Bihar News: बिहार के सांसदों-विधायकों में हड़कंप! आनन-फानन में क्यों लौटाने लगे पेंशन की राशि?
Bihar MLA Pension Refund: बिहार में विधायकों और विधान पार्षदों द्वारा एक साथ वेतन और पेंशन लेने का मामला अब राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का विषय बन गया है। सूचना के अधिकार के तहत सामने आए इस खुलासे ने सरकारी खजाने के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
firstbihar.com की रिपोर्ट के अनुसार, आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय की पहल से यह मामला उजागर हुआ, जिसके बाद दबाव बढ़ने पर तीन वरिष्ठ नेताओं ने अतिरिक्त रूप से ली गई पेंशन राशि सरकार को वापस लौटा दी। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों पर नई चर्चा छेड़ दी है।

उपेंद्र कुशवाहा ने लौटाई सबसे बड़ी रकम
आरटीआई से हुए खुलासे के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने सबसे अधिक राशि सरकारी खजाने में लौटाई है। उन्होंने पेंशन के रूप में प्राप्त अतिरिक्त 3,36,135 रुपये 11 दिसंबर 2025 को जमा कराए। उनके अलावा जेडीयू विधायक रामसेवक सिंह ने 53,867 रुपये और राजद विधायक राहुल कुमार ने 30,400 रुपये की अतिरिक्त पेंशन वापस की। भंडाफोड़ के बाद इन नेताओं ने चालान के जरिए राशि जमा कर अपनी गलती सुधारने का प्रयास किया है।
Bihar News Today: क्या है पूरा मामला?
बिहार में यह पूरा मामला 'दोहरे लाभ' के अनैतिक खेल से जुड़ा है। नियम के मुताबिक, कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ पेंशन और वेतन दोनों नहीं ले सकता। आरटीआई एक्टिविस्ट शिवप्रकाश राय ने खुलासा किया कि बिहार के कई माननीय विधायक और विधान पार्षद वर्तमान में वेतन लेने के बावजूद पुरानी पेंशन भी डकार रहे थे।
जब यह जानकारी सार्वजनिक हुई और माननीयों की साख पर सवाल उठे, तो हड़कंप मच गया। इसी दबाव के चलते उपेंद्र कुशवाहा, रामसेवक सिंह और राहुल कुमार जैसे नेताओं ने चुपचाप चालान के जरिए अतिरिक्त ली गई लाखों की राशि सरकारी खजाने में वापस जमा कराई। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक नैतिकता के पतन को उजागर करता है।
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कोषागार पदाधिकारी ने दी सफाई
शुरुआत में पटना सचिवालय कोषागार द्वारा दी गई अधूरी जानकारी से यह भ्रम फैला था कि 8 माननीय वेतन और पेंशन दोनों साथ ले रहे हैं। विवाद बढ़ने पर वरीय कोषागार पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में केवल भोला यादव की 65,000 रुपये पेंशन जारी है। शेष सात विधायकों की पेंशन पहले ही बंद की जा चुकी थी। हालांकि, यह स्पष्ट हुआ कि कुछ नेताओं ने अपने पुराने कार्यकाल की पेंशन राशि नियम विरुद्ध तरीके से अधिक उठाई थी, जिसे अब वापस लिया जा रहा है।
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नेताओं की पेंशन का पूरा लेखा-जोखा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपेंद्र कुशवाहा को 2005 से 2021 तक पेंशन मिली, जबकि देवेश चंद्र ठाकुर को 86,000 रुपये प्रति माह की दर से कुछ महीनों तक भुगतान हुआ। वहीं, नीतीश मिश्रा ने केवल दो महीने की पेंशन ली और विजेंद्र प्रसाद यादव ने 2005 में मात्र 10,000 रुपये मासिक पेंशन उठाई थी। इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में अब जन प्रतिनिधियों की आर्थिक पारदर्शिता पर जनता और आरटीआई कार्यकर्ताओं की पैनी नजर बनी हुई है।












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