार कर लिया।

रजनी प्रिया को गिरफ्तार के बाद सीबीआई गाजियाबाद की विशेष कोर्ट लेकर पहुंची। कोर्ट ने रजनी प्रिया की दो दिन की ट्रांजिट रिमांड को स्वीकार कर लिया। इसके बाद सीबीआई की टीम आरोपी रजनी प्रिया को लेकर पटना के लिए रवाना हो गई। खबर के मुताबिक, सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में रजनी के खिलाफ 24 मामले दर्ज किए हैं।

एबीवी न्यूज़ की खबर के मुताबिक, करोड़ों की मालकिन रजनी प्रिया के मकान पर सीबीआई ने कई बार इश्तेहार चश्पा किया, कई जमीन भी जब्त की। ईडी ने भी कई संपत्तियों को अटैच किया। सीबीआई ने अमित और रजनी प्रिया को भगोड़ा तक घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, पता बताने वालों के लिए इनाम की भी घोषणा की गई थी।

क्योंकि, रजनी प्रिया और अमित सृजन घोटाले के मुख्य आरोपी हैं जिनके पास से उससे जुड़े कई अहम सबूत मिल सकते हैं। साथ ही, कई सफेदपोशों का भी पर्दाफाश हो सकता है। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा, यह घोटाला बिहार के भागलपुर स्थित एनजीओ की संस्थापक मनोरमा देवी की मृत्यु के बाद सामने आया था।

बिहार सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने अगस्त 2017 में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। यह आरोप लगाया गया था कि सरकारी पैसे को सृजन एनजीओ के खाते में हस्तांतरित कर बंदरबांट की गई थी। जिसके बाद सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए रजनी की भागलपुर व नोएडा के गार्डेनिया की तमाम संपत्तियां जब्त की हैं।

इसके अलावा करीब 26 बैंक खाते, लॉकर आदि भी सील कर दिए थे। वहीं, इस मामले में कई बैंक के अधिकारियों से लेकर क्लर्क व क्लर्क सलाखों के पीछे हैं। लेकिन रजनी प्रिया फरार चल रही थी।

क्या है सृजन घोटाला?
सृजन संस्था किी शुरुआत गरीब, नि:सहाय महिलाओं के उत्थान के उद्देश्य से हुई थी। लेकिन, गैर- सरकारी संस्थान सृजन सहकारी सहयोग समिति के नाम से सबौर और भागलपुर के कुछ बैंकों में खाते थे। इन खातों में कुछ सरकारी योजनाओं की अनुदान राशि के अलावा अन्य लेनदेन होती थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2004-14 के बीच बड़ी संख्या में कई सरकारी खातों से राशि अवैध तरीके से इस संस्थान के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी। सरकारी खाते का फर्जी बैलेंस सीट बनाकर इसमें हमेश राशि दिखाई जाती थी। इस काम में सरकारी अधिकारी से लेकर बैंक अधिकारी तक मिले हुए थे।

ऐसा बताया जा जाता है कि सृजन एनजीओ के खाते में ट्रांसफर की गई सरकारी राशि का बाद बंदरबांट हो जाता था। इस घोटाले में तकरीबन एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी।

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