राहुल और तेजस्वी की वोटर अधिकार यात्रा में शामिल हुए अखिलेश यादव, जानिए शनिवार का पूरा कार्यक्रम

Rahul Gandhi Voter Adhikar Yatra: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट रिवीजन के मुद्दे पर सियासी उठापटक तेज है। संसद के हालिया मॉनसून सत्र में हमलावर रहे विपक्ष अब सड़कों पर सक्रिय है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव वोटर अधिकार यात्रा पर हैं। दोनों नेता जनता के बीच पहुंचकर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठा रहे हैं। यह यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर है।

14वें दिन यात्रा की शुरुआत छपरा से हुई। इस दौरान रोड शो में राहुल और तेजस्वी यादव के साथ अखिलेश यादव भी शामिल हुए। शनिवार को ये यात्रा छपरा से आरा पहुंचेगी जहां पर विशाल जनसभा का आयोजन किया गया है।

Rahul Gandhi Voter Adhikar Yatra

भाजपा बिहार से बाहर होने वाली है- अखिलेश यादव

पटना पहुंचे समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि वह वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होने आए हैं। उन्होंने बिहार की जनता को इस यात्रा के समर्थन के लिए बधाई दी और कहा, 'इस बार बिहार से जो आवाज़ आ रही है, वह यह है कि भाजपा बिहार से बाहर होने वाली है।'

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने संविधान के अधिकारों का हनन किया है और चुनाव आयोग भाजपा सरकार का जुगाड़ आयोग बन गया है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा जनता के मतदाता अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के संदेश को फैलाने के लिए महत्वपूर्ण है।

आरा में बड़ी जनसभा

श्याम चक मोड़, छपरा से यात्रा शुरू होकर राजेंद्र कॉलेज, भगवान बाज़ार, दरोगा राय चौक, राजेंद्र स्टेडियम, थाना चौक, म्यूनिसिपैलिटी चौक, बाज़ार समिति मोड़, नवाजी टोला चौक, बिकारी चौक, रौजा, जंगा चौक, आरा रोड, सिकड्डा, छपरा ब्रिज मोड़, आरा ज़ीरो माइल, बरहरा विधानसभा, धरहरा चौक, सपना सिनेमा मोड़, शिवगंज, आरा सदर अस्पताल, मठिया मोड़, रमना मैदान चौक पहुंचेगी जहां वीर कुंवर सिंह स्टेडियम, अंबेडकर चौक, आरा में जनसभा का आयोजन किया गया है।

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वोटर अधिकार यात्रा का समापन पटना में मार्च के साथ

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में चल रही वोटर अधिकार यात्रा का समापन पटना में मार्च के साथ किया जाएगा। शुरू में इसे एक बड़ी रैली के रूप में आयोजित करने का प्रस्ताव था, लेकिन महागठबंधन के नेताओं ने रणनीति बदलते हुए 1 सितंबर को राजधानी में पदयात्रा निकालने का फैसला किया।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, नेताओं का मानना है कि पदयात्रा से जनता में अधिक उत्साह और भागीदारी देखने को मिलेगी। महागठबंधन के कई नेता पहले ही यात्रा में शामिल हो चुके हैं, ऐसे में सभी को फिर से रैली के लिए इकट्ठा करने का कोई विशेष फायदा नहीं होता।

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