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Bihar SIR: बिहार वोटर रिवीजन को लेकर विपक्ष ही नहीं, BJP की भी बढ़ी चिंता, क्यों बेचैन हुआ पार्टी नेतृत्व?

Bihar Voter List Revision 2025: बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी चिंतित नजर आ रही है। जमीनी स्तर से मिल रही नकारात्मक रिपोर्टों के बाद, पार्टी के संगठन सचिव भीखू भाई दलसानिया ने सोमवार (14 जुलाई) को 26 प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि पार्टी कार्यकर्ता राज्यभर में जाएं, मतदाताओं से मिलें, उनके भ्रम को दूर करें और पार्टी समर्थकों को नामांकन प्रक्रिया में मदद करें।

विपक्ष के नैरेटिव पर BJP को बढ़ती चिंता

इंडियन एक्सप्रेस सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की चिंता यह है कि विपक्ष इस मुद्दे पर नैरेटिव बनाने में आगे निकल गया है। RJD, कांग्रेस और वाम दलों वाला INDIA गठबंधन (महागठबंधन) "बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने" और "चुनाव आयोग की जल्दबाजी" जैसे आरोप लगाकर माहौल बना चुका है। वहीं, बीएलए (Booth Level Agents) की संख्या बढ़ाने में भी विपक्ष आगे रहा है।

Bihar Voter List Revision 2025

🔵 भाजपा संगठन सचिव ने दिया एक्टिव रहने का निर्देश

भीखू भाई दलसानिया ने बीजेपी नेताओं से कहा है कि उनके बीएलए हर पोलिंग बूथ तक पहुंच बनाएं। साथ ही 19 जुलाई से 31 जुलाई तक हर विधानसभा क्षेत्र में बैठकें कर फीडबैक जुटाया जाएगा, ताकि पार्टी को SIR की जमीनी हकीकत का पता चल सके।

🔵 दस्तावेज बनी एक बड़ी चुनौती

एक बीजेपी नेता ने बताया कि एक अगस्त के बाद का समय बेहद अहम होगा, क्योंकि तब तक सभी मतदाताओं को अपने नामांकन के लिए जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अभी तक पार्टी के फीडबैक के मुताहबिक, सिर्फ 30% लोगों ने ही फॉर्म के साथ सही दस्तावेज जमा किए हैं, जबकि 70-80% ने बिना जरूरी दस्तावेजों के ही आवेदन कर दिया है। ये आने वाले चुनाव में बड़ी बाधा बन सकता है।

चुनाव पंजीकरण अधिकारी जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूचियों पर आखिरी फैसला लेंगे। भाजपा नेता ने कहा, "हम चाहते हैं कि हमारे बूथ स्तर के एजेंट एसआईआर प्रक्रिया में अंत तक शामिल रहें।"

🔵 आंकड़ों में विपक्ष आगे, BJP की रफ्तार धीमी

बिहार में 25 जून से लेकर 2 जुलाई तक, जब से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू हुई, उस दौरान चुनाव आयोग (EC) के आंकड़ों के मुताबिक सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) की संख्या में औसतन 13% की बढ़ोतरी देखी गई।

  • विपक्ष (INDIA गठबंधन) की स्थिति

RJD, कांग्रेस और वाम दलों वाले विपक्षी INDIA गठबंधन ने 17.51% अधिक बीएलए जोड़े। उनकी कुल संख्या 56,038 से बढ़कर 65,853 हो गई। इसमें सबसे चौंकाने वाली बढ़त कांग्रेस की रही, जिसने अपने बीएलए लगभग दोगुने कर दिए।

  • NDA (BJP-जेडीयू गठबंधन) की स्थिति

एनडीए, जिसमें BJP और JDU शामिल हैं, की बीएलए संख्या में केवल 10.86% की बढ़त हुई। कुल संख्या 80,083 से बढ़कर 88,781 हो गई।

  • BJP और JDU का अलग-अलग प्रदर्शन

BJP ने मात्र 1.39% की मामूली बढ़त हासिल की - 51,964 से 52,689 बीएलए तक।

इसके मुकाबले JDU ने कहीं ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया -उसने 24.13% की बढ़ोतरी करते हुए अपने बीएलए 27,931 से बढ़ाकर 34,669 कर लिए।

इस आंकड़े से साफ है कि विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया को लेकर ज्यादा तेजी और गंभीरता दिखाई, खासकर कांग्रेस ने। वहीं बीजेपी की सक्रियता काफी धीमी रही, जिससे उसे अब संगठन स्तर पर चिंता सताने लगी है। इसी वजह से अब बीजेपी राज्यभर में संपर्क और संगठन विस्तार के प्रयासों में जुट गई है, ताकि वोटर लिस्ट रिवीजन प्रक्रिया में पीछे न रह जाए।

भाजपा को डर है कि अगर SIR अभियान पर पकड़ नहीं बनाई गई, तो चुनावी मैदान में विपक्ष का लाभ मिल सकता है। यही कारण है कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को अलर्ट मोड में डाल दिया है, ताकि नामांकन, दस्तावेज और वोटर लिस्ट की हर प्रक्रिया पर पैनी नजर रखी जा सके।

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