Bihar SIR: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वोटर लिस्ट पब्लिशिंग पर रोक नहीं, आधार और वोटर ID पर विचार करने को कहा
Bihar SIR Supreme Court hearing LIVE: सुप्रीम कोर्ट में आज सोमवार 28 जुलाई 2025 को चुनाव आयोग द्वारा बिहार में चलाए जा रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने हुई। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) के प्रकाशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह लिस्ट 1 अगस्त को प्रकाशित होनी है, जो कि चुनाव आयोग द्वारा घोषित SIR कार्यक्रम के तहत तैयार की जा रही है।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चुनाव आयोग से कहा है कि बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता की पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड और मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) को स्वीकार्य दस्तावेज के रूप में शामिल करने पर विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी सभी पक्षकारों से यह भी कहा है कि वे अपनी-अपनी दलीलों में लगने वाले समय का निर्धारण करें, ताकि अदालत कल (29 जुलाई) अगली सुनवाई की तारीख तय कर सके। में कितना वक्त लगेगा।

सुप्रीम कोर्ट बिहार SIR पर सुनवाई के लिए 29 जुलाई को करेगा फैसला
मुख्य न्यायाधीश के साथ एक प्रशासनिक बैठक में शामिल होने की वजह से न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ आज इस मामले की विस्तृत सुनवाई नहीं कर सकी। हालांकि न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं को आश्वासन दिया कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द की जाएगी। इसके लिए उन्होंने वकीलों से कहा कि वे कल (29 जुलाई) तक यह जानकारी दें कि हर पक्ष को बहस के लिए कितना समय चाहिए, ताकि सुनवाई के लिए तारीख तय की जा सके।
इसका मतलब यह है कि अभी के लिए ECI यानी चुनाव आयोग को मतदाता सूची प्रकाशित करने से नहीं रोका गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की सुनवाई जल्द करेगा और अगर उसे याचिकाकर्ताओं की बात सही लगी, तो भविष्य में वह इस पूरी प्रक्रिया को रद्द भी कर सकता है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब कई याचिकाकर्ताओं ने इस विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि इससे लाखों मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन: सुप्रीम कोर्ट सुनवाई की हर अपडेट
▶️ मृत्युंजय तिवारी ने कहा- हमें उम्मीद है कि SIR न्याय होगा
राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने बिहार में जारी SIR पर कहा,
"सर्वोच्च न्यायालय में SIR को लेकर आज सुनवाई होनी है। हमें उम्मीद है कि न्याय होगा और बिहार के गरीब, पिछड़े मतदाताओं को वोट देने का अधिकार मिलेगा। जिस तरह से चुनाव आयोग के द्वारा मताधिकार से ही वंचित किया जा रहा है, उस पर न्यायालय संज्ञान लेने का काम करेगा...हमें भरोसा है कि बिहार में लोकतंत्र का गला नहीं घोटा जाएगा..."
▶️ कोर्ट ने वकीलों से कहा कि वे अपनी-अपनी दलीलें पेश करने में लगने वाले अनुमानित समय के बारे में बताएं। जस्टिस कांत ने कहा: "हम आज कोई आदेश पारित नहीं करेंगे। जब वह समय-सारणी हमें मिलेगी, तब मैं देखूंगा कि हम कब समय निकाल सकते हैं। कल हम अगली सुनवाई की तारीख तय करेंगे।"
▶️ जस्टिस कांत: यह तो सिर्फ एक प्रारंभिक (ड्राफ्ट) प्रक्रिया है। इससे आपके अधिकार खत्म नहीं होते...अगर हमें आपकी बातों से सहमति हुई, तो हम पूरी प्रक्रिया को रद्द कर देंगे। सब कुछ अंतिम निर्णय के अधीन है।
गोपाल एस: जब ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित होती है, तब आपत्तियां आती हैं।
जस्टिस कांत: जो लोग 2003 की कट-ऑफ तारीख पर मौजूद हैं, उनके मामले में सवाल ही क्या है?
गोपाल एस: लेकिन उन्होंने 2025 के लिए एक नया संशोधन किया है।
जस्टिस बागची: ड्राफ्ट लिस्ट में उन लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे...बशर्ते कि उनके एन्यूमरेशन फॉर्म अपलोड किए गए हों... और अगर दस्तावेज़ अपलोड नहीं भी किए गए हैं, तो भी उनके नाम आपत्तियों के साथ जोड़े जाएंगे।
गोपाल एस: तो उन्हें यह बात स्पष्ट रूप से कहने दीजिए।
▶️ चुनाव आयोग ने अपने पक्ष में कहा है कि विशेष पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची से अपात्र नामों को हटाकर एक साफ-सुथरी और विश्वसनीय सूची तैयार करना है।
▶️ आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया में राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ 1.5 लाख से अधिक बूथ-स्तरीय एजेंटों की सक्रिय भागीदारी रही है।
▶️एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने बिहार में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं के क्रम में अपना प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) दाखिल किया है।
बिहार SIR विवाद : क्या है मामला?
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू की। इस कदम को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिसमें इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2025 को सुनवाई के दौरान कहा था कि "न्याय के हित में" आधार कार्ड, वोटर आईडी (EPIC) और राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाए ताकि नए मतदाता खुद को सूची में जोड़ सकें।
इससे पहले जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और कहा था कि SIR प्रक्रिया जारी रह सकती है। याचिकाकर्ताओं ने भी उस समय किसी तरह के स्थगन (Stay) की मांग नहीं की थी।
चुनाव आयोग का दावा
27 जुलाई 2025 को चुनाव आयोग ने जानकारी दी कि बिहार में 2025 की मतदाता सूची में दर्ज 91.69% मतदाताओं ने SIR प्रक्रिया के तहत नामांकन फॉर्म जमा कर दिए हैं। यह आंकड़ा यह दिखाता है कि राज्य में मतदाता पुनरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है। एक अगस्त को वोटर लिस्ट जारी किए जाएंगे।












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