Bihar Today: पाकिस्तान की गोलीबारी में शहीद रामबाबू सिंह का पार्थिव शरीर आज पहुंचेगा सिवान, CM देंगे 50 लाख
Bihar Today News: बिहार के सीवान के रहने वाले 26 साल के राम बाबू कुमार सिंह जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले बिहार के दूसरे सैनिक हैं। पाकिस्तान की गोलीबारी में राम बाबू सिंह शहीद हो गए हैं। आज उनका पार्थिव शरीर बिहार के सीवान में उनके गांव पहुंचेगा। बड़हरिया प्रखंड के वासिलपुर गांव के रहने वाले राम बाबू की शादी महज पांच महीने पहले ही हुई थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, सोमवार (12 मई) देर रात उनकी मौत हो गई।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राम बाबू सिंह के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता करेंगे। सीएम नीतीश उनके गांव भी उनके श्रद्धांजलि देने जा सकते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, "देश हमेशा राम बाबू सिंह के बलिदान को याद रखेगा। मैं उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।"

शहीद रामबाबू सिंह: पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा अंतिम संस्कार
राज्य सरकार ने शहीद के परिजनों के लिए 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है और पुष्टि की है कि उनका अंतिम संस्कार पूरे पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। नीतीश कुमार ने नागरिकों से इस कठिन समय में सैनिक के परिवार के साथ एकजुटता से खड़े होने का भी आग्रह किया। गुरुवार 15 मई को शहीद रामबाबू सिंह के पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए लाया जाएगा। अंतिम संस्कार में सेना के अधिकारी और जिला अधिकारी शामिल होंगे।
शहीद राम बाबू की शादी दिसंबर 2024 में हुई थी
राम बाबू की शादी दिसंबर 2024 में अंजलि से हुई थी, जो फिलहाल धनबाद (झारखंड) में अपनी मां के घर पर रह रही हैं और गर्भवती बताई जा रही हैं। वासिलपुर के ग्रामीणों का कहना है कि राम बाबू की विरासत बिहार और देश के दिल में अमर रहेगी। उनके निधन की खबर से गांव में मातम छा गया।
शहीद जवान के चाचा शशिकांत ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि वे हरिहरपुर पंचायत के पूर्व उप मुखिया रामविचार सिंह के छोटे बेटे थे, जिनकी दो साल पहले मौत हो गई थी। उनके बड़े भाई लोको पायलट थे और झारखंड के हजारीबाग में तैनात थे। राम बाबू के परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह बचपन से ही देश की सेवा करने की बात करते थे।












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