Sitamarhi Lok Sabha: जीत की हैट्रिक लगा चुकी है कांग्रेस, BJP आज तक नहीं खोल पाई खाता, जानिए इतिहास
Sitamarhi Lok Sabha Seat History And Profile: बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी बाज़ार सज चुका है। प्रदेश की सभी 40 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी मंथन भी शुरू कर दिया है। इसी क्रम में आज हम आपको बिहार की सीतामढ़ी लोकसभा सीट का इतिहास और सियासी समीकरण बताने जा रहे हैं।
सीतमाढ़ी क्षेत्र 1952 के पहले हुए चुनाव मुजफ्फरपुर पूर्वी क्षेत्र में शामिल था। साल 1957 के चुनाव में सीतामढ़ी लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। बुजुर्गों की मानें तो मां सीता की जन्मस्थली होने की वजह से इसे सीतामढ़ी की संज्ञा दी गई। सीतामढ़ी पहले मुज़फ़्फ़रपुर जिले में शामिल था। 1997 में सीतामढ़ी को ज़िल का दर्जा हासिल हुआ।

1957 में सीतामढ़ी लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। सीतामढ़ी लोकसभा सीट के अंदर 6 विधानसभा परिहार, बथनाहा, सुरसंड, रून्नीसैदपुर, बाजपट्टी और सीतामढ़ी शामिल हैं। कांग्रेस प्रत्याशी नागेंद्र प्रसाद यादव जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। कांग्रेस नेता नागेंद्र प्रसाद यादव ने 1961, 1967 और 1971 के चुनावों लगातार जीत का परचम लहराया था।
1977 के लोकसभा चुनाव में लोकदल प्रत्याशी महंत श्याम सुंदर दास ने जीत का परचम लहराया था। इसके अलावा जनता दल प्रत्याशी नवल किशोर भी जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। 1991, 1996 और 1999 में उन्होंने जनता दल का परचम बुलंद किया था।
सीतामढ़ी लोकसभा सीट के सियासी इतिहास पर नज़र डालें तो 1952 से लेकर 2019 तक के चुनाव में भाजपा का कमल नहीं खिल पाया है। पहले तो यहां कांग्रेस का बोलबाला था लेकिन आपातकाल के बाद समाजवादियों की सियासत को हवा मिली और समीकरण बदलते रहे।
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सीतामढ़ी लोकसभा सीट पर हुए पिछले 3 लोकसभा चुनावों की बात करें तो 2009 के चुनाव में जदयू प्रत्याशी अर्जुन राय ने जीत का परचम लहराया। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के तहत रालोसपा प्रत्याशी रामकुमार शर्मा ने जीत दर्ज की थी।
2019 में एनडीए में शामिल हुए जदयू के खाते में यह सीट गई। पार्टी में कोल्डवार की वजह से नीतीश कुमार ने आखिरी वक़्त में भाजपा नेता सुनील कुमार पिंटू को जदयू में शामिल कर चुनावी मैदान में उतारा था। उन्होंने जीत दर्ज कर जदयू का परचम बुलंद किया है।












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