Bihar voter list: राहुल गांधी का नया दावा—एक घर में 947 वोटर, अब चुनाव आयोग ने दिया 'रियलिटी चेक'
Bihar Voter List Row (Rahul Gandhi): बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को लेकर जबरदस्त सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने फिर एक बार चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि गया जिले के निदानी गांव में (बूथ नं. 161, बाराचट्टी विधानसभा) एक ही घर नंबर (नंबर 6) पर पूरे 947 वोटर दर्ज हैं।
कांग्रेस ने इसे चुनाव आयोग का "चमत्कार" करार देते हुए कहा कि असली घरों और परिवारों को छोड़कर पूरा गांव एक काल्पनिक घर में समेट दिया गया है। पार्टी का आरोप है कि यह कोई साधारण भूल नहीं, बल्कि पारदर्शिता का मजाक है। राहुल गांधी ने इसे सोशल मीडिया एक्स पर शेयर करते हुए लिखा है, ''EC का जादू देखो, एक मकान में बसा पूरा गांव!''

कांग्रेस का आरोप: "फर्जी वोटर और भूतिया नाम छिपाने का खेल"
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, ''बिहार में चुनाव आयोग का करिश्मा, निदानी गांव, बोधगया (बूथ नं. 161, बाराचट्टी विधानसभा) में EC ने चमत्कार कर दिखाया। आधिकारिक वोटर लिस्ट में - 947 वोटर एक ही घर (मकान नं. 6) में रहते हैं। हकीकत? निदानी में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर लिस्ट में पूरा गांव एक काल्पनिक मकान में समा गया।''
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सर्वे करते हैं तो फिर सही घर नंबर क्यों नहीं जोड़े गए? आखिर किसे फायदा पहुंचाने के लिए ये 'नंबर गेम' खेला गया?
पार्टी ने आरोप लगाया-
''BLO ने किस तरह डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन की? असली मकान नंबर वोटर लिस्ट से क्यों गायब कर दिए गए? इसका फायदा किसे पहुंचाया जा रहा है? यह कोई साधारण गलती नहीं, बल्कि पारदर्शिता के नाम पर एक मजाक है। जब मकान नंबर मिटा दिए जाते हैं, तो फर्जी वोटर, डुप्लीकेट नाम और भूतिया पहचान छिपाना आसान हो जाता है। अगर एक छोटे से गांव में 947 वोटरों को एक ही पते पर "डंप" किया जा सकता है, तो सोचिए बिहार और पूरे भारत में गड़बड़ी का पैमाना कितना बड़ा होगा। जैसा राहुल गांधी जी लगातार कह रहे हैं - "लोकतंत्र की चोरी हो रही है।" निदानी इसका जीता-जागता सबूत है।''
कांग्रेस ने पोस्ट के आखिर में कहा, ''ज्ञानेश गुप्ता जवाब दें-क्या पूरा निदानी गांव सचमुच एक ही घर में रहता है, या ये लोकतंत्र लूटने का नया तरीका है?''
गया प्रशासन का पलटवार: "घर नंबर सिर्फ प्रतीकात्मक"
राहुल गांधी के दावे के बाद गया जिला प्रशासन ने चार वीडियो क्लिप जारी कर सच्चाई सामने रखी। प्रशासन ने कहा- "कई गांवों में मकानों को आधिकारिक घर नंबर आवंटित नहीं किए जाते। ऐसे में वोटर लिस्ट तैयार करने के लिए BLO प्रतीकात्मक (symbolic) या काल्पनिक घर नंबर देता है। निदानी गांव में दर्ज सभी वोटर असली हैं और गांव में मौजूद हैं। बूथ नंबर 161 के मतदाता खुद भी स्थिति साफ कर रहे हैं।"
एक वीडियो में गांव का निवासी कहता है-"यहां बदनाम किया जा रहा है कि 900 वोट एक घर में हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। हम चुनाव आयोग के सर्वे से संतुष्ट हैं। दरअसल, हमारे गांव में घरों के नंबर नहीं हैं, इसलिए वोटर लिस्ट में प्रतीकात्मक नंबर दिए जाते हैं।"
दूसरे वीडियो में एक महिला कहती हैं- "मेरा नाम रिंकी कुमारी है। मैं पहले भी वोट देती आई हूं और आज भी मेरा नाम लिस्ट में है। गांव में घर नंबर नहीं हैं, इसलिए वोटर लिस्ट में भी घर नंबर नहीं लिखे गए।"
चुनाव आयोग का 'रियलिटी चेक'
बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (Chief Electoral Officer) ने भी सफाई देते हुए कहा- "Notional House Number यानी काल्पनिक घर नंबर तब दिया जाता है जब किसी मतदाता के घर का वास्तविक नंबर मौजूद नहीं होता। गांवों, झुग्गियों और अस्थायी बस्तियों में अक्सर घर नंबर नहीं होते। ऐसे में BLO मौके पर जाकर हर घर को क्रमवार (1, 2, 3...) नंबर देता है ताकि मतदाता सूची व्यवस्थित रहे।" आयोग ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ तकनीकी सुविधा के लिए किया जाता है, ताकि वोटरों का क्रम से रिकॉर्ड रखा जा सके।
सियासत गरमाई, जनता कंफ्यूज
कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतंत्र पर हमला बता रही है, जबकि प्रशासन और चुनाव आयोग इसे सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया कह रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी का यह आरोप जनता के बीच 'वोट चोरी नैरेटिव' को मजबूत करेगा या फिर आयोग की सफाई से कांग्रेस के दावों पर पानी फिर जाएगा?












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