बिहार के नए डिप्टी CM विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद की क्या है जाति? परिवार में कौन-कौन, फैमिली बैकग्राउंड
Vijay Chaudhary Bijendra Prasad Yadav: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद नई सरकार का ढांचा तैयार हो रहा है। इसी कड़ी में नीतीश कुमार की पार्टी JDU के दो 'चाणक्य'विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये दोनों नेता कौन हैं, किस सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं और इनका पारिवारिक व राजनीतिक सफर कितना मजबूत रहा है। आखिर नीतीश कुमार ने अपने इन दो सबसे भरोसेमंद योद्धाओं पर ही दांव क्यों लगाया? विजय चौधरी भूमिहार (सवर्ण कैटेगरी) से हैं और बिजेंद्र प्रसाद यादव (OBC कैटेगरी) से हैं। आइए जानें इनका बैकग्राउंड।

विजय चौधरी कौन हैं? (Who is Vijay Chaudhary)
विजय चौधरी बिहार की राजनीति का एक जाना-पहचाना और भरोसेमंद चेहरा हैं। उनकी पहचान एक शांत, संतुलित और प्रशासनिक पकड़ रखने वाले नेता के रूप में होती है। जदयू में उनका कद लंबे समय से मजबूत रहा है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में उनकी गिनती होती है। उनकी उम्र 69 साल है और वे ग्रेजुएट हैं। राजनीति में उनका सफर चार दशक से ज्यादा पुराना है, जिसमें उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।
विजय चौधरी की जाति और पारिवारिक पृष्ठभूमि (Vijay Chaudhary Caste & Family Background)
विजय चौधरी भूमिहार जाति से आते हैं, जो बिहार की सवर्ण राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है। यही वजह है कि उनकी नियुक्ति को सामाजिक संतुलन के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।
उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक थे। यानी राजनीति उन्हें विरासत में मिली। उनका परिवार पहले से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है, जिसने उनकी राह को आसान तो बनाया, लेकिन चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी थीं।
नौकरी छोड़ राजनीति में एंट्री की कहानी (Vijay Chaudhary Political Journey)
- विजय चौधरी की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ 1982 में आया। उस वक्त वे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में प्रोबेशनरी ऑफिसर के तौर पर नौकरी कर रहे थे। लेकिन पिता के अचानक निधन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और उपचुनाव में उतर गए। यही से उनकी राजनीतिक पारी शुरू हुई और उन्होंने पहली बार चुनाव जीतकर खुद को साबित किया। यह फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बन गया।
- विजय चौधरी ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी। 1985 और 1990 में वे कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने और उस दौर में पार्टी के अहम नेताओं में शामिल रहे। वे विधानसभा में कांग्रेस के सचेतक भी बने।
- हालांकि 1995 और 2000 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2005 में जदयू का दामन थाम लिया। इसके बाद उनका राजनीतिक करियर एक नई दिशा में बढ़ा।
- जदयू में शामिल होने के बाद विजय चौधरी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 2010 से सरायरंजन सीट से लगातार जीत दर्ज कर रहे हैं।
- वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और जल संसाधन, वित्त, शिक्षा, कृषि, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं। वर्तमान में भी वे जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री के रूप में सक्रिय रहे हैं।
बिजेंद्र प्रसाद यादव कौन हैं? (Who is Bijendra Prasad Yadav)
बिजेंद्र प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी और जमीनी नेताओं में से एक हैं। उनकी उम्र 78 साल है और वे बीएससी ग्रेजुएट हैं। राजनीति में उनकी पकड़ खासतौर पर कोसी क्षेत्र में बेहद मजबूत मानी जाती है। उन्हें 'कोसी का विश्वकर्मा' कहा जाता है, जो उनके विकास कार्यों और क्षेत्र में प्रभाव को दर्शाता है।
