Bihar News: नौकरी मिली और छिन भी गई, एक गलती ने चूर कर दिया सपना, जानिए कैसे?
BPSC Teacher Bihar News: बिहार में बीपीएसी शिक्षक बनने के बाद पंचायत शिक्षकों को नेतागिरी करना महंगा पड़ गया है। पंचायत शिक्षक ने जब बीपीएससी परीक्षा पास कर ली तो, उनपर नेतागिरी का भूत सवार हो गया। नेतागिरी का परचम बुलंद करते ही कि, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के संज्ञान में मामला पहुंच गया। इसके बाद केके पाठक ने कार्रवाई ने बबिता कुमारी का सपना ही चूर कर दिया। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है?
मधुबनी जिला के रखवारी पंचायत (अंधराठाढ़ी प्रखंड) की शिक्षिका बबीता कुमारी (बबीता चौरसिया) ने बीपीएससी परीक्षा पास की, इसके बाद उनके सिर पर नेतागिरी का भूत सवार हो गया। पंचायत शिक्षिका के तजुर्बे के ऐताबर पर BPSC अध्यापक संघ ही बना दिया। इसके साथ ही खुद को उसका प्रदेश अध्यक्ष भी नियुक्त कर दिया।

केके पाठक (अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग) के संज्ञाम में यह मामला आया। इसके बाद कार्रवाई करते हुए बबीता कुमारी का प्रोविजनल नियुक्ति पत्र कैंसिल किया गया। वहीं उनके पंचायत शिक्षिका के नियोजन पर ग्रहण लगता हुआ नज़र आ रहा है। पंचायत शिक्षिका का वेतन रोकते हुए डीईओ ने नोटिस जारी कर नियुक्ति पत्र भी रद्द कर दिया।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने DEO को इस बाबत कार्रवाई करने के लिए कहा। डीईओ ने अपर मुख्य सचिव के आदे पर पंचायत सचिव को चिट्ठी लिख 3 दिनों के अंदर कार्रवाई करने की बात कही। पत्र में पंचायत शिक्षिका की सैलरी रोकने का भी अदेश जारी हुआ। वहीं सरकारी शिक्षिका के तौर पर मिले ऑफर लेटर को भी कैंसिल कर दिया गया।
बबीता चौरसिया रखवारी पंचायत स्कूल में बतौर शिक्षिका कार्यरत हैं, उन्होंने BPSC शिक्षक परीक्षा पास कर कामयाबी हासिल की थी। इसके बाद उन्हें उसी स्कूल में पोस्टिंग मिली, जिसमें वह पहले से पढ़ा रहीं थीं। मधुबनी DEO द्वारा जारी जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि माध्यमिक एवं उच्चत्तर माध्यमिक BPSC अध्यापक संघ का गठन बबीता कुमारी ने ही किया था।
बबीता ने संघ का गठन तो किया ही, इसके साथ उन्होंने खुद को संघ का प्रदेश अध्यक्ष बनाते हुए लेटर हेड भी पब्लिश करवाया था। इसके साथ ही लगातार वह बतौर प्रदेश अध्यक्ष मीडिया में बयानबाज़ी भी कर रही थीं। इस मामले को शिक्षा विभाग ने नियम के खिलाफ बताया है। विभाग के मुताबिक धारा 27 के आचार संहिता कंडिका 7 बी (बिहार विद्यालय अध्यापक नियमावली 2023) का उल्लंघन है।
शिक्षा विभाग की तरफ से नवनियुक्त और शिक्षकों को भी चेतावनी दी गई है कि किसी निबंधित और गैर निबंधित संघ में शामिल नहीं हों। बिहार के सभी विद्यालयों के शिक्षकों पर बिहार सरकारी सेवा आचार संहिता 1976 है। अगर कोई संघ का लेटर पैड छपवाते हैं या किसी अन्य काम में शामिल पाए गए तो औपबंधिक नियुक्ति पत्र तुरंत निरस्त कर दी जाएगी।












Click it and Unblock the Notifications