Bihar Opinion Poll 2025: नीतीश, तेजस्वी या कोई और? बिहार में अबकी बार किसकी सरकार? सर्वे ने कर दिया साफ
Bihar 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनावी मैदान में कौन बाजी मारेगा, इसे लेकर तमाम दावे और कयास लगाए जा रहे हैं। इसी बीच लोकपोल (Lok Poll) का ताजा सर्वे सामने आया है, जिसने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आंकड़ों से साफ है कि मुकाबला बेहद करीबी होने वाला है और सत्ता की कुर्सी पर बैठने का फैसला आखिरी वोट तक जा सकता है।
लगातार तीन हफ्तों तक जमीन पर घूम-घूमकर रिसर्च करने, गहन फील्डवर्क और बूथ स्तर तक जाकर लोगों की राय जानने के बाद लोकपोने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अब तक का सबसे चर्चित और बड़ा सर्वे जारी किया है।

NDA और महागठबंधन में कांटे की टक्कर, किसे कितनी सीटें? (Bihar seat projection)
लोकपोल के सर्वे के मुताबिक, इस बार का चुनाव एनडीए और महागठबंधन (MGB) के बीच सीधा मुकाबला दिख रहा है। सीट प्रोजेक्शन में एनडीए को 105 से 114 सीटें मिल सकती हैं, जबकि महागठबंधन 118 से 126 सीटों पर बढ़त बना सकता है। वहीं अन्य दलों के खाते में 2 से 5 सीटें जाने का अनुमान है। यानी साफ है कि प्रशांत किशोर कोई एक्स फैक्टर साबित नहीं होने वाले हैं।
किस पार्टी को कितना वोट शेयर? (Bihar voting trends)
अगर वोट शेयर पर नजर डालें तो एनडीए को 38% से 41% तक वोट मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 39% से 42% वोट शेयर मिल सकता है। यानी दोनों गठबंधनों के बीच बेहद मामूली अंतर है।
Bihar chunav survey: बिहार चुनाव सर्वे की 5 बड़ी बातें
1️⃣ युवाओं और नए मतदाताओं का झुकाव
सर्वे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें युवा और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं का मूड साफ दिखाई दे रहा है। बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों की वजह से युवा मतदाता महागठबंधन की ओर झुकते दिख रहे हैं। तेजस्वी यादव का आरक्षण कार्ड खासकर ओबीसी और ईबीसी वोटरों को अपनी तरफ खींच रहा है।
2️⃣ नीतीश कुमार पर बढ़ी नाराजगी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि पर इस बार एंटी-इंकम्बेंसी का असर साफ दिख रहा है। लंबे कार्यकाल, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप और स्वास्थ्य कारणों ने उनकी लोकप्रियता को चोट पहुंचाई है। कई ईबीसी तबकों का झुकाव, जो कभी नीतीश का मजबूत वोट बैंक थे, अब धीरे-धीरे एनडीए से दूर हो रहा है।
3️⃣ जातीय समीकरणों का असर
बिहार चुनाव का सबसे अहम पहलू हमेशा से जातीय समीकरण रहे हैं। इस बार मुसलमान और यादव वोटरों का झुकाव मजबूती से महागठबंधन के साथ दिखाई दे रहा है। कांग्रेस को भी जातिगत जनगणना के बाद एससी और ईबीसी समाज (जैसे चमार, मल्लाह, मुसहर) में समर्थन बढ़ता दिख रहा है।
वहीं, बीजेपी अभी भी सवर्ण और बनिया वोट बैंक को अपने साथ मजबूती से जोड़े हुए है। लेकिन जन सुराज पार्टी का असर कुछ इलाकों में खासकर ऊपरी जाति के वोटों को बांटने का काम कर रहा है।
4️⃣ महिलाओं और योजनाओं का प्रभाव
महिलाओं का वोट बैंक इस बार महागठबंधन की तरफ खिसकता नजर आ रहा है। मुफ्त बिजली और "माई-बहिन मान" जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच पैठ बनाई है। पीएम मोदी का महिला वोटरों पर आकर्षण पहले जितना मजबूत नहीं रहा।
5️⃣ राहुल गांधी की बदली छवि
दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी की छवि में भी सुधार हुआ है। उनकी "वोटर अधिकार यात्रा" ने उन्हें गंभीर नेता के तौर पर पेश किया है, जो जन मुद्दों पर केंद्रित हैं। सर्वे बताता है कि राहुल की यह सक्रियता महागठबंधन के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
6️⃣ बसपा और अन्य दलों की स्थिति
यूपी सीमा से सटे इलाकों में बीएसपी का असर लगातार घट रहा है, जिससे महागठबंधन को और फायदा मिलता दिख रहा है। छोटे दलों के खाते में कुछ सीटें जरूर जा सकती हैं, लेकिन बड़ी तस्वीर में उनका असर सीमित ही रहेगा।
सर्वे के नतीजे बताते हैं कि बिहार में इस बार का चुनाव ऐतिहासिक रूप से करीबी हो सकता है। महागठबंधन मामूली बढ़त में दिख रहा है, नीतीश कुमार की अनुभव और सत्ता की पकड़ एक तरफ है, तो दूसरी ओर तेजस्वी यादव की युवा ऊर्जा और सामाजिक समीकरण। अब देखना यह है कि जनता किस पर भरोसा जताती है और बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ जाती है।
बिहार चुनावी तारीख और सियासी जंग
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अक्टूबर-नवंबर में कराए जाने की संभावना है। नीतीश कुमार का कार्यकाल 22 नवंबर तक है, लिहाज़ा उससे पहले चुनाव संपन्न हो जाएंगे। कुल 243 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में मुकाबला बेहद रोचक रहने वाला है। राज्य की राजनीति में आरजेडी, जेडीयू, बीजेपी और कांग्रेस मुख्य खिलाड़ी हैं, जबकि लोजपा, आरएलजेपी, वीआईपी और जन सुराज जैसी पार्टियां भी समीकरण बिगाड़ सकती हैं।












Click it and Unblock the Notifications