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यहां हिंदू और मुस्लिम एक साथ करते हैं इबादत, CM भी कर चुके हैं चादरपोशी, ज़ियारत करने की अनोखी है मान्यता

दरगाह शरीफ में बाबा के मजार के साथ उनके परिजनो का भी मजार है। बीथो शरीफ से जाना जाने वाले इस गांव का नाम पहले बैतहू शरीफ था। शाम 5 बजे के बाद बाबा के मज़ार पर हाज़िरी लगाने का वक्त होता है।

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Dargah In Bihar: कई ऐसे मज़ार हैं, जहां प्राचीन काल से ही सूफी संत, ऋषि-मुनि, साधु दरवेश, साधु और फकीर साधना करते आ रहे हैं। बिहार के गया ज़िले में भी एक दरगाह है, मान्यता है कि यहां ज़ियारत करने से हर परेशानियों का हल निकल जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां आए लोग कभी निराश हो कर वापस नहीं जाते हैं। जिन्हें दवा से आराम नहीं मिलता उनका दुआ से काम बन जाता है। गया जिले में गया-पटना मुख्य मार्ग पर स्थित बीथो शरीफ दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता का केंद्र है। हजरत मखदूम सैयद शाह दुर्वेश रहमतुल्लाह अलेह के दरगाह पर हिन्दू और मुस्लिम एक साथ इबादत करते हैं।

बीथो शरीफ गांव के लोगों की मानें तो दरगाह पर भूत-प्रेत, जिन्न, जादू-टोना और लाइलाज बीमारी से पीड़ित लोग अपनी फरियाद लेकर आते हैं। यहां आकर उनकी सारी मुरादें पूरी हो जाती हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हर विधानसभा चुनाव से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मज़ार पर चादरपोशी करते हैं। अगर किसी वजह से मुख्यमंत्री नहीं आ पाते हैं तो उनके नाम पर उनके समर्थक मज़ार पर चादर चढाते हैं। 600 साल पुराना हजरत मखदूम सैयद शाह दुर्वेश अशरफ रहमतुल्लाह अलेह के मजार पर काफी दूर-दूर से लोग आते हैं। मान्यता है कि यहां आने पर लाइलाज बीमारी भी ठीक हो जाती है।

गांव के बुज़ुर्गों ने बताया कि ईरान देश से हजरत मखदूम सैयद शाह दुर्वेश रहमतुल्लाह अलेह यहां आए थे। तीन बार पैदल हज करने वाले बुजुर्ग की दुआओं से यहां के राजा की इकलौती पागल बेटी ठीक हुई थी। दरगाह शरीफ में बाबा के मजार के साथ उनके परिजनो का भी मजार है। बीथो शरीफ से जाना जाने वाले इस गांव का नाम पहले बैतहू शरीफ था। शाम 5 बजे के बाद बाबा के मज़ार पर हाज़िरी लगाने का वक्त होता है। लाइलाज बीमारियों और शैतानी ताकतों से पीड़ित लोग कई दिनों तक दरगाह पर रहकर इलाज करतवाते हैं। लोगों का मानना है कि यहां आने के बाद कोई भी मायूस नहीं लौटता है।

गया जिले के कंडी पंचायत में स्थित बीथोशरीफ दरगाह में सभी धर्मों के लोगों का सौहार्द एक साथ देखने को मिलता है। आपको बता दें कि 2 मार्च से 6 मार्च तक बिथो शरीफ दरगाह में हजरत मखदूम सैयद शाह दुर्गेश अशरफ रहमतुल्ला अल्लैह का 542 वां उर्स चलेगा। इस दौरान लोग मखदूम बाबा की पगड़ी, खिरका और बधी का भी लोग दीदार करने को मिलेगा। वहीं सूफियाना कव्वाली का भी आयोजन किया जाएगा।

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