बिजेंद्र यादव की जाति और पारिवारिक पृष्ठभूमि (Bijendra Prasad Yadav Caste & Family Background)
बिजेंद्र प्रसाद यादव यादव समुदाय से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में सबसे प्रभावशाली ओबीसी वर्गों में गिना जाता है। उनकी सामाजिक पहचान ने उन्हें जमीनी स्तर पर मजबूत आधार दिया है। उनका पारिवारिक जीवन अपेक्षाकृत सादा रहा है, लेकिन उनकी पहचान पूरी तरह उनकी राजनीतिक मेहनत और संघर्ष से बनी है, न कि किसी बड़ी राजनीतिक विरासत से।
जेपी आंदोलन से शुरू हुआ सफर (Bijendra Prasad Yadav Political Journey)
- बिजेंद्र यादव का राजनीतिक करियर जेपी आंदोलन से शुरू हुआ, जो उस दौर में देश की राजनीति को बदलने वाला आंदोलन था। इसी आंदोलन से निकलकर उन्होंने समाजवादी राजनीति में कदम रखा। 1990 में उन्होंने पहली बार जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उनका जीत का सिलसिला लगातार जारी रहा।
- 1991 में उन्हें लालू प्रसाद यादव की सरकार में ऊर्जा राज्य मंत्री बनाया गया। बाद में जब जनता दल में विभाजन हुआ तो उन्होंने शरद यादव का साथ दिया और लालू सरकार से इस्तीफा दे दिया।
- इसके बाद वे नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए। नीतीश सरकार में वे कई बार ऊर्जा मंत्री रहे और वित्त, सिंचाई, योजना एवं विकास जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं।
- सुपौल से 9 बार विधायक चुने जाना कोई छोटी बात नहीं है। 1990 से लेकर अब तक वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। हर चुनाव में उन्होंने अपने विरोधियों को बड़े अंतर से हराया है। 2020 और 2025 के चुनावों में भी उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा, जिससे उनकी लोकप्रियता और संगठनात्मक पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आखिर क्यों इन दोनों को ही चुना गया डिप्टी सीएम?
नीतीश कुमार ने विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम बनाकर एक बहुत बड़ा 'सोशल इंजीनियरिंग' मैसेज दिया है:
सवर्ण और पिछड़ा मेल: विजय चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र यादव (यादव) को साथ लाकर नीतीश ने सवर्णों और पिछड़ों के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की है।
अनुभव बनाम युवा जोश: जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक युवा और आक्रामक चेहरा हैं, वहीं विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव का प्रशासनिक अनुभव सरकार को स्थिरता प्रदान करेगा।
भरोसेमंद साथी: नीतीश कुमार इस समय ऐसे चेहरों को आगे रखना चाहते हैं जिन पर वे आँख मूंदकर भरोसा कर सकें। ये दोनों नेता दशकों से नीतीश के साथ डटे हुए हैं, चाहे गठबंधन किसी के भी साथ रहा हो।
आगे की राह और सरकार के सामने चुनौतियां
बिहार की इस नई सरकार में इन दोनों दिग्गजों की भूमिका केवल विभाग संभालने तक सीमित नहीं रहेगी। विजय चौधरी को जहां भाजपा और जेडीयू के बीच एक 'सेतु' (Bridge) की भूमिका निभानी होगी, वहीं बिजेंद्र यादव को सीमांचल और कोसी क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखनी होगी ताकि विपक्षी दलों के दांव को काटा जा सके।
2025 के चुनाव परिणामों के बाद यह नई व्यवस्था बिहार की राजनीति को किस ओर ले जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है कि विजय चौधरी की 'सौम्यता' और बिजेंद्र यादव का 'अनुभव' बिहार की नई सरकार के लिए सबसे बड़ी ढाल साबित होने वाला है।
विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव का डिप्टी सीएम बनना केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि बिहार की उस पुरानी समाजवादी परंपरा का सम्मान है जो 'जमीन से जुड़कर' राजनीति करने में विश्वास रखती है। एक तरफ बैंक की नौकरी छोड़ने वाला भूमिहार बेटा है, तो दूसरी तरफ कोसी की लहरों के बीच अपनी राजनीति चमकाने वाला यादव योद्धा। इन दोनों का साथ आना बिहार की नई सरकार को एक मजबूत और संतुलित चेहरा दे रहा है।














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