Bihar News: हाथ में हथकड़ी और नियुक्ति पत्र लेने पहुंचा अभ्यर्थी, लोगों ने कहा- बिहार में कुछ भी मुमकिन
Bihar News: बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं अब हथकड़ी लगे युवक द्वारा नियुक्ति पत्र लेने के मामले में भी अलग ही चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल एक युवक को सिपाही भर्ती मामले में धांधली के आरोप में सहरसा जेल में बंद है।
बीपीएससी द्वारा कराई गई शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद, युवक नियुक्ति पत्र लेने पहुंचा था। हाथ में हथकड़ी लगाए हुए युवक BEO दफ्तर पहुंचा तो लोग देख कर हैरान रह गए। जब लोगों को पता चला कि युवक सिपाही भर्ती मामले में धांधली के आरोप में सहरसा जेल में बंद है। तो उन्होंने कहा कि यह कैसी रोज़गार की बहार है।

अतिथि शिक्षका जिनपर कोई केस मुकदमा नहीं है, वह अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। यहां अपराधी को नियुक्ति मिल रही है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि नवनियुक्त शिक्षक जिन पर कोई भी अपराधिक मुकदमा चल रहा है उसे नियुक्ति पत्र नहीं दे। जो साफ छवि के हैं उन्होंने ही नियुक्त किया जाए।
अपराधी प्रवृति के लोग बच्चों को क्या शिक्षा देंगे, जो जुर्म कर जेल में बंद हैं। हथकड़ी लगे हुए नियुक्ति पत्र हासिल कर रहे लोग शिक्षक बनेंगे तो शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी। यह तस्वीर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के नाम पर सवालिया निशान लगा रही है।
आपको बता दें कि BEO दफ्तर (सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड) में बीपीएससी पास शिक्षक पुलिस के साथ नियुक्ति पत्र लेने आया था। सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद युवक को नियुक्ति पत्र दिया गया। मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का आरोपी चंदन शर्मा भटौनी पंचायत (सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड) का निवासी है। सदर थाना में उसके खिलाफ मामला दर्ज है।
सहरसा मंडल कारा में बंद चंदन ने कारा अधीक्षक को आवेदन देकर शिक्षक नियुक्ति परीक्षा होने की बात कही थी। इसके साथ ही नियुक्ति पत्र लेने और विद्यालय में योगदान के लिए जेल से जाने की इज़ाज़त मांगी थी। इसके बाद जेल अधीक्षक ने आवेदन को न्यायालय भेजा था।
न्यायालय ने जेल मैनुअल के मुताबिक चंदन शर्मा को पुलिस की सुरक्षा में BEO दफ्तर सिमरी बख्तियारपुर भेजा था। जहां से उसे नियुक्ति पत्र मिला। मध्य विद्यालय सिमरटोका (धनुपुरा पंचायत) में सेवा देने की बात सामने आई है।
BEO रंजन कुमार शर्मा ने कहा कि नियुक्ति पत्र देना मेरा काम था, वो मैंने कर दिया। जहां तक स्कूल में सेवा देने की बात है तो वह संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यपक का मामला है। वहीं लोगों में इस नियुक्ति को लेकर नाराज़गी देखने को मिल रही है, उनका कहना है कि अपराधी को शिक्षक बनने का कोई अधिकारी नहीं है।












Click it and Unblock the Notifications