Buxar Train Accident: इंजीनियरिंग फॉल्ट की वजह से हुआ हादसा, ड्यूटी पर मौजूद रेल अधिकारियों ने क्या कहा?
बिहार के बक्सर में हुई नॉर्थ-ईस्टर सुपर-फास्ट ट्रेन दुर्घटना को लेकर उस रात ड्यूटी पर मौजूद रेलवे के अधिकारियों-कर्मचारियों को लगता है कि यह इंजीनियरिंग फॉल्ट का नतीजा है। बक्सर जिले के रघुनाथपुर के पास बुधवार रात को हुए इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी और 71 लोग जख्मी हो गए थे।
दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनस से असम के कामख्या जा रही इस ट्रेन के सभी 23 कोच पटरी से उतर गए थे। एचटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर, प्वाइंट्स मैन, गेटमैन, लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट और ट्रैक मैन के हस्ताक्षरों वाले 15 पन्नों के नोट में कहा गया है कि दुर्घटना इंजीनियरिंग विभाग की गलतियों की वजह से होने की आशंका है।

कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने सबके बयान दर्ज किए
इस ट्रेन दुर्घटना की जांच कर रहे कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) ने इन सबके बयान दर्ज किए हैं। इनके अलावा उन्होंने घायल यात्रियों और स्थानीय लोगों के भी बयान लिए हैं। बताया गया है कि इसको लेकर ईस्ट सेंट्रल रेलवे (ECR) के अधिकारियों के साथ भी शुक्रवार सुबह दुर्घटना स्थल पर चर्चा की गई है।
गेटमैन नंद किशोर ने देखी थी स्पार्किंग और सुनी थी तेज आवाज
अपने बयान में गेटमैन नंद किशोर सिंह ने कहा है कि जब ट्रेन गुजर रही थी तो उसने स्पार्किंग देखी और बहुत तेज आवाज सुनी। लोको पायलट बिपिन कुमार सिंह ने कहा है कि जब ट्रेन रघुनाथपुर होम सिग्नल और एक रेलवे क्रॉसिंग को पार कर रही थी तो उन्होंने लोकोमोटिव के पिछले हिस्से में भारी कंपन और झटका महसूस किया और ब्रेक पाइप में कम दबाव पाया।
ब्रेक पाइप में दबाव कम होने की वजह क्या हो सकती है?
जांच टीम में शामिल रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अगर लोको पायलट को चलती ट्रेन के दौरान दबाव कम हुआ लगता है, तो एक पहिये के ट्रैक से नीचे उतरने की संभावना हो सकती है, जिससे ऑटोमेटिक ब्रेक लग सकता है या ब्रेक पाइप से रिसाव की संभावना हो सकती है।'
दुर्ग-बरौनी ट्रेन के लोको पायलट ने भी कंपन महसूस किया था
उन्होंने कहा कि घटना से आधे घंटे पहले 15232 डाउन दुर्ग-बरौनी ट्रेन भी उसी ट्रैक से गुजरी थी, जिसका रूट बदला गया था। उसके लोको पायलट ने भी कंपन महसूस किया था। रेल अधिकारी के मुताबिक 'ऐसी स्थिति में उसे ऐसे कंपन के बारे में स्टेशन मैनेजर को सूचना देनी होती है और जांच से ही पता चलेगा कि स्टेशन मैनेजर के साथ यह जानकारी साझा की गई थी या नहीं।'
पहले पटरी में खराबी की जताई गई थी आशंका
इससे पहले गुरुवार को रेलवे के दो सीनियर अफसरों ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा था कि शुरुआती जांच के मुताबिक ट्रेन के पटरी से उतरने की वजह पटरियों में खराबी, खासकर रेल फ्रैक्चर या पटरियों में गैप लग रहा है।
शाम से दोनों लाइन पर ट्रेनों का संचालन बहाल
बहरहाल हादसे के 45 घंटे बाद प्रभावित ट्रैक पर शुक्रवार को एक ट्रायल रन किया गया। सुबह में ही कई ट्रेनें अपलाइन से गुजरनी शुरू हो गईं। जबकि डाउन लाइन में ट्रेनों का संचालन शाम से बहाल कर दिया गया।
ईस्ट सेंट्रल रेलवे के चीफ पीआरओ बिरेंद्र कुमार ने कहा, 'हादसे के 48 घंटों के भीतर अप और डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन सामान्य कर दिया गया। अब से ट्रेनों का आवागमन शुरू हो जाएगा।' उन्होंने बताया कि ट्रैक से अधिकतर मलबा हटा लिया गया है।












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