Bihar By Election Result: सियासत के ‘किंगमेकर’ हुए सत्ता के सेमीफाइनल में ही बाहर, जनता ने क्यों नकार दिया
Bihar By Election: बिहार विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने सियासी गलियारों में एक अलग बहस छेड़ दी है। सभी की निगाहें प्रशांत किशोर पर टिकी थीं, चर्चा थी कि प्रशांत किशोर पीएम नरेंद्र मोदी, ममता बनर्जी और नीतीश कुमार जैसे नेताओं के लिए चुनावी रणनीति बनाने के लिए मशहूर हैं।
सियासत के 'किंगमेकर' के किंग मेकर प्रशांत किशोर अपनी पार्टी जनसुराज के लिए ऐसी रणनीति तैयार करेंगे, जिससे उपचुनाव में बिहार की सभी 4 सीटों पर जीत का परचम लहराएंगे। लेकिन पीके की पार्टी सत्ता के सेमीफाइनल में ही पवेलियन लौट गई। अब यह चर्चा का विषय बन चुका है।

प्रशांत किशोर के पूर्व सहयोगी, चुनावी रणनीतिका बद्रीनाथ ने वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में उपचुनाव के नतीजों पर बेबाकी से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर दिग्गजों के लिए चुनावी रणनीति बनाकर उन्हें जिताने का दावा करते रहे, लेकिन बिहार में अपनी पार्टी और उम्मीदवार का खाता नहीं खुलवा सके।
अपनी चुनावी रणनीति के लिए मशहूर प्रशांत किशोर ने अपनी नई पार्टी जन सुराज की शुरुआत की थी। हालांकि वे खुद किसी सीट से चुनाव नहीं लड़ रहे थे, लेकिन उनके उम्मीदवारों को लेकर काफी चर्चा थी। चुनाव से पहले किशोर ने जन सुराज का भव्य ऐलान किया और तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार पर तीखी आलोचना की।
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि वह जिन लोगों को मंच पर लेकर आए हैं, वह पढ़े-लिखे हैं और अन्य राजनीतिक दलों के लोगों से बेहतर हैं। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे और दावा किया कि वह सभी सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। लेकिन जनता ने उनके किसी भी मुद्दे को तरजीह नहीं दिया।
भारतीय राजनीति में किशोर का कद और बढ़ सकता था अगर उनकी पार्टी इन उपचुनावों में एक भी सीट जीत लेती। लेकिन, चार सीटों पर चुनाव लड़े गए उम्मीदवारों में से तीन उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे जबकि एक चौथे स्थान पर रहा। तीसरे स्थान पर आने वालों में से केवल एक उम्मीदवार ही तीसरे विकल्प के तौर पर सम्मानजनक संख्या में वोट हासिल कर पाये।
रामगढ़ में जन सुराज के उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहे। सुनील कुमार सिंह को सिर्फ़ 6,513 वोट मिले। बेलागंज में जन सुराज के उम्मीदवार मोहम्मद अजमद 17,285 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। इसी तरह इमामगंज से जीतेंद्र पासवान 37,103 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं तरारी से किरण सिंह 5,622 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं।
यह चुनावी प्रदर्शन किशोर के राजनीतिक रणनीतिकार या नेता के रूप में भविष्य के बारे में सवाल उठाता है। उनके महत्वाकांक्षी दावों और रणनीतिक चालों के बावजूद, नतीजे आगे बढ़ने के लिए उनके दृष्टिकोण और रणनीति पर चिंतन की आवश्यकता हैं। बिहार के लोगों के लिए वैसे ही समीकरण तैयार करने होंगे जो सदियों से चली आ रही है।
बिहार के लोगों के लिए उपचुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी सिर्फ वोट कटुआ पार्टी बनकर रह गई। जनसुराज उम्मीदवार ने महागठबंधन के वोट को ख़राब किया और एनडीए उम्मीदवार आसानी से जीत गए। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशांत किशोर अब भी सिर्फ़ चुनावी रणनीतिकार हैं, या फिर वह बिना नतीजों की भविष्यवाणी किए बड़े-बड़े दावे करने वाले राजनेता बन गए हैं?












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